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व्यावसायीकरण से महंगी हुई शिक्षा और चिकित्सा : डॉ. मोहन भागवत
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों ही हर व्यक्ति की मूलभूत जरूरत है पर दोनों ही महंगी और दुर्लभ हो रही हैं। इसका एक कारण तो जनसंख्या के आधार पर उपलब्धता की कमी, दूसरा कर्तव्य और सेवा के स्थान पर व्यावसायिक होना है। इसके लिए समाज को आगे आना होगा। डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को करनाल में श्री आत्म मनोहर जैन बहुविशेषीय चिकित्सालय के लोकार्पण पर उक्त विचार रखे।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करके अपनी शिक्षा हमारे देश में लागू की, जिससे अशिक्षा और कई अन्य समस्याएं बढ़ीं। अंग्रेजों से पहले हमारे देश की 70 प्रतिशत जनसंख्या साक्षर थी। बेरोजगारी नहीं थी, उस समय इंग्लैड की साक्षरता 17 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए, लेकिन अच्छी शिक्षा और चिकित्सा सबको को कैसे मिले, इस पर हमें काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा अभाव दूर करती है।
उन्होंने कहा कि सेवा हमारे डीएनए में है। हम आज भी सामने भू्खे व्यक्ति को बैठा देखकर खुद खाना नहीं खा सकते, भले ही उसकी तरफ पीठ ही क्यों न करनी पड़े। ज्ञान और संवेदना ही मनुष्य को पशुओं से अलग करती हैं। क्योंकि इंसानों में इंसानियत है, दूसरों की देने की प्रवृत्ति है। त्याग, सेवा, दूसरों की चिंता, सबको साथ लेकर चलना, यही तो धर्म है। पवित्र भावना से सेवा की जाए तो कभी कुछ कम नहीं पड़ता। ढाई आखर प्रेम का पढ़ौ सो पंडित होय, ये सब व्यवहार से पता चलता है। मनुष्य अपने लिए नहीं बल्कि अपनों के लिए जीता है। इससे वह अपने परिवार, समाज व देश को आगे बढाता है।
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उन्होंने वैद्य परंपरा की भी चरचा की। कहा कि तब 10-15 गावों को मिलाकर एक वैद्य हुआ करते थे, वह खुद दवा देने जाते थे। फैमिली डॉक्टर की तरह, वह वैद्य सबको जानता था, उसकी बीमारी का इतिहास जानता था, दवा काम करती थी। उनकी आजीविका की चिंता गांव के लोग करते थे। अब ये प्रणाली भी विलुप्त हो गई है।
इससे पहले इंद्री रोड स्थित श्री आत्ममनोहर आराधना जैन मंदिर में उपप्रवर्तक पीयूष मुनि महाराज के सानिध्य में आयोजित सद्भावना सेवा समारोह में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे, जहां उनका स्काउट गाइड ने बैंडवाजों से स्वागत किया। इसके बाद डॉ. भागवत ने श्री आत्ममनोहर जैन चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से धर्मार्थ बनाए गए श्री आत्ममनोहर जैन बहुविशेषीय अस्पताल का लोकार्पण किया। इस मौके पर उपप्रवर्तक पीयूष मुनि महाराज के साथ साथ यज्ञ सम्राट त्रिपुरा पीठाधीश्वर स्वामी हरिओम, स्वामी समपूर्णानंद, संयमेष मुनि, महंत गुरविंद्र सिंह, सांसद संजय भाटिया, विधायक हरविंद्र कल्याण, राम कुमार कश्यप, भाजपा प्रदेश महासचिव वेदपाल, मेयर रेणू बाला गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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करनाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों ही हर व्यक्ति की मूलभूत जरूरत है पर दोनों ही महंगी और दुर्लभ हो रही हैं। इसका एक कारण तो जनसंख्या के आधार पर उपलब्धता की कमी, दूसरा कर्तव्य और सेवा के स्थान पर व्यावसायिक होना है। इसके लिए समाज को आगे आना होगा। डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को करनाल में श्री आत्म मनोहर जैन बहुविशेषीय चिकित्सालय के लोकार्पण पर उक्त विचार रखे।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करके अपनी शिक्षा हमारे देश में लागू की, जिससे अशिक्षा और कई अन्य समस्याएं बढ़ीं। अंग्रेजों से पहले हमारे देश की 70 प्रतिशत जनसंख्या साक्षर थी। बेरोजगारी नहीं थी, उस समय इंग्लैड की साक्षरता 17 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए, लेकिन अच्छी शिक्षा और चिकित्सा सबको को कैसे मिले, इस पर हमें काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा अभाव दूर करती है।
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उन्होंने कहा कि सेवा हमारे डीएनए में है। हम आज भी सामने भू्खे व्यक्ति को बैठा देखकर खुद खाना नहीं खा सकते, भले ही उसकी तरफ पीठ ही क्यों न करनी पड़े। ज्ञान और संवेदना ही मनुष्य को पशुओं से अलग करती हैं। क्योंकि इंसानों में इंसानियत है, दूसरों की देने की प्रवृत्ति है। त्याग, सेवा, दूसरों की चिंता, सबको साथ लेकर चलना, यही तो धर्म है। पवित्र भावना से सेवा की जाए तो कभी कुछ कम नहीं पड़ता। ढाई आखर प्रेम का पढ़ौ सो पंडित होय, ये सब व्यवहार से पता चलता है। मनुष्य अपने लिए नहीं बल्कि अपनों के लिए जीता है। इससे वह अपने परिवार, समाज व देश को आगे बढाता है।
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उन्होंने वैद्य परंपरा की भी चरचा की। कहा कि तब 10-15 गावों को मिलाकर एक वैद्य हुआ करते थे, वह खुद दवा देने जाते थे। फैमिली डॉक्टर की तरह, वह वैद्य सबको जानता था, उसकी बीमारी का इतिहास जानता था, दवा काम करती थी। उनकी आजीविका की चिंता गांव के लोग करते थे। अब ये प्रणाली भी विलुप्त हो गई है।
इससे पहले इंद्री रोड स्थित श्री आत्ममनोहर आराधना जैन मंदिर में उपप्रवर्तक पीयूष मुनि महाराज के सानिध्य में आयोजित सद्भावना सेवा समारोह में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे, जहां उनका स्काउट गाइड ने बैंडवाजों से स्वागत किया। इसके बाद डॉ. भागवत ने श्री आत्ममनोहर जैन चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से धर्मार्थ बनाए गए श्री आत्ममनोहर जैन बहुविशेषीय अस्पताल का लोकार्पण किया। इस मौके पर उपप्रवर्तक पीयूष मुनि महाराज के साथ साथ यज्ञ सम्राट त्रिपुरा पीठाधीश्वर स्वामी हरिओम, स्वामी समपूर्णानंद, संयमेष मुनि, महंत गुरविंद्र सिंह, सांसद संजय भाटिया, विधायक हरविंद्र कल्याण, राम कुमार कश्यप, भाजपा प्रदेश महासचिव वेदपाल, मेयर रेणू बाला गुप्ता आदि मौजूद रहे।