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डीसी के दौरे के बाद भी काम बंद
करनाल
Updated Sat, 19 Apr 2014 12:37 AM IST
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य बंद होने की खबर
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प्रकाशित होने से प्रशासन के हाथ पांव फूल गए हैं। डीसी बलराज सिंह ने
शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज में पहुंचकर कार्यों का जायजा लिया।
डीसी उस जगह भी पहुंचे जहां पर काम बंद है, लेकिन काम चालू नहीं करा पाए। इस मामले को लेकर प्रमुख विपक्षी दलों के नेता भी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दे चुके हैं, वहीं जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय की ओर से कार्य को सुचारु रूप से चलने की बात कही गई।
जिले में मेडिकल कॉलेज प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है। इस पर करीब 640 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। एक कंपनी को करीब तीन करोड़ रुपये की पेमेंट न करने पर पिछले दो महीने से काम बंद पड़ा है। इस मुद्दे को ‘अमर उजाला’ ने 17 अप्रैल के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया है। अगले ही दिन भाजपा के प्रदेश मंत्री चंद्रप्रकाश कथूरिया ने मामले में पार्टी के पदाधिकारियों से बातचीत कर काम शुरू करवाने के लिए आंदोलन तक की चेतावनी दे डाली। इसके बाद शुक्रवार को डीसी बलराज सिंह भी निर्माण कार्य का जायजा लेने पहुंच गए।
मौके पर टीम गई तो काम बंद
डीसी बलराज सिंह ने शुक्रवार को दौरे के बाद मेडिकल कॉलेज का जोरों से काम चलने का दावा किया है, जबकि शुक्रवार दोपहर को ही ‘अमर उजाला’ टीम मौके पर पहुंची तो निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद था। मौके पर देखभाल करने वाले कर्मियों ने बताया कि शुरुआत के एक महीने ही तेजी से काम हुआ और उसके बाद काम गति नहीं पकड़ पाया। इस कारण लोहे का सरिया जंग लगकर गल रहा है और उसमें से घास उग रही है। निर्माण कार्य बंद होने से उसमें भी घास की परत बन गई है। मशीनगिरी बंद है। लेबर मौके से चली गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि कार्य बंद है।
250 में से सिर्फ 10 रह गए मजदूर
सुप्रीम कंपनी के कर्मचारी बताते हैं कि जब कार्य शुरू किया था उस वक्त करीब 250 मजदूर थे। महीने भर जोरों से काम चला। कई महीने कंपनी ने लेबर को पैसे देकर काम करवाया। दो महीने से लेबर की छुट्टी कर दी है। अब सिर्फ कंपनी के पास करीब 10 मजदूर रह गए हैं। कंक्रीट प्लांट सहित अन्य मशीनगिरी बंद है। एक माह से कर्मचारियों का वेतन भी रुका पड़ा है। कंपनी का जवाब आया है कि बिल पास होने के बाद ही पेमेंट कर पाएंगे।
निर्माण कार्य में लगी हैं तीन कंपनी
मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य पर तीन कंपनियां काम कर रही हैं। सुप्रीम कंपनी ने करीब 149 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य करने है। इसमें से करीब तीन करोड़ रुपये के कार्य हैं। इनके बिल लगाए, लेकिन पास नहीं हुए। इससे काम ठप है। अन्य दो कंपनियों का कार्य चल रहा है। जिस कंपनी ने काम बंद है उसको एनडीआरआई और सिविल अस्पताल की तरफ से काम करना है।
अच्छी हो निर्माण कार्य में लगने वाली सामग्री
डीसी बलराज सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में प्रयोग होने वाली सामग्री की क्वालिटी अच्छी हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य का जायजा लेते हुए, मेडिकल कॉलेज की ड्राइंग का अवलोकन भी किया। डीसी ने बताया कि सरकार के पास मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए पर्याप्त धन है। यह कॉलेज सभी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त होगा। उन्होंने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. पीयूष शर्मा से जानकारी ली कि प्रथम चरण का निर्माण कार्य कब पूरा होगा, जिसके उत्तर में डॉ. पीयूष शर्मा ने बताया कि प्रथम चरण में आवासीय कॉलोनी, सभागार आदि का कार्य तेजी से चल रहा है और यह कार्य जल्द ही पूरे हो जाएंगे। यह कॉलेज करीब 50 एकड़ जमीन में बनाया जाएगा।
कॉलेज का निर्माण निर्धारित समय पर ही पूरा होगा, इसके लिए निर्माण कार्य तेजी पर चल रहा है। डॉ. पीयूष ने डीसी को बताया कि कॉलेज के निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। कंपनियां अपना कार्य बखूबी निभा रही है और आने वाले कुछ ही माह में अधिकतर निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। जिला प्रशासन व कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों द्वारा निर्माण कार्यों पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
