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कर्मचारियों ने एक सुर में भरी हुंकार, करेंगे आंदोलन

Thu, 26 Nov 2015 12:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल Updated Thu, 26 Nov 2015 12:46 AM IST
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Employees filled shout in unison, the movement will

सर्वकर्मचारी संघ के आह्वान पर करनाल के सेक्टर-12 स्थित हुडा ग्राउंड में हुई चेतावनी रैली में प्रदेशभर के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। आक्रोशित कर्मचारियों ने सरकार को ललकारते हुए चेतावनी भी दे डाली।

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कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने कर्मचारियों के प्रति अपना रवैया नहीं बदला तो वे सरकार को बदलने की भी क्षमता रखते हैं। संघ के अध्यक्ष धर्मबीर फौगाट व महासचिव सुभाष लांबा ने मंच से एलान किया कि जब तक सरकार प्रदेश के कर्मचारियों की जायज मांगों का हल नहीं करेगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा। रणनीति के तहत यह संघर्ष जारी रहेगा।
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दोपहर 12 बजे से लेकर शाम चार बजे तक चली संघ की रैली को संबोधित करते हुए सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान धमबीर फौगाट ने कहा कि सरकार से कई बार मिलकर संघ ने मांगे रखी हैं, लेकिन उनका कोई समाधान नहीं निकला है। ऐसे में इस रैली के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी जा रही है कि अब कर्मचारी दबने वाला नहीं है। फौगाट ने कहा कि आठ दिसंबर को बिजली संशोधन बिल 2014 के खिलाफ आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में कर्मचारी सभी ब्लॉकों व जिलों में प्रदर्शन करेंगे।
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सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को राज्य में लागू कराने को लेकर पांच जनवरी को सभी जिला उपायुक्त कार्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। सात फरवरी को सभी विधायकों के आवासों पर प्रदर्शन करके उनकी मांगों को विधानसभा में उठाने बाबत ज्ञापन सौंपे जाएंगे। आंदोलन के अगले चरण में आठ से 22 फरवरी तक सरकार की वादाखिलाफी व विभाग में लागू की जा रही जनविरोधी नीतियों के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाए जाएंगे। आगामी बजट सत्र में हरियाणा विधानसभा कूच किया जाएगा। इसके अलावा 20 दिसंबर को राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित करके महिला कर्मचारियों को आंदोलन में शामिल किया जाएगा।

सरकार ने वादों पर अमल नहीं किया
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि सरकार ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कर्मचारी वर्ग से किए वादों पर अभी तक अमल नहीं किया। एक वर्ष बीत जाने के बावजूद मुख्यमंत्री के पास कर्मचारियों की मांगों पर वार्ता तक का समय नहीं है। सरकार सभी विभागों में भाजपा के मजदूर संगठन की इकाईयां गठित करने, कर्मचारियों की जातिगत-सांप्रदायिक आधार पर एकता तोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन रैली में उमड़ी भीड़ ने इसका करारा जवाब दिया है।

सीटू के महासचिव सतबीर सिंह, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रधान मास्टर शेर सिंह, रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान आरसी जग्गा ने कर्मचारियों की मांगों व घोषित आंदोलन का न केवल समर्थन किया, बल्कि सरकार को चेतावनी दी कि सरकार कर्मचारियों को अकेला न समझे, प्रदेश के किसान, मजदूर व रिटायर्ड कर्मचारी इनके साथ हैं। इस अवसर पर सर्वकर्मचारी के महासचिव सुभाष लांबा, उपप्रधान सुरेश नोहरा, विरेंद्र, रोडवेज से राज्य प्रधान सरबत पूनिया, सतीश सैनी, संदीप सांगवान, मान सिंह, वजीर सिंह, डा. हितेश, नरेश शास्त्री, जीवन सिंह, सीएन भारती, देवेंद्र हुड्डा, मास्टर शेरा सिंह, मास्टर धर्म सिंह सहित हजारों की संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

नई परिवहन नीति जन विरोधी
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन के वरिष्ठ नेता सरबत पूनिया ने नई परिवहन नीति को कर्मचारी व जनता विरोधी बताते हुए कहा कि इसमें बड़े अधिकारियों को ज्यादा, जबकि तीसरे व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। रोडवेज को दस हजार बसों की जरूरत है। यदि नई परिवहन नीति लागू की गई तो अनिश्चिकालीन हड़ताल की जाएगी और प्राइवेट बसों को बसस्टैंड के अंदर नहीं घुसने दिया जाएगा।

ये पहुंचे रैली में
संघ की रैली में आंगनबाड़ी वर्कर, आशा वर्कर, पीडब्ल्यूडी, अध्यापक कला संघ, हरियाणा एजुकेशन मिनिस्टियल स्टाफ एसो. होम गार्ड, चौकीदार, बिजली निगम, ग्रामीण सफाई कर्मचारी, हुडा कर्मचारी समेत विभिन्न निगमों व विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, एमपीएचडब्ल्यू एसो व वीएलडीए एसोसिएशन समेत दर्जनभर विभागों के कर्मचारी रैली में शामिल हुए। कर्मचारी अपनी अपनी ड्रेस में पहुंचे।

यह है कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
1. सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2016 से लागू करना सुनिश्चित किया जाए।
2. सभी विभागों के कर्मचारियों की छठे वेतन आयोग की विसंगतियां 30 नवंबर, 2015 से पहले दूर करना सुनिश्चित किया जाए।
3. नौकरी से हटाए गए सभी कर्मचारियों को वापिस लिया जाए।
4. दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके पार्ट टाइम, डेली वेजिज, अनुबंध, तदर्थ, टर्म अपाइंटी, मैस वर्कर, डीसी रेट, ग्रामीण सफाई कर्मचारी व केंद्रीय परियोजनाओं में कार्यरत वर्करों को बिना शर्त नियमित किया जाए।

5. समान काम-समान वेतन के सिद्धांत को लागू किया जाए।
6. रोडवेज के रूट परमिट व बिजली वितरण निगमों की सब-डिविजनों के कार्य को निजी हाथों में देने सहित जनसेवा के सभी विभागों में लागू की जा रही निजीकरण, आउटसोर्सिंग व ठेका प्रथा की नीतियां वापस ली जाए।

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