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डेंगू पर हालात बेकाबू, प्राइवेट अस्पतालों में भी बेड फुल
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
Updated Sun, 25 Oct 2015 12:19 AM IST
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प्राइवेट अस्पताल में। डेंगू और मलेरिया के चलते जिलेभर में हालात बेकाबू
हो गए हैं। आंकड़ों की बात करें तो पूर्व मंत्री समेत 21 लोगों की मौत
संदिग्ध डेंगू से हो चुकी है, बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग न तो डेंगू
रोकने के पुख्ता प्रबंध कर पाया और न ही डेंगू से पीड़ितों के इलाज के लिए।
हालांकि सरकारी आंकड़े एक भी मौत को डेंगू से नहीं मान रहे, जबकि पीड़ित 125 की डेंगू से पीड़ित की पुष्टि जरूर कर रहा है। इसके विपरीत हकीकत यह है कि जिलेभर में डेंगू से पीड़ितों की संख्या हजारों में पहुंच गई है। न तो सरकारी अस्पताल में कोई बेड खाली है और न ही प्राइवेट में। अनुमान है कि करीब पांच हजार लोग संदिग्ध डेंगू से पीड़ित हैं। पिछले डेढ़ महीने से जिले में डेंगू का प्रकोप है।
हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि सरकारी अस्पताल में क्षमता से अधिक मरीज दाखिल हैं। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में 200 बेड की सुविधा है, जबकि यहां पर करीब 350 मरीज दाखिल हैं। इनमें से ज्यादातर डेंगू और बुखार से पीड़ित हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी की बात करें तो आज भी स्थिति भयावह बनी है। सर्दी के आने से डेंगू बुखार पर लगाम लगती है, पर अब भी डेंगू काबू नहीं पाया जा सका है। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में 2500 से 2800 मरीजों की ओपीडी चल रही है, जो क्षमता से अधिक है। इसी प्रकार रोजाना मेडिसन विभाग में 500 से ज्यादा मरीज चेकअप के लिए आ रहे हैं। औसतन पांच लोग संदिग्ध डेंगू से पीड़ित होकर सरकारी अस्पताल आ रहे हैं।
अस्पताल में बेड पड़ गए कम
मेडिकल कॉलेज में बुखार और डेंगू के कारण पहली बार मेडिकल कॉलेज में बेड भी कम पड़ गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ज्यादातर मरीज बुखार, मलेरिया और डेंगू से पीड़ित आ रहे हैं, वहीं मौसम में बदलाव के कारण सर्दी और जुकाम के मरीज भी आ रहे हैं। खास बात यह है कि हल्का सा बुखार होने पर मरीज डेंगू का टेस्ट जरूर करा रहा है। नए मरीजों को अस्पताल प्रबंधन चाह कर भी दाखिल नहीं कर पा रहा है, क्योंकि पहले से ही अस्पताल में बेड पड़ गए हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि एक एक बेड पर दो-दो मरीज हैं या फिर लोग अपने घर से फोल्डिंग लाए हैं।
निजी अस्पतालों में सिफारिशों से कर रहे दाखिल
पहले मरीज सरकारी अस्पताल में दाखिल होने के लिए नेताओं की सिफारिश लगाते थे, लेकिन शहर में अब हालात बदल गए हैं। शहर में करीब दस बड़े अस्पताल हैं, यहां पर किसी भी अस्पताल में बेड खाली नहीं है। यहां पर डेंगू से पीड़ित को दाखिल कराने के लिए न केवल पैसे खर्चने पड़ते हैं, बल्कि सिफारिश भी करानी पड़ती है। एक अस्पताल के पास बेड इतने कम पड़ गए हैं कि उसने एक दूसरे भवन को किराए पर लेना पड़ा और वहीं पर अपनी स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कर दी। पीड़ित बिल्लू सिंह ने बताया कि दो दिन पहले उसकी पत्नी को डेंगू की शिकायत थी, न तो उसे सरकारी अस्पताल में जगह मिली और न ही प्राइवेट में। करनाल में तीन अस्पतालों में गया, लेकिन सभी ने बेड खाली नहीं होने की बात कही। एक निजी अस्पताल के एमडी ने बताया कि वे क्या करें अस्पताल में जगह ही नहीं है, कमोबेश हर बड़े अस्पताल में यही स्थिति है, क्योंकि बीमार होने वालों की संख्या ज्यादा है।
ब्लड के लिए भी हो रही भागदौड़
