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Karnal News: खाना नहीं मिलने से डंकी रूट पर घट जाता है 25 किलो तक वजन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Nov 2025 01:49 AM IST
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Due to lack of food, the weight of the donkey route decreases by up to 25 kg.
गगन तलवार
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करनाल। डंकी रूट से अमेरिका जाने वाले युवाओं को कई बार तो रास्ते में खाने तक के लिए भी नहीं मिलता। भूखे ही यातनाओं भरा सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में दिल्ली से चलने के बाद अमेरिका पहुंचने पर होने वाली जांच में युवाओं का 20 से 25 किलोग्राम तक वजन कम पाया जाता है। डोंकर रास्ते में खाने के लिए मीट या भुना हुआ मांस ही देते हैं। मना करने पर भूखा ही रहना पड़ता है। रास्ता करीब दो दिन में तय हो पता है। इस बीच पानी पीकर गुजारा करने से तबीयत बिगड़ जाती है।
डिपोर्ट हुए युवाओं ने बताया कि डंकी रूट से अमेरिका जाने का मतलब अपनी जिंदगी को खुद मौत के रास्ते पर लेकर जाना है। रास्ते में डोंकर पिटाई तक कर देते हैं। अमेरिका से डिपोर्ट होकर आए रवि ने बताया कि वह मीट नहीं खाते हैं। पैनामा के जंगलों में डोंकरों ने उन्हें खाने के लिए भुना हुआ मीट दिया। उनके साथ 40 युवकों का समूह था, किसी ने भी इस मीट को नहीं खाया। पानी पीकर ही रात बिताई। आगे जाने के बाद जब वे एक होटल के नजदीक रुके लेकिन वहां भी उन्हें खाने के लिए कुछ खरीदने नहीं दिया गया।
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मैं खुद शैफ था, पहली बार देखा था ऐसा मीट
रवि ने बताया कि वह अमेरिका जाने से पहले होटल में शेफ की नौकरी करते थे। इसके लिए उन्होंने कोर्स भी किया हुआ था। जिस तरह का मीट उन्हें रास्ते में दिया जाता था, वैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। पूछने पर पता चला कि बीफ भी दिया जाता है, इसलिए वह कोई भी चीज नहीं खाते थे। जब कई दिन ऐसे बीत जाते थे तो एक बर्गर या सेंडविच मिलता था।
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जांच में 81 से 64 किलोग्राम निकला वजन
डिपोर्ट होकर आए राहुल ने बताया कि जब वह दिल्ली से चले थे तो उनका वजन 81 किलो था। नौ महीने का खतरनाक सफर तय करने के बाद जब वह अमेरिका पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। हथकड़ी लगाकर शिविर में लेकर गए। शिविर में मेडिकल जांच भी की जाती है, इस दौरान उनका वजन 64 किलोग्राम निकला। वह हैरान रह गए थे। करनाल से चलते समय उनका वजन 81 किलो था। ऐसी ही स्थिति अन्य युवकों की भी थी। पीने के लिए पानी भी कई बार पूरे दिन में एक बोतल ही मिल पाता था या रास्ते से चलते हुए कहीं से भरते थे।
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