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पत्नी को गहनों से लादा, पुलिस ने उतरवाए
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
Updated Thu, 14 Apr 2016 12:40 AM IST
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एनडीआरआई
- फोटो : अमर उजाला
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एनडीआरआई में हुए गबन के मामले में मास्टरमाइंड सुखविंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब पूरे खेल के खुलासे की उम्मीद बंधी है। रिसर्च एसोसिएट के पद पर कार्यरत मुख्य आरोपी सुखविंद्र सिंह ने साथ में पीएचडी कर रही छात्रा मनप्रीत कौर से प्रेम प्रसंग हुआ। प्रेमिका से पत्नी बनाने में आरोपी ने सारी हदें लांघ दी और प्रोजेक्ट के पैसे से महंगे गिफ्ट दिए और शादी में 30 लाख रुपये के गहनों के साथ लाद दिया गया। अकेले सोने के जेवर नहीं, बल्कि महंगे से महंगे डायमंड के नैकलैस भी खरीदे।
पुलिस ने सुखविंद्र के कब्जे से 30 लाख रुपये के गहने बरामद किए हैं। मुख्य आरोपी सुखविंद्र सिंह की ठाठ बाट से संस्थान के अन्य कर्मचारी और अधिकारी भी हैरान थे। इनसे अधिक वेतन लेने वाले अफसर इतनी मौज मस्ती नहीं कर पा रहे थे, जितनी मौज आरोपी सुखविंद्र ले रहा था। गाड़ी में आना और ब्रांडेड कपड़े जूते पहनना कई बार साथ के कर्मचारियों को अखरता था।
आरोपी सुखविंद्र ने प्रेमिका को पत्नी बनाने में सालभर गबन करके 30 लाख रुपये गहने दिए और पुलिस ने एक माह में ही आरोपी की पत्नी मनप्रीत कौर से गहने उतरवाकर कब्जे में ले लिए हैं। अब सुखविंद्र के साथ पूरे परिवार की चिंता बढ़ गई है। गौरतलब है कि आडिट के दौरान मार्च माह में यह गड़बड़ी पकड़ी गई थी और उसी दौरान सुखविंद्र और मनप्रीत ने शादी कर ली थी और घूमने के लिए बाहर चले गए थे। बाद में संस्थान ने केस दर्ज कराया था।
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ऑडिट जांच में आरोपियों के खातों की रिपोर्ट
एनडीआरआई में विजिलेंस जांच अधिकारी डॉ. स्मिता सिरोही ने जो रिपोर्ट बनाई है, उसके मुताबिक सभी आरोपियों के निजी खातों में लाखों रुपये जमा है। आरोपी सुखविंद्र सिंह के अकाउंट में करीब 33 लाख, मनप्रीत कौर के खाते में करीब 37 लाख रुपये, सुखविंद्र के भाई विक्रम के खाते में करीब 45 लाख रुपये, अमरेंद्रा श्रीवास्तव के खाते में करीब आठ लाख रुपये, दीपक कुमार के खाते में करीब एक लाख रुपये जमा किये हुए मिले हैं। ऐसे में आशंका है कि ठगी का पैसा पांचों आरोपी आपस में बांट लेते थे। हालांकि, जांच का विषय यह भी है कि क्या ठगी का पैसा किसी अधिकारी और कर्मचारी के पास भी गया है या नहीं?
गड़बड़ पकड़े जाने के बाद संस्थान आया हरकत में
करोड़ों की गड़बड़ पकड़े जाने के बाद एनडीआरआई हरकत में आया है। आरोपियों को कंप्यूटर के पासवर्ड से लेकर कार्यालयों पर लगाए जाने वाले तालों की चाबियों का भी पता था। संस्थान ने कंप्यूटरों के पासवर्ड बदलकर उनके कार्यालयों के ताले भी बदल दिए। संस्थान के अधिकारियों पर इस गड़बड़ पर गाज गिरनी तय है और इसकी लिस्ट मुख्यालय जा चुकी है। इससे संस्थान के अधिकारी व कर्मचारी डरे हुए हैं।
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पुलिस ने सुखविंद्र के कब्जे से 30 लाख रुपये के गहने बरामद किए हैं। मुख्य आरोपी सुखविंद्र सिंह की ठाठ बाट से संस्थान के अन्य कर्मचारी और अधिकारी भी हैरान थे। इनसे अधिक वेतन लेने वाले अफसर इतनी मौज मस्ती नहीं कर पा रहे थे, जितनी मौज आरोपी सुखविंद्र ले रहा था। गाड़ी में आना और ब्रांडेड कपड़े जूते पहनना कई बार साथ के कर्मचारियों को अखरता था।
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आरोपी सुखविंद्र ने प्रेमिका को पत्नी बनाने में सालभर गबन करके 30 लाख रुपये गहने दिए और पुलिस ने एक माह में ही आरोपी की पत्नी मनप्रीत कौर से गहने उतरवाकर कब्जे में ले लिए हैं। अब सुखविंद्र के साथ पूरे परिवार की चिंता बढ़ गई है। गौरतलब है कि आडिट के दौरान मार्च माह में यह गड़बड़ी पकड़ी गई थी और उसी दौरान सुखविंद्र और मनप्रीत ने शादी कर ली थी और घूमने के लिए बाहर चले गए थे। बाद में संस्थान ने केस दर्ज कराया था।
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ऑडिट जांच में आरोपियों के खातों की रिपोर्ट
एनडीआरआई में विजिलेंस जांच अधिकारी डॉ. स्मिता सिरोही ने जो रिपोर्ट बनाई है, उसके मुताबिक सभी आरोपियों के निजी खातों में लाखों रुपये जमा है। आरोपी सुखविंद्र सिंह के अकाउंट में करीब 33 लाख, मनप्रीत कौर के खाते में करीब 37 लाख रुपये, सुखविंद्र के भाई विक्रम के खाते में करीब 45 लाख रुपये, अमरेंद्रा श्रीवास्तव के खाते में करीब आठ लाख रुपये, दीपक कुमार के खाते में करीब एक लाख रुपये जमा किये हुए मिले हैं। ऐसे में आशंका है कि ठगी का पैसा पांचों आरोपी आपस में बांट लेते थे। हालांकि, जांच का विषय यह भी है कि क्या ठगी का पैसा किसी अधिकारी और कर्मचारी के पास भी गया है या नहीं?
गड़बड़ पकड़े जाने के बाद संस्थान आया हरकत में
करोड़ों की गड़बड़ पकड़े जाने के बाद एनडीआरआई हरकत में आया है। आरोपियों को कंप्यूटर के पासवर्ड से लेकर कार्यालयों पर लगाए जाने वाले तालों की चाबियों का भी पता था। संस्थान ने कंप्यूटरों के पासवर्ड बदलकर उनके कार्यालयों के ताले भी बदल दिए। संस्थान के अधिकारियों पर इस गड़बड़ पर गाज गिरनी तय है और इसकी लिस्ट मुख्यालय जा चुकी है। इससे संस्थान के अधिकारी व कर्मचारी डरे हुए हैं।