{"_id":"5d5b08338ebc3e89e27378a8","slug":"flood-karnal-news-knl2741786","type":"story","status":"publish","title_hn":"यमुना में उफान : 35 हजार एकड़ फसल खराब, बाढ़ में फंसे 50 को प्रशासन ने निकाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यमुना में उफान : 35 हजार एकड़ फसल खराब, बाढ़ में फंसे 50 को प्रशासन ने निकाला
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पहाड़ों में बारिश और यमुना में रविवार की रात 8.28 लाख क्यूसेक पानी आने से इंद्री और घरौंडा उपमंडल के साथ लगते करीब दर्जनभर गांवों में बाढ़ आ गई है। खेतों में पांच से दस फुट तक पानी जमा हो गया है, जबकि सात गांवों के घरों में भी पानी घुस गया है। लोग अपने घरों का सामान सिर पर रखकर सुरक्षित स्थानों की तरफ जाते देखे गए। उधर, राहत कार्यों में प्रशासन ने हेलीकॉप्टर से लेकर नाव तक लगा दी। सोमवार को दिनभर प्रशासन की तरफ से बाढ़ से बचाव का अभियान चला। एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से जहां गढ़पुर टापू में नौ लोगों को बचाया गया, इसी प्रकार नावों की मदद से अलग-अलग गांवों में बाढ़ में फंसे करीब 40 लोगों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। उधर, अनुमान है कि यमुना के साथ लगते करीब 35 हजार एकड़ फसल जलमग्न हो गई। इंद्री हलके के एक दर्जन गांवों का संपर्क टूटा हुआ है। इन गांवों में राहत भेजी जा रही है।
इन गांवों में घुसा पानी
इंद्री के गांव चंद्राव, डबकौली खुर्द, नगली, हलवाना रोड़ान, सैयद छपरा, नबियाबाद, चौरा खालसा, कमालपुर गडरियान, जपती छपरा में पानी घुस गया है। इसके अलावा कुछ गांव ऐसे हैं जिनके चारों तरफ पानी ही पानी है। उनका संपर्क अन्य गांवों से टूट गया है। इन गांवों के काफी ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। इनमें शेरगढ़ टापू, रंदौली, जड़ौली, नबीपुर, कुंडा कलां, मुस्तफाबाद, जम्मूखाला समेत अन्य गांव शामिल हैं। इसी प्रकार, घरौंडा उपमंडल के गांव बलहेड़ा, मुंडोगढ़ी, लालुपूरा, सदरपुर के चारों तरफ खतरा मंडराया हुआ है। उधर प्रशासन की तरफ से चलाए राहत कार्यों के चलते गांव डबकौली खुर्द से दस, चंद्राव से दस, सैयद छपरा से पांच, जपती छपरा से पांच और घरौंडा के गांव बलहेड़ा से एक व्यक्ति को नाव के जरिए सुरक्षित निकाला गया है।
हरियाणा-यूपी पुल की संपर्क पटरी टूटी
उत्तर-प्रदेश के सहारनपुर जिले के लखनौती से करनाल जिले के शेरगढ़ टापू को जोड़ने वाले पुल से दोनों राज्यों का संपर्क टूट गया है। यमुना के अंदर हरियाणा की तरफ पुल से जोड़ने वाली पटरी को करीब 200 फुट तक पानी की तेज धार ने धराशायी कर दिया। डेढ़ महीना पहले ही यह पुल चालू हुआ था।
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10 जिंदा पशु जलधारा में बहे
