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Karnal News: वाल्मीकि बस्ती में अवैध मकानों पर चला एचएसवीपी का पीला पंजा, सात मकान ढहाए
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वाल्मीकि बस्ती में अवैध मकानों पर चला एचएसवीपी का पीला पंजा, सात मकान ढहाए
करीब 20 मकान मालिकों को सोमवार तक का अल्टीमेटम, कार्रवाई के दौरान अधिकारियों से हुई बहस
फोटो 68/69
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल।
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने शुक्रवार दोपहर बाद वाल्मीकि बस्ती में अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पीला पंजा चलाया। विभाग की टीम ने जेसीबी मशीन की मदद से करीब सात अवैध मकानों को ध्वस्त कर दिया। वहीं स्थानीय पार्षदों और पूर्व पार्षद के अनुरोध पर करीब 20 मकान मालिकों को सोमवार तक का अल्टीमेटम देकर कार्रवाई फिलहाल रोक दी गई। इन लोगों ने आश्वासन दिया कि वे सोमवार तक अपने मकानों से सामान निकालकर अन्य स्थान पर शिफ्ट कर लेंगे।
कार्रवाई के दौरान कुछ कब्जाधारी एचएसवीपी अधिकारियों से उलझते और बहस करते भी नजर आए। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए कार्रवाई जारी रखी।
पुलिस बल देर से मिलने के कारण देरी से शुरू हुई कार्रवाई -
बताया गया है कि विभाग की ओर से अवैध कब्जों पर कार्रवाई दोपहर करीब 12 बजे शुरू की जानी थी, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण कार्रवाई में देरी हो गई। बाद में पुलिस बल पहुंचने के बाद शाम करीब 3 बजे के बाद जेसीबी मशीनों के साथ टीम ने अभियान शुरू किया और अवैध निर्माणों को गिराया गया।
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2013 के सर्वे में मिले थे 259 अवैध निर्माण-
एचएसवीपी अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2013 में किए गए सर्वे के दौरान वाल्मीकि बस्ती क्षेत्र में कुल 259 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए थे। इसके बाद विभाग ने इन कब्जाधारियों को हटाकर उन्हें वैकल्पिक रूप से बसाने के लिए प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू की थी।
इस प्रक्रिया की जानकारी मिलने के बाद प्लॉट के लिए आवेदन करने वालों की संख्या बढ़कर करीब 350 तक पहुंच गई थी। जांच में सामने आया कि कई लोगों ने अधिक प्लॉट हासिल करने के उद्देश्य से अपने मौजूदा मकानों को दो-दो हिस्सों में विभाजित कर दिया था।
सेक्टर-4 के पास आवंटित किए गए प्लॉट-
विभाग की ओर से पात्र लोगों को सेक्टर-4 के पास प्लॉट आवंटित किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद भी सभी लोगों ने आवेदन नहीं किया। जानकारी के अनुसार कुल 238 लोगों ने ही प्लॉट के लिए आवेदन किया, जबकि जांच के दौरान दस्तावेजों में त्रुटि पाए जाने के कारण 12 आवेदनों को रद्द भी कर दिया गया था।
प्लॉट न मिलने से नाराज कुछ लोग कर रहे विरोध-
मौके पर मौजूद कुछ कब्जाधारियों का कहना था कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को तो प्लॉट मिल गए, लेकिन उन्हें आवंटन नहीं मिला। इसी कारण वे अपना कब्जा खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं और कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। यहां तक की लोगों ने यह भी कहा कि अब यह जमीन नगर निगम के अंतर्गत आता है तो इसे एचएसवीपी कैसे खाली करवा सकता है।
प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई-
अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए गए इस अभियान के दौरान एचएसवीपी के एसडीओ सुभाष, सुपरवाइजर भीम सिंह, जेई रजनीश, ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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करीब 20 मकान मालिकों को सोमवार तक का अल्टीमेटम, कार्रवाई के दौरान अधिकारियों से हुई बहस
फोटो 68/69
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल।
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने शुक्रवार दोपहर बाद वाल्मीकि बस्ती में अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पीला पंजा चलाया। विभाग की टीम ने जेसीबी मशीन की मदद से करीब सात अवैध मकानों को ध्वस्त कर दिया। वहीं स्थानीय पार्षदों और पूर्व पार्षद के अनुरोध पर करीब 20 मकान मालिकों को सोमवार तक का अल्टीमेटम देकर कार्रवाई फिलहाल रोक दी गई। इन लोगों ने आश्वासन दिया कि वे सोमवार तक अपने मकानों से सामान निकालकर अन्य स्थान पर शिफ्ट कर लेंगे।
कार्रवाई के दौरान कुछ कब्जाधारी एचएसवीपी अधिकारियों से उलझते और बहस करते भी नजर आए। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए कार्रवाई जारी रखी।
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पुलिस बल देर से मिलने के कारण देरी से शुरू हुई कार्रवाई -
बताया गया है कि विभाग की ओर से अवैध कब्जों पर कार्रवाई दोपहर करीब 12 बजे शुरू की जानी थी, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण कार्रवाई में देरी हो गई। बाद में पुलिस बल पहुंचने के बाद शाम करीब 3 बजे के बाद जेसीबी मशीनों के साथ टीम ने अभियान शुरू किया और अवैध निर्माणों को गिराया गया।
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2013 के सर्वे में मिले थे 259 अवैध निर्माण-
एचएसवीपी अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2013 में किए गए सर्वे के दौरान वाल्मीकि बस्ती क्षेत्र में कुल 259 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए थे। इसके बाद विभाग ने इन कब्जाधारियों को हटाकर उन्हें वैकल्पिक रूप से बसाने के लिए प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू की थी।
इस प्रक्रिया की जानकारी मिलने के बाद प्लॉट के लिए आवेदन करने वालों की संख्या बढ़कर करीब 350 तक पहुंच गई थी। जांच में सामने आया कि कई लोगों ने अधिक प्लॉट हासिल करने के उद्देश्य से अपने मौजूदा मकानों को दो-दो हिस्सों में विभाजित कर दिया था।
सेक्टर-4 के पास आवंटित किए गए प्लॉट-
विभाग की ओर से पात्र लोगों को सेक्टर-4 के पास प्लॉट आवंटित किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद भी सभी लोगों ने आवेदन नहीं किया। जानकारी के अनुसार कुल 238 लोगों ने ही प्लॉट के लिए आवेदन किया, जबकि जांच के दौरान दस्तावेजों में त्रुटि पाए जाने के कारण 12 आवेदनों को रद्द भी कर दिया गया था।
प्लॉट न मिलने से नाराज कुछ लोग कर रहे विरोध-
मौके पर मौजूद कुछ कब्जाधारियों का कहना था कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को तो प्लॉट मिल गए, लेकिन उन्हें आवंटन नहीं मिला। इसी कारण वे अपना कब्जा खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं और कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। यहां तक की लोगों ने यह भी कहा कि अब यह जमीन नगर निगम के अंतर्गत आता है तो इसे एचएसवीपी कैसे खाली करवा सकता है।
प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई-
अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए गए इस अभियान के दौरान एचएसवीपी के एसडीओ सुभाष, सुपरवाइजर भीम सिंह, जेई रजनीश, ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।