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पूर्व सैनिकों का सचिवालय के सामने धरना
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल
Updated Tue, 18 Feb 2014 09:18 PM IST
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राष्ट्रीय सैनिक संघ के बैनर तले पूर्व सैनिकों ने संघ के चेयरमैन राजबीर सिंह चौनाह की अध्यक्षता में जिला सचिवालय के बाहर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया।
इसमें जिलेभर के पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। इस दौरान डीसी को राज्यपाल और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया।
चौहान ने कहा कि कई वर्षों से आफिसर रैंक से नीचे के सशस्त्र सैनिक सेवानिवृत्ति के बाद उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। उनका लगातार आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
सरकारी नौकरियों और पेट्रोल पंप व गैस एजेंसियों में आरक्षण केवल विशेष कैटेगरी तक ही सिमट कर रह गया है। आरक्षण का लाभ आम सैनिकों को नहीं दिया जाता।
इसका कारण यह भी है कि राष्ट्रीय सैनिक संघ के अलावा सभी पूर्व सैनिक संगठन सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के नेतृत्व में काम कर रहे हैं।
ज्ञापन में मुख्य मांगों को रखा गया
आर्म्ड फोर्सिज पीबीओआर की पेंशन गलतियों का तुरंत उन्मूलन किया जाए, क्योंकि हवलदार और नायब सूबेदार की पेंशन में काफी अंतर है।
सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में भी हवलदार और नायब सूबेदार की वेतन व पेंशन के अंतर को कम किया जाए। महंगाई भत्ते के 100 प्रतिशत पहुंचने के मद्देनजर 50 प्रतिशत मंहगाई भत्ता मूल वेतन और पेंशन में समायोजित किया जाए।
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पूर्व सैनिकों को निजी वाहनों पर पूरे देश में टोल टैक्स में छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि रैंक का भेदभाव न किया जाए, क्योंकि सबकी मूलभूत जरूरत एक समान हैं।
पूर्व सैनिकों के पुनर्वास के लिए ठेकेदारी प्रथा की बजाय उन्हें सरकारी कर्मचारी के तौर पर नौकरी दी जाए और जो सिक्योरिटी करने की इच्छा रखते हैं, उन्हें लाइसेंस दिए जाए।
पीबीओआर के सभी रैंक्स को 20 मरले के प्लाट दिए जाएं। शहर और नगर निगम में रिहायशी मकान पर हाउस टैक्स की छूट दी जाए।
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इसमें जिलेभर के पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। इस दौरान डीसी को राज्यपाल और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया।
चौहान ने कहा कि कई वर्षों से आफिसर रैंक से नीचे के सशस्त्र सैनिक सेवानिवृत्ति के बाद उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। उनका लगातार आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
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सरकारी नौकरियों और पेट्रोल पंप व गैस एजेंसियों में आरक्षण केवल विशेष कैटेगरी तक ही सिमट कर रह गया है। आरक्षण का लाभ आम सैनिकों को नहीं दिया जाता।
इसका कारण यह भी है कि राष्ट्रीय सैनिक संघ के अलावा सभी पूर्व सैनिक संगठन सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के नेतृत्व में काम कर रहे हैं।
ज्ञापन में मुख्य मांगों को रखा गया
आर्म्ड फोर्सिज पीबीओआर की पेंशन गलतियों का तुरंत उन्मूलन किया जाए, क्योंकि हवलदार और नायब सूबेदार की पेंशन में काफी अंतर है।
सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में भी हवलदार और नायब सूबेदार की वेतन व पेंशन के अंतर को कम किया जाए। महंगाई भत्ते के 100 प्रतिशत पहुंचने के मद्देनजर 50 प्रतिशत मंहगाई भत्ता मूल वेतन और पेंशन में समायोजित किया जाए।
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पूर्व सैनिकों को निजी वाहनों पर पूरे देश में टोल टैक्स में छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि रैंक का भेदभाव न किया जाए, क्योंकि सबकी मूलभूत जरूरत एक समान हैं।
पूर्व सैनिकों के पुनर्वास के लिए ठेकेदारी प्रथा की बजाय उन्हें सरकारी कर्मचारी के तौर पर नौकरी दी जाए और जो सिक्योरिटी करने की इच्छा रखते हैं, उन्हें लाइसेंस दिए जाए।
पीबीओआर के सभी रैंक्स को 20 मरले के प्लाट दिए जाएं। शहर और नगर निगम में रिहायशी मकान पर हाउस टैक्स की छूट दी जाए।