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फ्री दाखिले से वंचित रहे काफी बच्चे

Sun, 11 May 2014 11:39 PM IST
करनाल
करनाल Updated Sun, 11 May 2014 11:39 PM IST
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शिक्षा नीति की धारा-134 ए के तहत लर्निंग लेवल असेसमेंट टेस्ट ने शिक्षा
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विभाग की लचर व्यवस्था की पोल खोल दी है। अधिकतर गरीब बच्चे मुफ्त दाखिला लेने से वंचित रह गए।

शिक्षा विभाग की ओर से टेस्ट की सूचना न मिलने से परीक्षा केंद्र खाली रहे। इससे अच्छे स्कूल में दाखिला लेना का सपना केवल सपना ही बन कर रह गया। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि निजी स्कूल में मुफ्त दाखिला लेने के लिए 1940 बच्चों ने आवेदन किया था, लेकिन तालमेल ने होने की वजह से रविवार को केवल 362 बच्चे ही टेस्ट देने के लिए पहुंचेे। 

निजी स्कूलों में गरीब व बीपीएल परिवार के बच्चों को दाखिला देने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से लर्निंग लेवल असेसमेंट टेस्ट रविवार को आयोजित किया गया। विभाग की लापरवाही के चलते दाखिला लेने का इंतजार कर रहे अधिकतर बच्चों को इसकी सूचना ही नहीं पहुंची। इस कारण वह परीक्षा में नहीं बैठ पाए।

मात्र औपचारिकता निभा रहा है शिक्षा विभाग
शिक्षा विभाग के अधिकारी भी निजी स्कूलों को ही तवज्जो देते नजर आ रहे हैं। यही कारण माना जा रहा है कि जानबूझ कर अधिकारियों ने बच्चों को समय रहते टेस्ट की सूचना नहीं दी। अब अनेक बहाने बनाकर अधिकारी अपनी लापरवाही को छिपाने में लगे हैं। अभिभावकों का साफ कहना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों का यही डर था कि जो उन्हें बच्चों को टेस्ट से वंचित रखकर पूरा कर दिया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों व निजी स्कूलों की मिलीभगत है। इसकी वजह से ही उनके बच्चे निशुल्क अच्छी शिक्षा से वंचित रह गए। 

सिलेबस में पिछड़ जाएंगे 
तीसरी से 10वीं व 12वीं कक्षा में दाखिला इसी टेस्ट के आधार पर गरीब बच्चों को मिलना है, लेकिन सूचना न मिलने के कारण अधिकतर बच्चे टेस्ट देने से वंचित रह गए हैं। शिक्षा विभाग की लेटलतीफी की वजह से बच्चों की पढ़ाई पर काफी प्रभाव पड़ेगा। अधिकतर स्कूल में कई दिनों से कक्षा चल रही हैं और काफी हद तक सिलेबस हो चुका है। जो बच्चे यह परीक्षा पास करके निजी स्कूलों पर दाखिला लेंगे वो सिलेबस से पिछड़ जाएंगे।

जिले में बनाए गए दो परीक्षा केंद्र

शिक्षा विभाग ने जिले के करीब दो हजार गरीब बच्चों के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया। लड़कों के स्कूल में कक्षा तीसरी से छठी तक 1036 बच्चों ने परीक्षा देनी थी, जबकि मात्र 204 परीक्षार्थि ही परीक्षा केंद्र पहुंचे।  राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सातवीं कक्षा से बारहवीं तक 904 बच्चों के लिए परीक्षा केंद्र बनाया गया था, लेकिन केवल 158 बच्चे ही परीक्षा में बैठ सके। ग्यारहवीं कक्षा को इस टेस्ट में शामिल नहीं किया गया था।
जिला शिक्षा अधिकारी आशा मुंजाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी उदय प्रताप सिंह, उप जिला शिक्षा अधिकारी निर्मल तनेजा व जिला गणित विशेषज्ञ मोहन लाल मुंजाल ने इन परीक्षा केंद्रों का दौरा किया।

42 में से आए मात्र चार परीक्षार्थी

राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सातवीं कक्षा से बारहवीं कक्षा के बच्चों के लिए परीक्षा केंद्र बनाया गया था। दसवीं कक्षा के लिए चार सेक्शन बनाए, जिसमें से एक सेक्शन में 42 बच्चों में से केवल 4 बच्चे ही परीक्षा देने के लिए पहुंच सके।

किस कक्षा के लिए कितने बच्चों ने दी परीक्षा
कक्षा     
कुल आवेदन     परीक्षा देने वाले बच्चे
तीसरी     271        50
चौथी     291        56
पांचवीं     236        47
छठी      238        50
सातवीं     227        38
आठवीं     205        39
नौवीं      195        40
दसवीं     177        23
बारहवीं  100        18


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