डेंगू के कारण मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत होती है, ऐसे में मरीजों के परिजन ब्लड बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में भी ब्लड बैंक है, लेकिन यहां पर वेटिंग ज्यादा होने के कारण मरीजों के परिजन निजी ब्लड बैंकों के पास प्लेटलेट्स के लिए जा रहे हैं। सुबह से शाम तक ब्लड बैंक के बाहर भीड़ लगी रहती है।
सरकारी में डॉक्टर भी हैं कम
मेडिकल कॉलेज में ओपीडी की बात करें तो करीब दो से तीन घंटे तक लोग लाइनों लगे रहते हैं। भीड़ अधिक होने के कारण डाक्टर भी मरीज के चेकअप पर ज्यादा समय नहीं दे पाते। इसका कारण है मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी है। इस समय करीब 32 डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि यहां पर करीब 100 डॉक्टरों की जरूरत है। हारकर मरीजों को चंडीगढ़ और दिल्ली का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
विभाग का इंकार, लगातार हो रही मौत
शुरू से अब तक स्वास्थ्य विभाग डेंगू से हुई मौत से इंकार करता आ रहा है। बावजूद इसके शहर में हर सप्ताह डेंगू से पीड़ितों के मरने का दौर जारी है। पूर्व मंत्री मीना मंडल समेत करीब 21 लोग इसकी भेंट चढ़ चुके हैं। हाल ही में घरौंडा के घनश्याम की डेंगू से मौत हो गई, जबकि दो दिन पहले काछवा के पाल नगर व विजय नगर और सुभाष कॉलोनी में तीन बच्चों की मौत डेंगू से हो चुकी है। सवाल यह है कि जब विभाग डेंगू से मौत से इंकार कर रहा है तो आखिर मौत किस बीमारी से हो रही हैं?
कोट
मेडिकल कॉलेज में डेंगू के इलाज के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। हमारे यहां 200 बेड हैं, लेकिन मरीज ज्यादा होने के कारण मजबूरी में मरीजों को दाखिल करना पड़ता है, इसलिए एक एक बेड पर दो-दो मरीज हो जाते हैं। इस समय करीब 350 मरीज दाखिल है, इसलिए समस्या पैदा हो जाती है। हो सकता है कि जैसी स्थिति हमारे पास है, वैसी ही निजी अस्पतालों में भी हो गई हो। इसलिए जरूरी है कि मच्छर न पनपने दें और खुद को हर हाल में मच्छरों से बचाएं। डेंगू से मौत की कोई रिपोर्ट हमारे पास नहीं आई है।
डॉ. योगेश शर्मा, पीएमओ, मेडिकल कॉलेज एवं आईएमए के प्रधान।
हालांकि सरकारी आंकड़े एक भी मौत को डेंगू से नहीं मान रहे, जबकि पीड़ित 125 की डेंगू से पीड़ित की पुष्टि जरूर कर रहा है। इसके विपरीत हकीकत यह है कि जिलेभर में डेंगू से पीड़ितों की संख्या हजारों में पहुंच गई है। न तो सरकारी अस्पताल में कोई बेड खाली है और न ही प्राइवेट में। अनुमान है कि करीब पांच हजार लोग संदिग्ध डेंगू से पीड़ित हैं। पिछले डेढ़ महीने से जिले में डेंगू का प्रकोप है।
हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि सरकारी अस्पताल में क्षमता से अधिक मरीज दाखिल हैं। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में 200 बेड की सुविधा है, जबकि यहां पर करीब 350 मरीज दाखिल हैं। इनमें से ज्यादातर डेंगू और बुखार से पीड़ित हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी की बात करें तो आज भी स्थिति भयावह बनी है। सर्दी के आने से डेंगू बुखार पर लगाम लगती है, पर अब भी डेंगू काबू नहीं पाया जा सका है। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में 2500 से 2800 मरीजों की ओपीडी चल रही है, जो क्षमता से अधिक है। इसी प्रकार रोजाना मेडिसन विभाग में 500 से ज्यादा मरीज चेकअप के लिए आ रहे हैं। औसतन पांच लोग संदिग्ध डेंगू से पीड़ित होकर सरकारी अस्पताल आ रहे हैं।
अस्पताल में बेड पड़ गए कम
