फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Farmers will get seeds of disease resistant high quality varieties of fine paddy

Karnal News: किसानों को मिलेंगे बारीक धान की रोगरोधी उच्च गुणवत्तायुक्त किस्मों के बीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Mar 2024 03:40 AM IST
विज्ञापन
Farmers will get seeds of disease resistant high quality varieties of fine paddy
- इस बार किसानों को मोटे चावल की किस्म पूसा-44 का बीज नहीं होगा उपलब्ध
विज्ञापन

- क्षेत्रीय केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान करनाल में 22 मार्च से वितरित होंगे बीच
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पूसा बासमती शृंखला यानी सर्वाधिक निर्यात होने वाली बारीक धान की कई किस्मों के बीज किसानों को 22 मार्च से वितरित किए जाएंगे। खास बात यह है कि अगेती किस्मों के साथ पुरानी किस्मों की सुधरी नस्लों की किस्में उपलब्ध कराई जाएंगी जो झुलसा, झोंका आदि रोगों से मुक्त होंगी। दीर्घकालिक मोटे चावल की किस्म पूसा-44 का बीज इस बार किसानों को उपलब्ध नहीं होगा, क्योंकि अधिक समय में पकने वाली किस्म होने के कारण इसमें पानी का खर्च भी अधिक पाया गया है।

क्षेत्रीय केंद्र, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान करनाल के अध्यक्ष डॉ. शिव कुमार यादव ने बताया कि पीबी-1509 किस्म का ही सुधरा रूप 1692 है, ये 115 दिन में तैयार होने वाली किस्म है। 1692 की पैदावार 1509 से अधिक है लेकिन इसका भी सुधरा रूप पीबी 1847 रिलीज हो चुका है, जो झुलसा और झोंका रोग प्रतिरोधी है। ये 125 दिनों में तैयार होने वाली किस्म है। इसके अलावा पीबी-1121 किस्म के नस्ल का ही सुधरा रूप है पीबी-1718, जो झुलसा रोगरोधी है। इसके बाद अब इसी नस्ल की पीबी-1885 किस्म का भी बीज उपलब्ध है, ये किस्म झुलसा व झोंका दोनों रोगों की प्रतिरोधी किस्म है।
विज्ञापन

जो 1847, 1885, 1886 की सीरीज वाली भी झुलसा व झोंका रोग रोधी है। इन किस्मों में ये रोग नहीं होते हैं। जिससे किसानों को इन बीमारियों पर व्यय होने वाला धन भी बचता है। पैदावार भी अधिक होती है। पीबी 1401 में झुलसा रोग आता था लेकिन अब 1886 को इस रोग का प्रतिरोधी बनाया गया है। 1885, 1718 व 1121 किस्में 135 दिन, 1886 की किस्म 145 दिन में पकने वाली है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीधी बिजाई के लिए भी है बीज

क्षेत्रीय केंद्र करनाल में इन किस्मों के बीज को 22 मार्च से वितरित किया जाएगा। हरियाणा में धान की नर्सरी का समय 15 से 20 मई के करीब होता है। 15 जून के बाद रोपाई शुरू कर दी जाती है। पीबी-1979 व पीबी-1985 किस्म सीधी बिजाई (डीएसआर) के लिए है, क्योंकि ये खरपतवार प्रतिरोधी क्षमता रखती है। ऐसा नहीं है कि इन किस्मों में खरपतवार होता नहीं है लेकिन खरपतवार होने पर जब दवाई लगाई जाती है तो सिर्फ खरपतवार खत्म होगा, इस किस्म के पौधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इन किस्मों का बीज उपलब्ध

क्षेत्रीय केंद्र, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) करनाल पर इस बार पीबी-1509, पीबी-1692, पीबी-1847, पीबी-1885, पीबी-1886, पीबी-1718 और पीबी-1121 किस्म के बारीक धान का बीज उपलब्ध है। जिसका वितरण 22 मार्च से करनाल क्षेत्रीय केंद्र से होगा।


बारीक चावल वाले धान की जिन किस्मों का बीज केंद्र पर उपलब्ध है, वह उच्च गुणवत्ता वाला है। उनकी पैदावार बेहतर होगी। किसान बीज को ले सकते हैं। लेकिन इस बार मोटे चावल वाली पूसा-44 किस्म का बीज किसानों को नहीं मिलेगा। ये 145 से 150 दिन में पकने वाली किस्म है। दीर्घ अवधि होने के कारण सिंचाई भी अधिक करनी पड़ती है। अधिकतर किसान धान के बाद आलू, सरसों, मटर आदि लगाते हैं, वह कम अवधि वाली अगेती किस्मों के धान लगाते हैं, उनके लिए भी अगेती किस्मों के बीज भी उपलब्ध हैं।

- डॉ. शिव कुमार यादव, अध्यक्ष क्षेत्रीय केंद्र, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान करनाल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed