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अब संवरेंगे शहर के 45 पार्क

Sun, 15 Nov 2015 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल Updated Sun, 15 Nov 2015 11:58 PM IST
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forty five park will modify soon
हुडा की तर्ज पर अब नगर निगम पार्कों को वेलफेयर सोसायटियों को देने का मन
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बनाया है। शहर के पार्कों की दशा में सुधार लाने के लिए व पार्कों को बेहतर तरीके से मेंटेन करने के लिए फैसला लिया गया है। निगम के इस प्रस्ताव को निदेशालय से भी अनुमति मिल गई है।

निगम ने इस प्लान को धरातल पर लाने के लिए शहर के छोटी बड़े सभी पार्कों के क्षेत्रफल का डाटा बेस तैयार करने का काम भी शुुरू कर दिया है। उम्मीद है कि नए साल पर इस पर काम शुरू हो जाएगा। गौरतलब है कि निगम के अंतर्गत छोटे बड़े करीब 45 पार्क आते हैं। निगम में स्टाफ की कमी के कारण इनका बेहतर रखरखाव नहीं हो रहा है। शहरवासी लगातार पार्कों की दुर्दशा की शिकायत करते रहे हैं।

इसके स्थायी समाधान के लिए वेलफेयर सोसायटियों को काम सौंपने के लिए निगम ने हाउस में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई थी। इसके बाद अनुमति के लिए इस प्रस्ताव को शहरी निकाय निदेशालय को भेजा गया था। अब निगम को ऐसा करने की अनुमति मिल गई है। निगम के अधिकारियों को उम्मीद है कि सभी पार्क सोसायटियों को देने के बाद यकीनन पार्कों की दशा में सुधार आएगा।

उजड़े पड़े हैं निगम के पार्क
नगर निगम के पास स्टाफ की कमी के चलते शहर की अधिकतर पार्क उजड़े हालात में है। पार्कों में लगे गंदगी ढेरों व रेहड़ी वालों के अवैध कब्जों के चलते आसपास के लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। निगम प्रशासन द्वारा अब तक पार्कों की दशा में सुधार लाने के लिए किए गए प्रयास नाकाम रहे हैं। छोटे पार्क तो छोड़िए अगर शहर के सबसे बड़े पार्क कर्ण पार्क की बात करें तो यहां भी हालात इतने बुरे हैं कि कई कई फुट का घास व झाड़ियां जमी है। इसके अलावा यहां पर पड़ी गंदगी के कारण लोगों को पार्क में बैठना दूभर हो गया है। इसके अलावा अन्य पार्कों के हालात भी कुछ इसी प्रकार हैं। ऐसे में लोगों को पार्कों का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि इनकी देखरेख के नाम पर लाखों रुपये हर माह खर्च किए जा रहे हैं।

तीन टीमें की गठित
अब निदेशालय से मंजूरी मिलने के बाद निगम ने तीन टीमों का गठन किया है। टीम ने शहर के छोटे बड़े सभी पार्कों के क्षेत्रफल व उनकी मेंटेनेंस पर आ रहे मासिक खर्च का डाटा बेस तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। तीनों टीमों का हेड  एक एक एमई (म्यूनिसिपल इंजीनियर) को लगाया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही पूरा डाटा तैयार हो जाएगा और इसके बाद संबंधित क्षेत्र के पार्क को वहां के वेलफेयर एसोसिएशन को दे दिया जाएगा। निगम हर माह वेलफेयर एसोसिएशन के खाते में पार्क मेंटेनेंस के पैसे डालेगा और देखभाल की जिम्मेदारी एसोसिएशन की होगी।
तीन रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से दिए जाएंगे पार्क
नगर निगम द्वारा पार्क डेवलेपमेंट खर्च के रूप में सोसायटियों को तीन रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से पे किया जाएगा। इसमें सड़क निर्माण से लेकर, पौधारोपण, घास की कटाई व पार्कों के सौंदर्यीकरण को लेकर अन्य सभी कार्य करने की जिम्मेदारी सोसायटी की होगी, लेकिन निगम प्रोपर्टी का नुकसान या पार्कों में झूले, चहारदीवारी, पानी की व्यवस्था जैसे कार्यों का खर्च निगम को स्वयं वहन करने होंगे।
निगम के पास नहीं है पर्याप्त स्टाफ
नगर निगम के पास शहर की सड़कों की सफाई करवाने के लिए भी पर्याप्त सफाई कर्मी नहीं है। इससे पार्कों की सफाई हुए की कई माह बीत जाते हैं। ऐसे शहर की अधिकतर पार्क निगम की अनदेखी के चलते उजड़ गई हैं। शहर के चौक-चौराहों पर बनी पार्क में या तो रेहड़ी वालों के अवैध कब्जे हैं, या फिर आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। निगम ने इस समस्या का समाधान के लिए पार्कों का डेवलेपमेंट वर्क शहर की सोसायटियों को देना का निर्णय लिया है। जिससे शहर की जनता को भी खासी उम्मीदें हैं।

पार्कों की मेंटेनेंस का काम शहर की सोसायटियों का देने के लिए निगम ने एक प्लान तैयार किया है। इसके लिए एमई को उनके क्षेत्र की पार्कों डाटा बेस तैयार करने के निर्देश दिए हैं। निगम जल्द ही इस एजेंडे को धरातल पर लाने का प्रयास करेगा। हमें उम्मीद है कि नए साल में ऐसा कर दिया जाएगा। इससे पार्क साफ सुधरे और अच्छी तरह से मेंटेन हो सकेंगे।  
धीरज कुमार, ईओ नगर निगम करनाल।
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