मेडिकल कॉलेज में बुखार और डेंगू के कारण पहली बार मेडिकल कॉलेज में बेड भी कम पड़ गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ज्यादातर मरीज बुखार, मलेरिया और डेंगू से पीड़ित आ रहे हैं, वहीं मौसम में बदलाव के कारण सर्दी और जुकाम के मरीज भी आ रहे हैं। खास बात यह है कि हल्का सा बुखार होने पर मरीज डेंगू का टेस्ट जरूर करा रहा है। नए मरीजों को अस्पताल प्रबंधन चाह कर भी दाखिल नहीं कर पा रहा है, क्योंकि पहले से ही अस्पताल में बेड पड़ गए हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि एक एक बेड पर दो-दो मरीज हैं या फिर लोग अपने घर से फोल्डिंग लाए हैं।
निजी अस्पतालों में सिफारिशों से कर रहे दाखिल
पहले मरीज सरकारी अस्पताल में दाखिल होने के लिए नेताओं की सिफारिश लगाते थे, लेकिन शहर में अब हालात बदल गए हैं। शहर में करीब दस बड़े अस्पताल हैं, यहां पर किसी भी अस्पताल में बेड खाली नहीं है। यहां पर डेंगू से पीड़ित को दाखिल कराने के लिए न केवल पैसे खर्चने पड़ते हैं, बल्कि सिफारिश भी करानी पड़ती है। एक अस्पताल के पास बेड इतने कम पड़ गए हैं कि उसने एक दूसरे भवन को किराए पर लेना पड़ा और वहीं पर अपनी स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कर दी। पीड़ित बिल्लू सिंह ने बताया कि दो दिन पहले उसकी पत्नी को डेंगू की शिकायत थी, न तो उसे सरकारी अस्पताल में जगह मिली और न ही प्राइवेट में। करनाल में तीन अस्पतालों में गया, लेकिन सभी ने बेड खाली नहीं होने की बात कही। एक निजी अस्पताल के एमडी ने बताया कि वे क्या करें अस्पताल में जगह ही नहीं है, कमोबेश हर बड़े अस्पताल में यही स्थिति है, क्योंकि बीमार होने वालों की संख्या ज्यादा है।
ब्लड के लिए भी हो रही भागदौड़
डेंगू के कारण मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत होती है, ऐसे में मरीजों के परिजन ब्लड बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में भी ब्लड बैंक है, लेकिन यहां पर वेटिंग ज्यादा होने के कारण मरीजों के परिजन निजी ब्लड बैंकों के पास प्लेटलेट्स के लिए जा रहे हैं। सुबह से शाम तक ब्लड बैंक के बाहर भीड़ लगी रहती है।
सरकारी में डॉक्टर भी हैं कम
मेडिकल कॉलेज में ओपीडी की बात करें तो करीब दो से तीन घंटे तक लोग लाइनों लगे रहते हैं। भीड़ अधिक होने के कारण डाक्टर भी मरीज के चेकअप पर ज्यादा समय नहीं दे पाते। इसका कारण है मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी है। इस समय करीब 32 डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि यहां पर करीब 100 डॉक्टरों की जरूरत है। हारकर मरीजों को चंडीगढ़ और दिल्ली का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
विभाग का इंकार, लगातार हो रही मौत
शुरू से अब तक स्वास्थ्य विभाग डेंगू से हुई मौत से इंकार करता आ रहा है। बावजूद इसके शहर में हर सप्ताह डेंगू से पीड़ितों के मरने का दौर जारी है। पूर्व मंत्री मीना मंडल समेत करीब 21 लोग इसकी भेंट चढ़ चुके हैं। हाल ही में घरौंडा के घनश्याम की डेंगू से मौत हो गई, जबकि दो दिन पहले काछवा के पाल नगर व विजय नगर और सुभाष कॉलोनी में तीन बच्चों की मौत डेंगू से हो चुकी है। सवाल यह है कि जब विभाग डेंगू से मौत से इंकार कर रहा है तो आखिर मौत किस बीमारी से हो रही हैं?
कोट
मेडिकल कॉलेज में डेंगू के इलाज के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। हमारे यहां 200 बेड हैं, लेकिन मरीज ज्यादा होने के कारण मजबूरी में मरीजों को दाखिल करना पड़ता है, इसलिए एक एक बेड पर दो-दो मरीज हो जाते हैं। इस समय करीब 350 मरीज दाखिल है, इसलिए समस्या पैदा हो जाती है। हो सकता है कि जैसी स्थिति हमारे पास है, वैसी ही निजी अस्पतालों में भी हो गई हो। इसलिए जरूरी है कि मच्छर न पनपने दें और खुद को हर हाल में मच्छरों से बचाएं। डेंगू से मौत की कोई रिपोर्ट हमारे पास नहीं आई है।
डॉ. योगेश शर्मा, पीएमओ, मेडिकल कॉलेज एवं आईएमए के प्रधान।