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Karnal News: सियासी दंगल में भाजपा-कांग्रेस की दिखी सीधा टक्कर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 May 2024 05:47 AM IST
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Direct competition between BJP and Congress seen in political riot
- अधिकतर स्थानों पर दोनों पार्टियों के बस्तों पर ही दिखी भीड़, कहीं कड़ा दिखा मुकाबला
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देव शर्मा
करनाल। करीब डेढ़ महीने की चुनावी कसरत के बाद सियासी दंगल के खिलाड़ियों के भाग्य का फैसला करने के लिए जब शनिवार को मतदाता सूर्य की तपिश के बीच घर से निकले तो अधिकतर स्थानों पर भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर नजर आई।
करनाल लोकसभा सीट और करनाल विधान सभा सीट हरियाणा की सियासत में केंद्र में रही, क्योंकि यहां प्रदेश के मुखिया सीएम नायब सिंह सैनी और साढ़े नौ सालों तक राज्य की बतौर मुख्यमंत्री कमान संभालने वाले करनाल के पूर्व विधायक मनोहर लाल पहली बार केंद्रीय राजनीति में कदम रखने के लिए लोकसभा सीट से ताल ठोक रहे हैं।
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करीब दो महीने पहले आचार संहिता लागू हुई तो राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं। 12 मार्च को मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और 13 मार्च को नायब सैनी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने विश्वासमत हासिल किया। सीएम बदलना भी भाजपा की केंद्रीय राजनीति की कूटनीति का हिस्सा था, क्योंकि केंद्रीय नेतृत्व को शायद साढ़े नौ सालों की सरकार के दौरान नाराजगी का भय था।
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13 मार्च को ही भाजपा ने हरियाणा में छह प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी जिसमें एक नाम करनाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी मनोहर लाल का भी था। भाजपा ने अपना प्रचार अभियान तेजी से शुरू कर दिया था। इस दौरान मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस प्रत्याशी तय करने में जुटी थी लेकिन कांग्रेस में गुटबाजी और दावेदारी अधिक लोगों की होने के कारण प्रत्याशी घोषित करने में विलंब हुआ। कांग्रेस ने 26 अप्रैल को दिव्यांशु बुद्धिराजा को प्रत्याशी घोषित किया, जो 28 अप्रैल को रोड शो के माध्यम से पानीपत व करनाल पहुंचे। इसके बाद अन्य दलों के भी प्रत्याशी सामने आए। मनोहर लाल व नायब सैनी दोनों ही भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची में भी थे, इसलिए अपने निर्वाचन क्षेत्र के साथ-साथ प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी पार्टी ने उन्हें सौंपी थी। जिसके तहत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 58 और मनोहर लाल ने 48 कुल 90 विधान सभा क्षेत्रों में जाकर प्रचार किया।
दूसरी ओर जैसी उम्मीद कांग्रेस हाईकमान ने की थी कि टिकट घोषित होने के बाद कांग्रेस के हरियाणवी नेता एक मंच पर आ जाएंगे लेकिन ऐसा हो नहीं सका। कई ऐसे नेता ऐसे रहे, जो टिकट के प्रबल दावेदार थे, लेकिन जब उन्हें टिकट नहीं मिला तो भले ही उन्होंने अपने समर्थकों की बैठक करके या किसी अन्य माध्यम से कांग्रेस प्रत्याशी साथ देने का वादा तो किया लेकिन कहीं सार्वजनिक मंचों पर आकर एकजुटता का प्रदर्शन नहीं कर सके।

फिर भी चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में कांग्रेस प्रत्याशी दिव्यांशु बुद्धिराजा के समर्थन में केंद्रीय नेताओं में एक कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने जरूर पानीपत में रैली की। करनाल में कांग्रेस की कोई बड़ी और केंद्रीय नेता की रैली नहीं हो सकी, हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी ने कई रोड शो किए, कड़ी मेहनत करके कांग्रेस को कड़े मुकाबले में लाकर भाजपा को सीधी टक्कर दी। एनसीपी के प्रत्याशी मराठा वीरेंद्र वर्मा ने भी पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा, उनके समर्थन में भी एनसीपी के प्रमुख शरद पंवार रैली भी करने आए। मराठा को इनेलो का भी साथ मिला।
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