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Karnal News: तनाव, अवसाद और मोटापा कम कर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा प्रोबायोटिक दही

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jun 2023 03:02 AM IST
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Four bridges being built on NBK and SYL canal with 23.39 crores
तनाव, अवसाद और मोटापा कम कर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा प्रोबायोटिक दही
- एनडीआरआई ने लॉन्च किया दूध से प्रोबायोटिक दही बनाने वाला कल्चर पाउडर
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- शरीर में मित्र बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाएगा यह दही, पेट संबंधी कई बीमारियों की रोकथाम में होगा सहायक
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। एनडीआरआई ने प्रोबायोटिक दही बनाने का कल्चर पाउडर (योगर्ट) तैयार कर लिया है। जिसे सीधे दूध में डालने के बाद दही बन जाएगा। खास बात ये है कि इससे बने दही के नियमित सेवन से तनाव, अवसाद व मोटापे को कम करने में मदद मिलेगी। वहीं, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होगी। यह शरीर में मित्र बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाएगा और पेट संबंधी कई बीमारियों की रोकथाम में भी सहायक होगा।
विश्व दुग्ध दिवस के मौके पर राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल में संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने वैज्ञानिकों की टीम के साथ नई तकनीक डायरेक्ट वैट सेट (डीवीसी) वाला कल्चर पाउडर लॉन्च किया। वीरवार को विश्व दुग्ध दिवस के मौके पर एनडीआरआई में मिल्क परिसर में दूध उत्पाद बनाने की कई तकनीक का प्रदर्शन किया गया। छात्रों ने स्टाॅल लगाए। एक पोस्टर भी जारी किया गया। जिसमें बताया गया कि दही बनाने के पुराने तरीके जामन आदि लंबे समय तक प्रक्रिया में रहने पर उनमें कई अन्य तरह के बैक्टीरिया प्रवेश कर जाते हैं, जिससे वह शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। समय भी अधिक लगता है।
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डीवीसी तकनीक से सीधे दूध में पाउडर डालने से शुद्ध प्रोबायोटिक दही तैयार हो जाता है। वैज्ञानिक डॉ. चादराम ग्रोवर की लैब में यह पाउडर तैयार किया गया। इसे कई सालों की अनुसंधानिक कसौटी पर परखा गया है। इस तकनीक को एनडीआरआई इच्छुक व्यक्ति को हस्तांतरित करेगा, वह इसे बाजार में उतार सकेगा।
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निदेशक ने कहा कि इसे वह छोटे-छोटे पैक में भी विकसित करना चाहते हैं, यदि कोई उद्यमी ऐसा करना चाहेगा तो वह सहयोग करेंगे। शाम को निदेशक डॉ. धीर सिंह ने दूध में सोर्बिटोल की पहचान के लिए भी संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार तकनीक रैपिड टेस्ट को लॉन्च किया। इससे बेहद कम समय में दूध में सोर्बिटोल की मिलावट का पता लग जाएगा।
ये भी किए प्रदर्शित
कार्यात्मक गुणों वाले हर्बल अर्क के साथ घी जैसे प्रमुख नवीन उत्पाद, करक्यूमिन फोर्टिफाइड घी, उच्च प्रोटीन आइसक्रीम, खनिज मिश्रण, बाजरा बिस्कुट, बाजरा लस्सी, साइलेज उत्पादन इकाई और पनीर तैयार करने की इकाई का भी प्रदर्शन किया गया। दूध में मिलावट का पता लगाने वाली किट आकर्षण का केंद्र रही।
डेयरी विश्व की 20 फीसदी आबादी की आजीविका का स्रोत
एनडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह ने कहा कि वैश्विक आबादी का लगभग 20 प्रतिशत आजीविका के स्रोत के रूप में डेयरी क्षेत्र पर सीधे तौर पर निर्भर है। भारतीय कृषि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में डेयरी क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान है। ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए डेयरी पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने की बहुत गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन में भारत नंबर वन है और 210 मिलियन टन तक उत्पादन पहुंच गया है। अब हमारा लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के दौर में अपनी दुग्ध उत्पादकता को बढ़ाए रखना है। देश की प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की उपलब्धता 460 ग्राम तक पहुंच रही है, इसे अमृत काल में एक लीटर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति तक पहुंचाना लक्ष्य है।

महिला उद्यमियों ने की सहभागिता
प्रदर्शनी में चिराव, कटलारी, पधाना, घोघड़ीपुर, कमलपुर और घोघड़ीपुर आदि गांवों की डेयरी फार्मिंग और प्रसंस्करण से जुड़ीं विभिन्न महिला उद्यमियों, किसानों ने भी प्रदर्शनी में नई तकनीक देखी। जन कल्याण समिति, केवीके, एनडीआरआई के समर्थित किसान उत्पाद संगठनों ने इसमें सहभागिता की।
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