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फायर ब्रिगेड कर्मचारी की करंट से मौत, बवाल
अमर उजाला/ब्यूरो/करनाल
Updated Tue, 01 Nov 2016 01:11 AM IST
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पुलिस के सामने बहस करते फायर ब्रिगेड कर्मचारी।
- फोटो : amar ujala
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गांव जुंडला में दिवाली की रात आतिशबाजी के कारण बिटौड़ों में लगी आग को बुझाते वक्त हाईटेंशन तार की चपेट में आने से एक फायर ब्रिगेड कर्मचारी की मौत हो गई। कर्मचारी की मौत की सूचना लगने से उसके गांव घराड़सी में त्यौहार के दिन मातम छा गया। पुलिस ने कर्मचारी के शव को कब्जे में लेकर कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया। सोमवार सुबह ही पूरे प्रदेश से फायर ब्रिगेड कर्मचारी अस्पताल पहुंचे और करंट लगने से मृतक फायरमैन को शहीद का दर्जा दिलवाने और सहायता राशि देने की मांग करते रहे। वहीं, निगम के अधिकारी एक प्रक्रिया के तहत मांग को मानने की बात कहते रहे। लेकिन प्रशासन द्वारा मांगों को मानने की बात लिखित में न देने को लेकर कर्मचारियों ने शव गृह के बाहर सरकार और निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूरे दिन अस्पताल में तनाव का माहौल रहा।
स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा है कि गुस्साए कर्मचारियों ने नरेश के शव को पोस्टमार्टम हाउस से बाहर निकालने की कोशिश की, हालांकि पुलिस ने उन्हें वहां से खदेड़ दिया। नगर निगम आयुक्त डॉ. आदित्या दहिया ने पीड़ित के परिजनों और आए हुए कर्मियों को समझाया और मांगों को मानने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन मृतक का पोस्टमार्टम करवाने के लिए माने। राकेश कुमार वासी घराड़सी, कुरूक्षेत्र ने बताया कि उसके चचेरे भाई नरेश (32) की मौत आग बुझाते समय करंट लगने से हो गई। उसने बताया कि नरेश पिछले लगभग बारह सालों से अग्निशमन विभाग में बतौर फायरमैन के कच्चे पद पर तैनात था। रविवार रात को जुंडला में आतिशबाजी से बिटौड़ों में आग लग गई थी, जिसे बुझाने के लिए नरेश अपने दो अन्य साथियों के साथ गया था। जब वह फायर गाड़ी के ऊपर खड़े होकर पंप स्टेशन ऑपरेट करते हुए आग बुझा रहा था तो अचानक गाड़ी की लोकेशन बदलते समय वह गाड़ी के ऊपर से गुजर रही बिजली की 11 हजार वोल्ट की तार से टकरा गया। इससे करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इससे गुस्साए प्रदेश के फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने फायरमैन को शहीद का दर्जा और राजकीय सम्मान के साथ संस्कार, पचास लाख रुपये मुआवजा राशि, घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और ठेका प्रथा को तुरंत प्रभाव से खत्म करने की मांग की। प्रशासन द्वारा मांगें मानने के लिए समय देने की बात करने पर कर्मियों ने निगम व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
नगर निगम के ईओ धीरज कुमार ने मौके पर पहुंचकर कहा कि निगम कमीशनर ने इस बारे में डायरेक्टर से भी बात की है और कर्मी की लगभग 10-12 साल से कार्यरत होने की फाइल भी तैयार की जा रही है। इसलिए सरकार की ओर से जो भी सहायता होगी वह दी जाएगी। उन्होंने नगर निगम की बैठक में फायरमैन को शहीद का दर्जा देने बारे चर्चा करने की बात भी कही। लेकिन कर्मी मौके पर ही लिखित में मांगों को मनवाने के लिए अड़े रहे। बाद में निगम कमीश्नर डॉ. आदित्य दहिया ने मौके पर पहुंचकर परिजनों और कर्मियों को समझाया। नगर निगम ने दुखी परिवार के प्रति सांत्वना व्यक्त करते हुए मृृतक नरेश कुमार की पत्नि को अस्थायी रोजगार देने, सरकारी नियमों के तहत विचार करके उचित अनुगृह राशि उपलब्ध करवाने तथा पक्की नौकरी के लिए चंडीगढ़ मुख्यालय में केस भेजने का आश्वासन दिया।
