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Karnal News: रेलवे पुल के पिलर धंसने का खतरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 09 Sep 2024 06:36 AM IST
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Danger of railway bridge pillars collapsing
- पश्चिमी यमुना नहर में कटाव दुरुस्त करने में जुटे अधिकारी, पानी का बहाव रोका
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पश्चिमी यमुना नहर में हुआ कटाव परेशानी बन गया है। पहले पानीपत व जगाधरी से पत्थर मंगवाकर दो जगह हुए कटाव को भर दिया गया था मगर इसके बाद पानी के तेज बहाव से रेलवे पुल के नीचे फर्श में भी कटाव हो गया है। जिससे रेलवे के अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है।
रेलवे के अधिकारी कई दिनों से कटाव को भरने का प्रयास कर रहे हैं। नहर में पानी का बहाव रोक दिया गया है। क्योंकि फर्श में हुए कटाव के कारण रेलवे पुल के पिलरों को खतरा है। मिट्टी में कटाव से पिलर धंस सकते हैं। जिससे हादसा भी हो सकता है।
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पश्चिमी यमुना नहर में पहला कटाव 27 अगस्त को हुआ था। तभी से विभाग के अधिकारी दिन-रात नहर के निर्माण का कार्य कर रहे हैं लेकिन पानी के तेज बहाव से परेशानी बढ़ गई है। पानी के कारण नहर में गहरे गड्ढे बन रहे हैं। जिस कारण नहर में पत्थरों से एक आड़ बनाई गई है ताकि पानी के आने से मिट्टी, रेत, कंकर आदि उन गड्ढों को भर दें और मिट्टी का कटाव न हो। अधिकारियों का कहना है कि आड़ का कार्य लगभग पूरा हो चुका है।
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आपूर्ति रोकी तो दिल्ली पर पड़ रहा असर
पश्चिमी यमुना नहर में कटाव के दौरान 12 हजार क्यूसेक पानी चल रहा था। उस दौरान अधिकारियों ने पानी कम कराया तो करीब पांच से छह क्यूसेक पानी नहर में रह गया। इसके बाद भी जब निर्माण कार्य में बाधा आने लगी तो नहर का फिर से पानी कम कराया गया। अब कई दिनों से पानी को बिल्कुल बंद कर दिया गया है। जिस कारण दिल्ली जाने वाले पानी पर असर पड़ा है। दिल्ली में अब पानी कम जा रहा है। इसको लेकर मुख्यालय से अधिकारी दौरा भी कर चुके हैं।


नहर के स्लैब की हो जांच
किसान मुकेश, नवीन, शमशेर आदि का कहना है कि पश्चिमी यमुना नहर का विभाग की ओर से 2021 में 202 करोड़ रुपये खर्च कर पुर्ननिर्माण कराया था। फिर भी नहर के स्लैब में कटाव हो गया। इसलिए अधिकारियों को चाहिए कि उन्हें पूरी नहर की स्लैब की जांच करनी चाहिए। ताकि अन्य जगह पर स्लैब न टूटे।




रेलवे पुल के नीचे फर्श को दुरुस्त करने का कार्य चल रहा है। नहर में जो आड़ बनाई गई है उसका कार्य भी पूरा हो चुका है। जल्द नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा।
- रणवीर सिंह, एक्सईएन, सिंचाई विभाग करनाल
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