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मधुमेह रोगी भी खा सकेंगे कर्णनगरी की रिफाइंड चीनी
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263 करोड़ रुपये की लागत से बनी जिस नई सहकारी चीनी मिल का लाभ 135 गांवों के किसानों को मिलेगा, उसकी सबसे बड़ी खासियत यह रहेगी कि यह चीनी मिल 3500 टीडीसी की क्षमता से चलकर करीब 200 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदने के साथ रिफाइंड शुगर का उत्पादन करेगी। इस चीनी में स्वास्थ्य के लिए सर्वाधिक नुकसानदेह माने जाने वाला सल्फर की मात्रा बेहद कम होेगी। इसे सल्फर फ्री चीनी कहा जा रहा है, इसलिए डायबिटीज के रोगी भी एहतियात के साथ इस्तेमाल कर सकेंगे।
जानकारी के अनुसार सहकारी चीनी मिल पिछले पेराई सत्र में ही बनकर तैयार हो गई थी। इसका ट्रायल आठ अप्रैल-2021 को किया गया था। अब आठ नवंबर से शुरू होने वाले पेराई सत्र में मिल पूरी क्षमता से पेर्राई करेगी। चीनी मिल के प्रोजेक्ट सलाहकार एनके शर्मा ने बताया कि चीनी मिल की सबसे खासबात इसके द्वारा रिफाइंड शुगर का उत्पादन है। करनाल सहकारी चीनी मिल अब पूरी की पूरी रिफाइंड चीनी का उत्पादन करेगी। उन्होंने बताया कि चीनी खाने के काम आती है, चीनी में सर्वाधिक नुकसान करने वाला यदि कोई पदार्थ होता है, तो वह है सल्फर। इस नई चीनी मिल द्वारा रिफाइंड चीनी सल्फर फ्री होगी। यह कहना तो उचित नहीं होगा कि सल्फर की मात्रा बिल्कुल भी नहीं होगी लेकिन इतना जरूर दावा है कि सल्फर नाममात्र यानी न के बराबर ही होगा। जिसे एहतियात के साथ डायबिटीज के रोगी भी खा सकेंगे। डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहद कम नुकसानदेह होगी। उन्हें बेस्वाद चाय नहीं पीनी पड़ेगी। यही कारण है कि रिफाइंड चीनी की मांग भी अधिक होगी। समय पर किसानों को भुगतान मिलेगा। पिछले साल 123 गांवों के किसानों का गन्ना खरीदा गया था लेकिन इस बार बढ़ी क्षमता को देखते हुए 135 गांवों के किसानों का 22479 एकड़ जमीन पर गन्ने का उत्पादन कराया गया है। करीब 55 लाख क्विंटल गन्ना खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। जिसका चीनी मिल द्वारा किसानों को करीब 200 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार सहकारी चीनी मिल पिछले पेराई सत्र में ही बनकर तैयार हो गई थी। इसका ट्रायल आठ अप्रैल-2021 को किया गया था। अब आठ नवंबर से शुरू होने वाले पेराई सत्र में मिल पूरी क्षमता से पेर्राई करेगी। चीनी मिल के प्रोजेक्ट सलाहकार एनके शर्मा ने बताया कि चीनी मिल की सबसे खासबात इसके द्वारा रिफाइंड शुगर का उत्पादन है। करनाल सहकारी चीनी मिल अब पूरी की पूरी रिफाइंड चीनी का उत्पादन करेगी। उन्होंने बताया कि चीनी खाने के काम आती है, चीनी में सर्वाधिक नुकसान करने वाला यदि कोई पदार्थ होता है, तो वह है सल्फर। इस नई चीनी मिल द्वारा रिफाइंड चीनी सल्फर फ्री होगी। यह कहना तो उचित नहीं होगा कि सल्फर की मात्रा बिल्कुल भी नहीं होगी लेकिन इतना जरूर दावा है कि सल्फर नाममात्र यानी न के बराबर ही होगा। जिसे एहतियात के साथ डायबिटीज के रोगी भी खा सकेंगे। डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहद कम नुकसानदेह होगी। उन्हें बेस्वाद चाय नहीं पीनी पड़ेगी। यही कारण है कि रिफाइंड चीनी की मांग भी अधिक होगी। समय पर किसानों को भुगतान मिलेगा। पिछले साल 123 गांवों के किसानों का गन्ना खरीदा गया था लेकिन इस बार बढ़ी क्षमता को देखते हुए 135 गांवों के किसानों का 22479 एकड़ जमीन पर गन्ने का उत्पादन कराया गया है। करीब 55 लाख क्विंटल गन्ना खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। जिसका चीनी मिल द्वारा किसानों को करीब 200 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।
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