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इसके अतिरिक्त निगम के कर्मचारियों ने नरेश कुमार के अंतिम संस्कार के लिए 21 हजार रुपये एकत्र करके अपना योगदान दिया। दहिया ने मृतक के शव को फायर ब्रिगेड की गाड़ी में ले जाने के लिए भी हामी भरी। इस पर कर्मी और परिजन मान गए। पुलिस ने फायरमैन के शव का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया। इस दौरान अस्पताल में तहसीलदार श्यामलाल, निगम कमीश्नर डॉ. आदित्य दहिया, ईओ धीरज कुमार, सिटी थाना प्रभारी मोहन लाल, सिविल लाइन थाना प्रभारी मनोज कुमार सहित पूरे प्रदेश से आए फायर ब्रिगेड कर्मचारी मौजूद रहे।
नरेश को दी कर्मचारियों ने दी अंतिम विदाई
नगर निगम ने दुखी परिवार के प्रति सांत्वना व्यक्त करते हुए मृृतक नरेश कुमार की पत्नी को अस्थायी रोजगार देने, सरकारी नियमों के तहत विचार करके उचित अनुगृह राशि उपलब्ध करवाने तथा पक्की नौकरी के लिए चंडीगढ़ मुख्यालय में केस भेजने का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त निगम के कर्मचारियों ने नरेश कुमार के अंतिम संस्कार के लिए 21 हजार रुपये एकत्र करके अपना योगदान दिया। इसके पश्चात नगर निगम के अधिकारी धीरज कुमार, अग्नि शमन सेवा अधिकारी हरि सिंह सैनी, वरिष्ठ फायर मैन राम कुमार, महावीर सिंह तथा फायर बिग्रेड के बहुत से कर्मियों ने मृतक नरेश कुमार के कुरुक्षेत्र जिला के गांव घराड़सी में जाकर अंतिम संस्कार में भाग लिया। अग्निशमन सेवा के कर्मचारियों ने पूरे सम्मान के साथ मृतक नरेश कुमार को अपनी सलामी दी।
घर में खुशियां आने की थी उम्मीद, छा गया मात
मनरेश अपने घर में बुढ़े माता-पिता का इकलौता सहारा था, जिसकी नौकरी से ही परिवार का गुजारा चलता था। नरेश अपनी तीन बहनों का इकलौता भाई था और नरेश की एक तीन साल की बेटी है। मृतक की पत्नी बिमला रानी नौ माह से गर्भवती है। परिवार को जल्द ही घर में खुशियां आने की उम्मीद थी। लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह खुशियां त्यौहार के दिन मातम में बदल जाएंगी। नरेश की दो बहन शादीशुदा हैं जबकि एक बहन सविता अभी अविवाहित है। नरेश की मौत की सूचना मिलने से पूरे गांव मे मातम पसर गया।
आमने-सामने हुए पुलिस और फायर ब्रिगेड कर्मचारी
प्रदेशभर से आए फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने मृतक को शहीद का दर्जा देकर राजकीय सम्मान के साथ संस्कार, 50 लाख रुपये सहायता राशि, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी, कर्मचारियों को पक्का करने की मांग को लेकर अड़े रहे। बाद में कर्मचारियों ने सड़क जाम करने के चेतावनी देते हुए पोस्टमार्टम हाउस से मृतक के शव को निकाल लिया। इस पर सिविल लाइन थाना प्रभारी मनोज कुमार और सिटी थाना प्रभारी मोहन लाल ने कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। जब कर्मी बॉडी को अंदर रखने से नहीं माने तो पुलिस ने सख्ताई से कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों को पोस्टमार्टम हाउस से बाहर खदेड़ दिया और बॉडी को दोबारा शव गृह में रखवाया।
