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विशेष बस में बैठकर फाइटर जेट की सैर का किया अनुभव
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय वायु सेना की कार्यप्रणाली कैसी है, युद्ध में किस तरह से फाइटर जेट उड़ाए जाते हैं। विमानों में सुरक्षा के इंतजाम क्या होते हैं। कर्ण नगरी के एनसीसी एयर विंग के कैडेट्स ने वीरवार को यह जानकारी प्राप्त की। भारतीय वायु सेना के दिशा सेल की ओर से तैयार किया गया विशेष आईपीई वाहन (इंडक्शन पब्लिसिटी एग्जिबिशन व्हीकल) करनाल पहुंचा।
दयाल सिंह कॉलेज के सभागार में इस वाहन के माध्यम से विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। जहां विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 600 कैडेट्स ने विमानों एवं फाइटर जेट पर आधारित विभिन्न मॉडल का अवलोकन किया। वहीं हाईड्रोलिक सिम्युलेटर के माध्यम से कैडेट्स ने बस में बैठे-बैठे फाइटर जेट की सैर का अनुभव भी किया। वॉल्वो कोच में 3 वर्चुअल रियलिटी कंसोल से वायु सेना की कई लघु फिल्मों का भी कैडेट्स ने आनंद लिया। इस दौरान नंबर-2 (एचएआर) एयर स्क्वाड्रन करनाल के अधिकारियों ने कैडेट्स को भारतीय वायु सेना में कॅरियर बनाने के अवसर की जानकारी भी दी। प्रदर्शनी में कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. आशिमा गक्खड़, एएनओ प्रो. किरण, एएनओ फ्लाइंग अफसर डॉ. सुरेश दुग्गल, एडजुटेंट जेडब्ल्यूओ एके द्विवेदी, सार्जेंट एके मिश्रा, सार्जेंट वीके तिवारी, सार्जेंट अमरजीत, सीपीएल दीपक, अनुज नेगी और हितेश विशेष रूप से उपस्थित रहे।
एसएसबी और एफ कैट में चयन की प्रक्रिया समझाई
नंबर 2 (एचएआर) एयर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर पवन गोयल और स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत कुमार विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने एक वृत्तचित्र प्रस्तुत करके एनसीसी के इतिहास पर प्रकाश डाला और विभिन्न तरीकों से एनसीसी व वायु सेना में शामिल होने के तरीके पर अपना व्याख्यान दिया। एसएसबी (सेवा चयन बोर्ड), एफ कैट आदि में चयन की प्रक्रिया समझाई।
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विद्यार्थियों से सीधा जुड़ाव है वायु सेना का मकसद
ट्रेनिंग कमांड, इस्टन कमांड, साउथ-वेस्ट कमांड और वेस्टर्न कमांड में अलग-अलग हिस्से में जा रहे हैं। सीधे तौर पर सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बस जा रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पढ़ने योग्य सामग्री भी दी जा रही है। वायु सेना बच्चों से सीधा जुड़ाव करना चाहती है। इसी उद्देश्य से विशेष प्रदर्शनी बस को तैयार किया गया है। ताकि उन्हें यह भी पता चले कि वायु सेना देश के लिए क्या कर रही है।
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करनाल। भारतीय वायु सेना की कार्यप्रणाली कैसी है, युद्ध में किस तरह से फाइटर जेट उड़ाए जाते हैं। विमानों में सुरक्षा के इंतजाम क्या होते हैं। कर्ण नगरी के एनसीसी एयर विंग के कैडेट्स ने वीरवार को यह जानकारी प्राप्त की। भारतीय वायु सेना के दिशा सेल की ओर से तैयार किया गया विशेष आईपीई वाहन (इंडक्शन पब्लिसिटी एग्जिबिशन व्हीकल) करनाल पहुंचा।
दयाल सिंह कॉलेज के सभागार में इस वाहन के माध्यम से विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। जहां विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 600 कैडेट्स ने विमानों एवं फाइटर जेट पर आधारित विभिन्न मॉडल का अवलोकन किया। वहीं हाईड्रोलिक सिम्युलेटर के माध्यम से कैडेट्स ने बस में बैठे-बैठे फाइटर जेट की सैर का अनुभव भी किया। वॉल्वो कोच में 3 वर्चुअल रियलिटी कंसोल से वायु सेना की कई लघु फिल्मों का भी कैडेट्स ने आनंद लिया। इस दौरान नंबर-2 (एचएआर) एयर स्क्वाड्रन करनाल के अधिकारियों ने कैडेट्स को भारतीय वायु सेना में कॅरियर बनाने के अवसर की जानकारी भी दी। प्रदर्शनी में कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. आशिमा गक्खड़, एएनओ प्रो. किरण, एएनओ फ्लाइंग अफसर डॉ. सुरेश दुग्गल, एडजुटेंट जेडब्ल्यूओ एके द्विवेदी, सार्जेंट एके मिश्रा, सार्जेंट वीके तिवारी, सार्जेंट अमरजीत, सीपीएल दीपक, अनुज नेगी और हितेश विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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एसएसबी और एफ कैट में चयन की प्रक्रिया समझाई
नंबर 2 (एचएआर) एयर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर पवन गोयल और स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत कुमार विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने एक वृत्तचित्र प्रस्तुत करके एनसीसी के इतिहास पर प्रकाश डाला और विभिन्न तरीकों से एनसीसी व वायु सेना में शामिल होने के तरीके पर अपना व्याख्यान दिया। एसएसबी (सेवा चयन बोर्ड), एफ कैट आदि में चयन की प्रक्रिया समझाई।
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विद्यार्थियों से सीधा जुड़ाव है वायु सेना का मकसद
ट्रेनिंग कमांड, इस्टन कमांड, साउथ-वेस्ट कमांड और वेस्टर्न कमांड में अलग-अलग हिस्से में जा रहे हैं। सीधे तौर पर सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बस जा रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पढ़ने योग्य सामग्री भी दी जा रही है। वायु सेना बच्चों से सीधा जुड़ाव करना चाहती है। इसी उद्देश्य से विशेष प्रदर्शनी बस को तैयार किया गया है। ताकि उन्हें यह भी पता चले कि वायु सेना देश के लिए क्या कर रही है।