खिराजपुर स्टड के समीप एकत्रित ग्रामीणों ने यमुना के तेज प्रवाह में 10 पशुओं को बहते देखा। घाट पर तैनात ठेकेदार ने इसकी सूचना आगे घाटों पर दी, ताकि पशुओं को बचाया जा सके। यह पशु यमुना नगर की तरफ से पानी में फंसे थे। तेज धार के बीच इन पशुओं को बचाने का कोई साहस नहीं कर पाया।
गन्ना, धान और चारा सब्जी की फसलें तबाह
यमुुना के अंदर करनाल जिले के तीन खंडों में करीब 35 हजार एकड़ जमीन में धान, गन्ना, चारा व सब्जी की फसलें डूब गई हैं। करनाल जिले की सीमा से लगते उत्तर प्रदेश के किसानों की यमुना में करीब एक लाख एकड़ धान, गन्ना इत्यादि फसलें डूब गई हैं। गन्ने की जो फसल डूब गई है वह भी खराब हो जाएगी। पटरी के समीपवर्ती खेतों में भी बहुत ज्यादा पानी चढ़ गया, जिनमें सिर्फ गन्ने की फसल बचने की उम्मीद है। करनाल जिले की सीमा में यमुना की पटरी की सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग व जिला प्रशासन दो दिन से 24 घंटे मुस्तैद है।
यमुना में कम हो रहा है पानी
राहत की खबर है कि यमुना में धीरे-धीरे पानी कम हो रहा है, अगर पहाड़ों में और बारिश नहीं हुई तो आगामी एक सप्ताह में हालात काबू में आ सकते हैं और गांवों से पानी निकासी दुरुस्त की जा सकेगी। सिंचाई विभाग का कहना है कि सोमवार दोपहर बाद हथिनीकुंड बैराज से यमुना में 1.60 लाख क्यूसेक और छह बजे तक 1.47 लाख, 544 क्यूसेक पानी चला। बता दें कि रविवार को आठ लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी यमुना में छोड़ा गया था।
पटरी पर लगातार चली जेसीबी, मिट्टी के भरे बैग रखे
दूसरे दिन सोमवार को पानी के रौद्र रूप को देखकर ग्रामीण दहशत में थे। आसपास के गांवों के ग्रामीण भी पटरी टूटने के अंदेशे से पल-पल की खबर लेते रहे। सिंचाई विभाग की तरफ से तटबंधों पर जेसीबी की मदद से सफाई की जाती रही, ताकि किसी होल से पटरी लीक ना हो जाए। कुंडा कला, नसीरपुर, जम्मुखाला, नबीपुर, जड़ौली, खराजपुर, मोदीपुर व शेरगढ़ टापू गांव के समीप हर संवेदनशील जगह पर प्रशासन की तरफ से जेसीबी, डंपर, ट्रैक्टर-ट्राली, मिट्टी के भरे बैग रखे गए। पटरी के साथ-साथ संदिग्ध जगह पर बैग रखे जा रहे हैं। समीपवर्ती गांवों में ठीकरी पहरा लगाया हुआ है। ग्रामीण स्वयं भी यमुना की पटरी की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन का प्रयास रहा कि पटरी ना टूटने पाए। इस प्रयास में प्रशासन सोमवार दिन भर सफल रहा। कुंडा कला के समीप बने स्टड के ऊपर से पानी गुजर गया और पानी पटरी में टक्कर मार रहा था। इस संवेदनशील जगह पर प्रशासन की दो दिन से नजरें गड़ी हुई हैं।
चारे का गहरा जाएगा संकट
यमुना के अंदर किसानों की फसलों के साथ उनके कृषि यंत्र, मशीनरी, ट्यूबवेल, कोठे, ईंजन, तूड़ी के कूप भी डूब गए हैं। इसके चलते किसानों को भारी नुकसान हुआ है। उनके आगे सबसे बड़ी समस्या तूड़ा व हरे चारे की आएगी। तूड़ी खराब होने के कारण चारे का संकट गहरा जाएगा।
यूपी का पशुपालक हरियाणा की तरफ आने में हुआ कामयाब
यमुना में पशु चरा रहे उत्तरप्रदेश के शामली जिले के बढ़ी गांव निवासी काला राम यमुना बीच टापू में घिर गए थे। रविवार रात वह जस-तस करके हरियाणा की तरफ पशुओं को लेकर निकलने में कामयाब हो गए। सोमवार को उन्हें उत्तरप्रदेश की तरफ जाने का रास्ता नहीं सूझ रहा था। यमुना की पटरी पर किसी व्यक्ति का आना या पशु लाना प्रतिबंधित होने के कारण मौके पर तैनात पटवारी राजबीर सिंह ने काला राम को सतर्क किया। उसके बाद वह मवेशियों को लेकर नसीरपुर गांव की तरफ शरण के लिए चला गया। पशुपालक दो दिन से भूखा-प्यासा था।
फसलें सड़ने से गहरा जाएगा संकट
नसीरपुर गांव के किसान गुरबचन सिंह ने कहा कि उनके गांव की सैकड़ों एकड़ फसलें डूब गई हैं। सलिंद्र ने कहा कि फसलें नष्ट हो जाएंगी। इससे ग्रामीणों के जीवन पर संकट गहरा जाएगा। धान की फसल पकी व अधपकी हुई थी जो पानी में डूबने से सड़ जाएगी। यमुना में कुछ किसान हाइटेक तरीके से खेती कर रहे थे। जिन्होंने बांस विधि व नेट हाउस में सब्जी की फसलें उगा रखी थी।
सरकार के आदेश से होगा नुकसान का आंकलन
मौके पर तैनात पटवारी राजबीर सिंह ने कहा कि बाढ़ बचाव कार्य में ड्यूटी लगी हुई है। नुकसान के बाबत उन्होंने कहा कि सरकार यदि आदेश करेगी तो पानी उतरने के बाद मुआयना व आंकलन किया जा सकता है। उधर, डीआरओ श्याम लाल ने बताया कि अभी राहत कार्यों में जुटे हैं, सरकार के आदेश आने के बाद ही स्पेशल गिरदावरी की जाएगी।
घट रहा जलस्तर : डीसी
सोमवार को यमुना में पानी का जलस्तर घटना शुरू हो गया है। बाढ़ से बचाव की सभी तैयारियां और आवश्यक प्रबंध यथावत बने हुए हैं। यमुना के साथ लगते ग्रामीणों को सलाह है कि गहरे पानी में नहीं जाएं और किसी तरह से नहीं घबराएं, प्रशासन मदद के लिए उनके साथ खड़ा है। यमुना के तटों पर सभी सरकारी कर्मचारी और अधिकारी पल-पल की नजर रखे हुए हैं। यमुना के पानी से किसी भी प्रकार का नुकसान न हो, पहले ही इसके प्रबंध कर लिए गए थे। अभी स्थिति नियंत्रण में है। - विनय प्रताप सिंह, उपायुक्त
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इन गांवों में घुसा पानी
इंद्री के गांव चंद्राव, डबकौली खुर्द, नगली, हलवाना रोड़ान, सैयद छपरा, नबियाबाद, चौरा खालसा, कमालपुर गडरियान, जपती छपरा में पानी घुस गया है। इसके अलावा कुछ गांव ऐसे हैं जिनके चारों तरफ पानी ही पानी है। उनका संपर्क अन्य गांवों से टूट गया है। इन गांवों के काफी ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। इनमें शेरगढ़ टापू, रंदौली, जड़ौली, नबीपुर, कुंडा कलां, मुस्तफाबाद, जम्मूखाला समेत अन्य गांव शामिल हैं। इसी प्रकार, घरौंडा उपमंडल के गांव बलहेड़ा, मुंडोगढ़ी, लालुपूरा, सदरपुर के चारों तरफ खतरा मंडराया हुआ है। उधर प्रशासन की तरफ से चलाए राहत कार्यों के चलते गांव डबकौली खुर्द से दस, चंद्राव से दस, सैयद छपरा से पांच, जपती छपरा से पांच और घरौंडा के गांव बलहेड़ा से एक व्यक्ति को नाव के जरिए सुरक्षित निकाला गया है।
