{"_id":"692a0e8e3b9cab4adc03fbd3","slug":"food-sample-testing-is-incomplete-for-the-lab-will-have-to-wait-for-another-5-months-karnal-news-c-18-knl1018-789883-2025-11-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: खाद्य नमूनों की जांच लैब के लिए अधूरी, 5 माह और करना पड़ेगा इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: खाद्य नमूनों की जांच लैब के लिए अधूरी, 5 माह और करना पड़ेगा इंतजार
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से जिले में बनाई जा रही माइक्रोबायोलॉजी फूड टेस्टिंग लैब 6 महीने बाद भी तैयार नहीं हो सकी है। जून, 2025 में शिलान्यास के मौके पर दावा किया गया था कि लैब 3-6 महीने में तैयार हो जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि लैब तैयार होने में 5 महीने तक और लग सकते हैं।
करीब 3.96 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही यह अत्याधुनिक लैब प्रदेश के 11 जिलों अंबाला, पंचकूला, पानीपत, झज्जर, रेवाड़ी, नूंह, गुड़गांव, मेवात, हिसार, फरीदाबाद और सोनीपत के खाद्य नमूनों की जांच करने के लिए प्रस्तावित है। बैक्टीरिया, वायरस, फंगस जैसे सूक्ष्म जीवों की पहचान की सुविधा के लिए बनाई जा रही है। खाद्य पदार्थों में मिलावट, संक्रमण और गुणवत्ता की पहचान की जा सकेगी।
अधिकारी अब बता रहे हैं कि लैब को पूरी तरह तैयार होने में 4-5 महीने का समय और लग सकता है। करनाल जिले में अभी तक खाद्य पदार्थों के लिए कोई आधुनिक टेस्टिंग लैब मौजूद नहीं है। माइक्रोबायोलॉजी लैब बनने से खाद्य पदार्थों की तेज और सटीक जांच हो सकेगी।
विज्ञापन
बैक्टीरिया की पहचान हो सकेगी
खाने-पीने की चीजों में पाए जाने वाले हानिकारक बैक्टीरिया गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। लैब में साल्मोनेला, लिस्टेरिया, ई-कोलाई, स्टैफिलोकोकस ऑरियस, क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम, बैसिलस सीरियस आदि की जांच होगी। ये बैक्टीरिया फूड पॉयजनिंग, उल्टी-दस्त, गर्भवती महिलाओं में गर्भपात तक का कारण बन सकते हैं।
-- -- -- -- -- -- --
माइक्रोबायोलॉजी लैब का काम अधूरा है। जिस गति से काम हो रहा है, चार से पांच महीने और लग सकते हैं। लैब से 11 जिलों को लाभ मिलेगा। -पूनम मुदगिल, जिला लोक एवं सह खाद्य विश्लेषक हरियाणा
विज्ञापन
करनाल। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से जिले में बनाई जा रही माइक्रोबायोलॉजी फूड टेस्टिंग लैब 6 महीने बाद भी तैयार नहीं हो सकी है। जून, 2025 में शिलान्यास के मौके पर दावा किया गया था कि लैब 3-6 महीने में तैयार हो जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि लैब तैयार होने में 5 महीने तक और लग सकते हैं।
करीब 3.96 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही यह अत्याधुनिक लैब प्रदेश के 11 जिलों अंबाला, पंचकूला, पानीपत, झज्जर, रेवाड़ी, नूंह, गुड़गांव, मेवात, हिसार, फरीदाबाद और सोनीपत के खाद्य नमूनों की जांच करने के लिए प्रस्तावित है। बैक्टीरिया, वायरस, फंगस जैसे सूक्ष्म जीवों की पहचान की सुविधा के लिए बनाई जा रही है। खाद्य पदार्थों में मिलावट, संक्रमण और गुणवत्ता की पहचान की जा सकेगी।
विज्ञापन
अधिकारी अब बता रहे हैं कि लैब को पूरी तरह तैयार होने में 4-5 महीने का समय और लग सकता है। करनाल जिले में अभी तक खाद्य पदार्थों के लिए कोई आधुनिक टेस्टिंग लैब मौजूद नहीं है। माइक्रोबायोलॉजी लैब बनने से खाद्य पदार्थों की तेज और सटीक जांच हो सकेगी।
विज्ञापन
बैक्टीरिया की पहचान हो सकेगी
खाने-पीने की चीजों में पाए जाने वाले हानिकारक बैक्टीरिया गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। लैब में साल्मोनेला, लिस्टेरिया, ई-कोलाई, स्टैफिलोकोकस ऑरियस, क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम, बैसिलस सीरियस आदि की जांच होगी। ये बैक्टीरिया फूड पॉयजनिंग, उल्टी-दस्त, गर्भवती महिलाओं में गर्भपात तक का कारण बन सकते हैं।
माइक्रोबायोलॉजी लैब का काम अधूरा है। जिस गति से काम हो रहा है, चार से पांच महीने और लग सकते हैं। लैब से 11 जिलों को लाभ मिलेगा। -पूनम मुदगिल, जिला लोक एवं सह खाद्य विश्लेषक हरियाणा