आग लगने से जले सैकड़ों बिटौडे़
जुंडला में दादा खेड़ा के पास रविवार रात को आतिशबाजी से आग लगने से सैकड़ों बिटौडे जलकर राख हो गए। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड़ की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। गाड़ियों के पहुंचने से पहले आग बहुत भयानक रूप ले चुकी थी। लेकिन गनीमत रही कि आग घरों में लगने से बच गई। आग लगने से सैकड़ों बिटौडे जलकर राख हो गए। अगर आग घरों तक पहुंच जाती तो भारी जान और माल का नुकसान हो सकता था।
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स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा है कि गुस्साए कर्मचारियों ने नरेश के शव को पोस्टमार्टम हाउस से बाहर निकालने की कोशिश की, हालांकि पुलिस ने उन्हें वहां से खदेड़ दिया। नगर निगम आयुक्त डॉ. आदित्या दहिया ने पीड़ित के परिजनों और आए हुए कर्मियों को समझाया और मांगों को मानने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन मृतक का पोस्टमार्टम करवाने के लिए माने। राकेश कुमार वासी घराड़सी, कुरूक्षेत्र ने बताया कि उसके चचेरे भाई नरेश (32) की मौत आग बुझाते समय करंट लगने से हो गई। उसने बताया कि नरेश पिछले लगभग बारह सालों से अग्निशमन विभाग में बतौर फायरमैन के कच्चे पद पर तैनात था। रविवार रात को जुंडला में आतिशबाजी से बिटौड़ों में आग लग गई थी, जिसे बुझाने के लिए नरेश अपने दो अन्य साथियों के साथ गया था। जब वह फायर गाड़ी के ऊपर खड़े होकर पंप स्टेशन ऑपरेट करते हुए आग बुझा रहा था तो अचानक गाड़ी की लोकेशन बदलते समय वह गाड़ी के ऊपर से गुजर रही बिजली की 11 हजार वोल्ट की तार से टकरा गया। इससे करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इससे गुस्साए प्रदेश के फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने फायरमैन को शहीद का दर्जा और राजकीय सम्मान के साथ संस्कार, पचास लाख रुपये मुआवजा राशि, घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और ठेका प्रथा को तुरंत प्रभाव से खत्म करने की मांग की। प्रशासन द्वारा मांगें मानने के लिए समय देने की बात करने पर कर्मियों ने निगम व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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नगर निगम के ईओ धीरज कुमार ने मौके पर पहुंचकर कहा कि निगम कमीशनर ने इस बारे में डायरेक्टर से भी बात की है और कर्मी की लगभग 10-12 साल से कार्यरत होने की फाइल भी तैयार की जा रही है। इसलिए सरकार की ओर से जो भी सहायता होगी वह दी जाएगी। उन्होंने नगर निगम की बैठक में फायरमैन को शहीद का दर्जा देने बारे चर्चा करने की बात भी कही। लेकिन कर्मी मौके पर ही लिखित में मांगों को मनवाने के लिए अड़े रहे। बाद में निगम कमीश्नर डॉ. आदित्य दहिया ने मौके पर पहुंचकर परिजनों और कर्मियों को समझाया। नगर निगम ने दुखी परिवार के प्रति सांत्वना व्यक्त करते हुए मृृतक नरेश कुमार की पत्नि को अस्थायी रोजगार देने, सरकारी नियमों के तहत विचार करके उचित अनुगृह राशि उपलब्ध करवाने तथा पक्की नौकरी के लिए चंडीगढ़ मुख्यालय में केस भेजने का आश्वासन दिया।
