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छठ महोत्सव पर बिहार जाने को मारामारी
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धान की कटाई पूरी हो चुकी है, छठ का पर्व शुरू हो रहा है। इसके लिए जिले से हजारों श्रमिक बिहार लौट रहे हैं। रविवार को भी बड़ी संख्या में श्रमिकों का अपने गृह राज्य रवाना होने का सिलसिला जारी रहा। ट्रेनों में जगह नहीं होने और परिवहन निगम की बस सुविधा नहीं होने से श्रमिकों को प्राइवेट टूरिस्ट बसों का ही सहारा है। बसों की संख्या कम होने के कारण मारामारी की स्थिति बनी हुई है। हालांकि रविवार की शाम तक स्थिति काफी हद तक सामान्य हो गई थी।
हर साल धान की बिजाई, रोपाई और कटाई और खरीद के समय हजारों की संख्या में बिहार राज्य से श्रमिक हरियाणा आते हैं। बिहार के श्रमिकों से जुड़े संगठनों के मुताबिक करीब एक लाख मजदूर तो हरियाणा की अनाज मंडियों में ही कार्य करते हैं। इसके अलावा भी राइस मिलर्स, किसानों को फार्मों पर बड़ी संख्या में श्रमिक कार्य करते हैं। करनाल की सब्जी बाजार, चाय, पान की दुकानें पर भी काफी श्रमिक बिहार के हैं। लेकिन जब छठ का त्योहार नजदीक आता है तो अधिकांश श्रमिक त्योहार मनाने के लिए अपने गृह राज्य बिहार लौट जाते हैं। इसके लिए वे कई माह पहले से ट्रेनों में बुकिंग करा लेते हैं। इस बार बिहार जाने वाली सभी ट्रेनों में आरक्षण फुल होने और रोडवेज बसों की सीधी सेवा नहीं होने से श्रमिकों को परेशानी हो रही है। वहीं कई ट्रांसपोर्टर्स ने करनाल अनाज मंडी से सीधे बिहार राज्य के विभिन्न जिलों के लिए टूरिस्ट बसें चलाई हुईं हैं। इस बार उनकी बसें भी कम पड़ गई। यही कारण रहा कि शनिवार व रविवार को बिहार जाने वाले श्रमिकों में बसों में बैठने को लेकर मारामारी की स्थिति देखी गई। हालांकि शाम तक बड़ी संख्या में बसों को मुहैया कराए जाने के बाद स्थिति सामान्य दिखी। देर रात तक बसों का रवाना होने का सिलसिला जारी रहा।
300 से 500 रुपये तक अधिक किराया वसूल रहे
श्रमिकों ने बताया कि ट्रेनों में जगह तो महीनाभर पहले से नहीं है। सरकारी बसें सीधे नहीं जाती हैं। ट्रैवल्स एजेेेंसियों ने प्राइवेट बसें लगाई हुईं हैं। जो सीधे बिहार के कई जिलों तक जाती हैं। जिसमें औसतन किराया 1500 से 1800 रुपये तक पड़ता है। लेकिन इस बार बसें कम होने के कारण कुछ बस संचालकों ने अपनी बसें भेजी लेकिन 300 से 500 रुपये तक अधिक किराया वसूला।
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हर साल धान की बिजाई, रोपाई और कटाई और खरीद के समय हजारों की संख्या में बिहार राज्य से श्रमिक हरियाणा आते हैं। बिहार के श्रमिकों से जुड़े संगठनों के मुताबिक करीब एक लाख मजदूर तो हरियाणा की अनाज मंडियों में ही कार्य करते हैं। इसके अलावा भी राइस मिलर्स, किसानों को फार्मों पर बड़ी संख्या में श्रमिक कार्य करते हैं। करनाल की सब्जी बाजार, चाय, पान की दुकानें पर भी काफी श्रमिक बिहार के हैं। लेकिन जब छठ का त्योहार नजदीक आता है तो अधिकांश श्रमिक त्योहार मनाने के लिए अपने गृह राज्य बिहार लौट जाते हैं। इसके लिए वे कई माह पहले से ट्रेनों में बुकिंग करा लेते हैं। इस बार बिहार जाने वाली सभी ट्रेनों में आरक्षण फुल होने और रोडवेज बसों की सीधी सेवा नहीं होने से श्रमिकों को परेशानी हो रही है। वहीं कई ट्रांसपोर्टर्स ने करनाल अनाज मंडी से सीधे बिहार राज्य के विभिन्न जिलों के लिए टूरिस्ट बसें चलाई हुईं हैं। इस बार उनकी बसें भी कम पड़ गई। यही कारण रहा कि शनिवार व रविवार को बिहार जाने वाले श्रमिकों में बसों में बैठने को लेकर मारामारी की स्थिति देखी गई। हालांकि शाम तक बड़ी संख्या में बसों को मुहैया कराए जाने के बाद स्थिति सामान्य दिखी। देर रात तक बसों का रवाना होने का सिलसिला जारी रहा।
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300 से 500 रुपये तक अधिक किराया वसूल रहे
श्रमिकों ने बताया कि ट्रेनों में जगह तो महीनाभर पहले से नहीं है। सरकारी बसें सीधे नहीं जाती हैं। ट्रैवल्स एजेेेंसियों ने प्राइवेट बसें लगाई हुईं हैं। जो सीधे बिहार के कई जिलों तक जाती हैं। जिसमें औसतन किराया 1500 से 1800 रुपये तक पड़ता है। लेकिन इस बार बसें कम होने के कारण कुछ बस संचालकों ने अपनी बसें भेजी लेकिन 300 से 500 रुपये तक अधिक किराया वसूला।
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