उधर, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में बंद पड़ा निर्माण कार्य और डीसी का दौरा अधिकारियों के लिए सिरदर्द बना रहा। डीसी के दौरे के बाद एक बार प्रशासन की ओर से मौके पर सही काम चलने की बात कही गई, लेकिन शाम को मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. पीयूष शर्मा ने दोबारा पत्रकारों से बात कर बताया कि मौके पर एक यूनिट का काम बंद पड़ा है।
डीसी उस जगह भी पहुंचे जहां पर काम बंद है, लेकिन काम चालू नहीं करा पाए। इस मामले को लेकर प्रमुख विपक्षी दलों के नेता भी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दे चुके हैं, वहीं जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय की ओर से कार्य को सुचारु रूप से चलने की बात कही गई।
जिले में मेडिकल कॉलेज प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है। इस पर करीब 640 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। एक कंपनी को करीब तीन करोड़ रुपये की पेमेंट न करने पर पिछले दो महीने से काम बंद पड़ा है। इस मुद्दे को ‘अमर उजाला’ ने 17 अप्रैल के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया है। अगले ही दिन भाजपा के प्रदेश मंत्री चंद्रप्रकाश कथूरिया ने मामले में पार्टी के पदाधिकारियों से बातचीत कर काम शुरू करवाने के लिए आंदोलन तक की चेतावनी दे डाली। इसके बाद शुक्रवार को डीसी बलराज सिंह भी निर्माण कार्य का जायजा लेने पहुंच गए।
मौके पर टीम गई तो काम बंद
डीसी बलराज सिंह ने शुक्रवार को दौरे के बाद मेडिकल कॉलेज का जोरों से काम चलने का दावा किया है, जबकि शुक्रवार दोपहर को ही ‘अमर उजाला’ टीम मौके पर पहुंची तो निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद था। मौके पर देखभाल करने वाले कर्मियों ने बताया कि शुरुआत के एक महीने ही तेजी से काम हुआ और उसके बाद काम गति नहीं पकड़ पाया। इस कारण लोहे का सरिया जंग लगकर गल रहा है और उसमें से घास उग रही है। निर्माण कार्य बंद होने से उसमें भी घास की परत बन गई है। मशीनगिरी बंद है। लेबर मौके से चली गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि कार्य बंद है।
250 में से सिर्फ 10 रह गए मजदूर
सुप्रीम कंपनी के कर्मचारी बताते हैं कि जब कार्य शुरू किया था उस वक्त करीब 250 मजदूर थे। महीने भर जोरों से काम चला। कई महीने कंपनी ने लेबर को पैसे देकर काम करवाया। दो महीने से लेबर की छुट्टी कर दी है। अब सिर्फ कंपनी के पास करीब 10 मजदूर रह गए हैं। कंक्रीट प्लांट सहित अन्य मशीनगिरी बंद है। एक माह से कर्मचारियों का वेतन भी रुका पड़ा है। कंपनी का जवाब आया है कि बिल पास होने के बाद ही पेमेंट कर पाएंगे।
निर्माण कार्य में लगी हैं तीन कंपनी
मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य पर तीन कंपनियां काम कर रही हैं। सुप्रीम कंपनी ने करीब 149 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य करने है। इसमें से करीब तीन करोड़ रुपये के कार्य हैं। इनके बिल लगाए, लेकिन पास नहीं हुए। इससे काम ठप है। अन्य दो कंपनियों का कार्य चल रहा है। जिस कंपनी ने काम बंद है उसको एनडीआरआई और सिविल अस्पताल की तरफ से काम करना है।
अच्छी हो निर्माण कार्य में लगने वाली सामग्री
डीसी बलराज सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में प्रयोग होने वाली सामग्री की क्वालिटी अच्छी हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य का जायजा लेते हुए, मेडिकल कॉलेज की ड्राइंग का अवलोकन भी किया। डीसी ने बताया कि सरकार के पास मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए पर्याप्त धन है। यह कॉलेज सभी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त होगा। उन्होंने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. पीयूष शर्मा से जानकारी ली कि प्रथम चरण का निर्माण कार्य कब पूरा होगा, जिसके उत्तर में डॉ. पीयूष शर्मा ने बताया कि प्रथम चरण में आवासीय कॉलोनी, सभागार आदि का कार्य तेजी से चल रहा है और यह कार्य जल्द ही पूरे हो जाएंगे। यह कॉलेज करीब 50 एकड़ जमीन में बनाया जाएगा।
कॉलेज का निर्माण निर्धारित समय पर ही पूरा होगा, इसके लिए निर्माण कार्य तेजी पर चल रहा है। डॉ. पीयूष ने डीसी को बताया कि कॉलेज के निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। कंपनियां अपना कार्य बखूबी निभा रही है और आने वाले कुछ ही माह में अधिकतर निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। जिला प्रशासन व कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों द्वारा निर्माण कार्यों पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
उधर, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में बंद पड़ा निर्माण कार्य और डीसी का दौरा अधिकारियों के लिए सिरदर्द बना रहा। डीसी के दौरे के बाद एक बार प्रशासन की ओर से मौके पर सही काम चलने की बात कही गई, लेकिन शाम को मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. पीयूष शर्मा ने दोबारा पत्रकारों से बात कर बताया कि मौके पर एक यूनिट का काम बंद पड़ा है।