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Karnal News: कर्ण नगरी की रामलीला में पहली बार आईटीआई की छात्रा ने निभाया सीता का किरदार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 02:27 AM IST
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For the first time, an ITI student played the role of Sita in the Ramlila of Karn Nagari.
श्री रामायाण पाठक सभा की ओर से आयोजित रामलीला में सीता स्वयंवर मंचन करती निशा ठाकुर। संवाद
भगवानदास
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करनाल। कर्ण नगरी की रामलीला की परंपरा में आईटीआई छात्रा निशा ठाकुर ने नया अध्याय जोड़ दिया। श्री रामायण पाठक सभा के 122 साल के इतिहास में पहली बार इस महिला कलाकार को किरदार निभाने का अवसर मिला है। रामलीला भवन में आयोजित रामलीला के सीता स्वयंवर प्रसंग में निशा सीता के रूप में मंच पर उतरीं।
अब तक सभा की रामलीला में महिला पात्रों की भूमिका पुरुष कलाकार ही निभाते आए थे। निशा ने इस परंपरा के बीच अपनी प्रतिभा और अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई है। निशा के लिए यह केवल एक किरदार निभाने का अवसर नहीं, बल्कि लंबे समय से सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहने के उनके शौक को नई पहचान मिलने जैसा है।
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सीता के किरदार के लिए उन्होंने करीब एक महीने तक नियमित रिहर्सल की। संवाद याद करने से लेकर भाव-भंगिमाओं और मंच पर प्रस्तुति देने तक उन्होंने हर पहलू पर मेहनत की। सभा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने भी उनकी तैयारी में सहयोग किया।
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स्कूल में कौशल्या बनीं
निशा ठाकुर ने जैन गर्ल्स स्कूल से पढ़ाई की है। स्कूल के दिनों से ही उनकी रुचि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रही। उन्होंने स्कूल की रामलीला में कौशल्या का किरदार निभाया था। इसके अलावा हिंदी, पंजाबी और हरियाणवी गीतों की प्रस्तुतियों में भी हिस्सा लेती रहीं। सांस्कृतिक गतिविधियों में लगातार भागीदारी से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और अभिनय के प्रति रुचि बनी रही। वर्तमान में वह करनाल आईटीआई से कोपा कोर्स कर रही हैं। पढ़ाई के साथ रामलीला की तैयारी करना उनके लिए समय और मेहनत का संतुलन बनाने जैसा रहा।


बेटी की इच्छा को मिला मंच
श्री रामायण पाठक सभा की स्थापना वर्ष 1904 में हुई थी। सभा के महाप्रबंधक रविंद्र बंसल के अनुसार, निशा ने रामलीला में किरदार निभाने की इच्छा जताई थी। उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें सीता जैसे अहम पात्र की जिम्मेदारी दी गई। सभा की रामलीला दुर्लभ चौपाइयों, दोहों और गीतों के समन्वय के लिए भी पहचानी जाती है। निशा के पिता जुंडला गेट स्थित शिवपुरी में सेवादार हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाली निशा के लिए 122 साल पुरानी सभा की रामलीला में सीता बनना यादगार अवसर है।
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