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हरियाणा-यूपी पुल की संपर्क पटरी टूटी
उत्तर-प्रदेश के सहारनपुर जिले के लखनौती से करनाल जिले के शेरगढ़ टापू को जोड़ने वाले पुल से दोनों राज्यों का संपर्क टूट गया है। यमुना के अंदर हरियाणा की तरफ पुल से जोड़ने वाली पटरी को करीब 200 फुट तक पानी की तेज धार ने धराशायी कर दिया। डेढ़ महीना पहले ही यह पुल चालू हुआ था।
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10 जिंदा पशु जलधारा में बहे
खिराजपुर स्टड के समीप एकत्रित ग्रामीणों ने यमुना के तेज प्रवाह में 10 पशुओं को बहते देखा। घाट पर तैनात ठेकेदार ने इसकी सूचना आगे घाटों पर दी, ताकि पशुओं को बचाया जा सके। यह पशु यमुना नगर की तरफ से पानी में फंसे थे। तेज धार के बीच इन पशुओं को बचाने का कोई साहस नहीं कर पाया।
गन्ना, धान और चारा सब्जी की फसलें तबाह
यमुुना के अंदर करनाल जिले के तीन खंडों में करीब 35 हजार एकड़ जमीन में धान, गन्ना, चारा व सब्जी की फसलें डूब गई हैं। करनाल जिले की सीमा से लगते उत्तर प्रदेश के किसानों की यमुना में करीब एक लाख एकड़ धान, गन्ना इत्यादि फसलें डूब गई हैं। गन्ने की जो फसल डूब गई है वह भी खराब हो जाएगी। पटरी के समीपवर्ती खेतों में भी बहुत ज्यादा पानी चढ़ गया, जिनमें सिर्फ गन्ने की फसल बचने की उम्मीद है। करनाल जिले की सीमा में यमुना की पटरी की सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग व जिला प्रशासन दो दिन से 24 घंटे मुस्तैद है।
यमुना में कम हो रहा है पानी
राहत की खबर है कि यमुना में धीरे-धीरे पानी कम हो रहा है, अगर पहाड़ों में और बारिश नहीं हुई तो आगामी एक सप्ताह में हालात काबू में आ सकते हैं और गांवों से पानी निकासी दुरुस्त की जा सकेगी। सिंचाई विभाग का कहना है कि सोमवार दोपहर बाद हथिनीकुंड बैराज से यमुना में 1.60 लाख क्यूसेक और छह बजे तक 1.47 लाख, 544 क्यूसेक पानी चला। बता दें कि रविवार को आठ लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी यमुना में छोड़ा गया था।
पटरी पर लगातार चली जेसीबी, मिट्टी के भरे बैग रखे
दूसरे दिन सोमवार को पानी के रौद्र रूप को देखकर ग्रामीण दहशत में थे। आसपास के गांवों के ग्रामीण भी पटरी टूटने के अंदेशे से पल-पल की खबर लेते रहे। सिंचाई विभाग की तरफ से तटबंधों पर जेसीबी की मदद से सफाई की जाती रही, ताकि किसी होल से पटरी लीक ना हो जाए। कुंडा कला, नसीरपुर, जम्मुखाला, नबीपुर, जड़ौली, खराजपुर, मोदीपुर व शेरगढ़ टापू गांव के समीप हर संवेदनशील जगह पर प्रशासन की तरफ से जेसीबी, डंपर, ट्रैक्टर-ट्राली, मिट्टी के भरे बैग रखे गए। पटरी के साथ-साथ संदिग्ध जगह पर