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इसके अतिरिक्त निगम के कर्मचारियों ने नरेश कुमार के अंतिम संस्कार के लिए 21 हजार रुपये एकत्र करके अपना योगदान दिया। दहिया ने मृतक के शव को फायर ब्रिगेड की गाड़ी में ले जाने के लिए भी हामी भरी। इस पर कर्मी और परिजन मान गए। पुलिस ने फायरमैन के शव का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया। इस दौरान अस्पताल में तहसीलदार श्यामलाल, निगम कमीश्नर डॉ. आदित्य दहिया, ईओ धीरज कुमार, सिटी थाना प्रभारी मोहन लाल, सिविल लाइन थाना प्रभारी मनोज कुमार सहित पूरे प्रदेश से आए फायर ब्रिगेड कर्मचारी मौजूद रहे।
नरेश को दी कर्मचारियों ने दी अंतिम विदाई
नगर निगम ने दुखी परिवार के प्रति सांत्वना व्यक्त करते हुए मृृतक नरेश कुमार की पत्नी को अस्थायी रोजगार देने, सरकारी नियमों के तहत विचार करके उचित अनुगृह राशि उपलब्ध करवाने तथा पक्की नौकरी के लिए चंडीगढ़ मुख्यालय में केस भेजने का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त निगम के कर्मचारियों ने नरेश कुमार के अंतिम संस्कार के लिए 21 हजार रुपये एकत्र करके अपना योगदान दिया। इसके पश्चात नगर निगम के अधिकारी धीरज कुमार, अग्नि शमन सेवा अधिकारी हरि सिंह सैनी, वरिष्ठ फायर मैन राम कुमार, महावीर सिंह तथा फायर बिग्रेड के बहुत से कर्मियों ने मृतक नरेश कुमार के कुरुक्षेत्र जिला के गांव घराड़सी में जाकर अंतिम संस्कार में भाग लिया। अग्निशमन सेवा के कर्मचारियों ने पूरे सम्मान के साथ मृतक नरेश कुमार को अपनी सलामी दी।
घर में खुशियां आने की थी उम्मीद, छा गया मात
मनरेश अपने घर में बुढ़े माता-पिता का इकलौता सहारा था, जिसकी नौकरी से ही परिवार का गुजारा चलता था। नरेश अपनी तीन बहनों का इकलौता भाई था और नरेश की एक तीन साल की बेटी है। मृतक की पत्नी बिमला रानी नौ माह से गर्भवती है। परिवार को जल्द ही घर में खुशियां आने की उम्मीद थी। लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह खुशियां त्यौहार के दिन मातम में बदल जाएंगी। नरेश की दो बहन शादीशुदा हैं जबकि एक बहन सविता अभी अविवाहित है। नरेश की मौत की सूचना मिलने से पूरे गांव मे मातम पसर गया।
आमने-सामने हुए पुलिस और फायर ब्रिगेड कर्मचारी
प्रदेशभर से आए फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने मृतक को शहीद का दर्जा देकर राजकीय सम्मान के साथ संस्कार, 50 लाख रुपये सहायता राशि, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी, कर्मचारियों को पक्का करने की मांग को लेकर अड़े रहे। बाद में कर्मचारियों ने सड़क जाम करने के चेतावनी देते हुए पोस्टमार्टम हाउस से मृतक के शव को निकाल लिया। इस पर सिविल लाइन थाना प्रभारी मनोज कुमार और सिटी थाना प्रभारी मोहन लाल ने कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। जब कर्मी बॉडी को अंदर रखने से नहीं माने तो पुलिस ने सख्ताई से कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों को पोस्टमार्टम हाउस से बाहर खदेड़ दिया और बॉडी को दोबारा शव गृह में रखवाया।
आग लगने से जले सैकड़ों बिटौडे़
जुंडला में दादा खेड़ा के पास रविवार रात को आतिशबाजी से आग लगने से सैकड़ों बिटौडे जलकर राख हो गए। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड़ की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। गाड़ियों के पहुंचने से पहले आग बहुत भयानक रूप ले चुकी थी। लेकिन गनीमत रही कि आग घरों में लगने से बच गई। आग लगने से सैकड़ों बिटौडे जलकर राख हो गए। अगर आग घरों तक पहुंच जाती तो भारी जान और माल का नुकसान हो सकता था।