बैग रखे जा रहे हैं। समीपवर्ती गांवों में ठीकरी पहरा लगाया हुआ है। ग्रामीण स्वयं भी यमुना की पटरी की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन का प्रयास रहा कि पटरी ना टूटने पाए। इस प्रयास में प्रशासन सोमवार दिन भर सफल रहा। कुंडा कला के समीप बने स्टड के ऊपर से पानी गुजर गया और पानी पटरी में टक्कर मार रहा था। इस संवेदनशील जगह पर प्रशासन की दो दिन से नजरें गड़ी हुई हैं।
चारे का गहरा जाएगा संकट
यमुना के अंदर किसानों की फसलों के साथ उनके कृषि यंत्र, मशीनरी, ट्यूबवेल, कोठे, ईंजन, तूड़ी के कूप भी डूब गए हैं। इसके चलते किसानों को भारी नुकसान हुआ है। उनके आगे सबसे बड़ी समस्या तूड़ा व हरे चारे की आएगी। तूड़ी खराब होने के कारण चारे का संकट गहरा जाएगा।
यूपी का पशुपालक हरियाणा की तरफ आने में हुआ कामयाब
यमुना में पशु चरा रहे उत्तरप्रदेश के शामली जिले के बढ़ी गांव निवासी काला राम यमुना बीच टापू में घिर गए थे। रविवार रात वह जस-तस करके हरियाणा की तरफ पशुओं को लेकर निकलने में कामयाब हो गए। सोमवार को उन्हें उत्तरप्रदेश की तरफ जाने का रास्ता नहीं सूझ रहा था। यमुना की पटरी पर किसी व्यक्ति का आना या पशु लाना प्रतिबंधित होने के कारण मौके पर तैनात पटवारी राजबीर सिंह ने काला राम को सतर्क किया। उसके बाद वह मवेशियों को लेकर नसीरपुर गांव की तरफ शरण के लिए चला गया। पशुपालक दो दिन से भूखा-प्यासा था।
फसलें सड़ने से गहरा जाएगा संकट
नसीरपुर गांव के किसान गुरबचन सिंह ने कहा कि उनके गांव की सैकड़ों एकड़ फसलें डूब गई हैं। सलिंद्र ने कहा कि फसलें नष्ट हो जाएंगी। इससे ग्रामीणों के जीवन पर संकट गहरा जाएगा। धान की फसल पकी व अधपकी हुई थी जो पानी में डूबने से सड़ जाएगी। यमुना में कुछ किसान हाइटेक तरीके से खेती कर रहे थे। जिन्होंने बांस विधि व नेट हाउस में सब्जी की फसलें उगा रखी थी।
सरकार के आदेश से होगा नुकसान का आंकलन
मौके पर तैनात पटवारी राजबीर सिंह ने कहा कि बाढ़ बचाव कार्य में ड्यूटी लगी हुई है। नुकसान के बाबत उन्होंने कहा कि सरकार यदि आदेश करेगी तो पानी उतरने के बाद मुआयना व आंकलन किया जा सकता है। उधर, डीआरओ श्याम लाल ने बताया कि अभी राहत कार्यों में जुटे हैं, सरकार के आदेश आने के बाद ही स्पेशल गिरदावरी की जाएगी।
घट रहा जलस्तर : डीसी
सोमवार को यमुना में पानी का जलस्तर घटना शुरू हो गया है। बाढ़ से बचाव की सभी तैयारियां और आवश्यक प्रबंध यथावत बने हुए हैं। यमुना के साथ लगते ग्रामीणों को सलाह है कि गहरे पानी में नहीं जाएं और किसी तरह से नहीं घबराएं, प्रशासन मदद के लिए उनके साथ खड़ा है। यमुना के तटों पर सभी सरकारी कर्मचारी और अधिकारी पल-पल की नजर रखे हुए हैं। यमुना के पानी से किसी भी प्रकार का नुकसान न हो, पहले ही इसके प्रबंध कर लिए गए थे। अभी स्थिति नियंत्रण में है। - विनय प्रताप सिंह, उपायुक्त