फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Wires of skin-bone traders linked to another cowshed, Accused used to poison the cattle

Karnal: एक और गोशाला से जुड़े हड्डी-खाल के धंधेबाजों के तार, गोशाला में जाकर भी गोवंश को जहर देते थे आरोपी

Mon, 20 Feb 2023 01:20 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, करनाल
अमर उजाला ब्यूरो, करनाल Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 20 Feb 2023 01:20 AM IST
सार

आरोपी जुंडला की एक गोशाला में जाकर भी गोवंश को जहर देते थे। गिरफ्तार चार आरोपियों की रिमांड खत्म हो गया है। अब कोर्ट में पेश किया जाएगा।

विज्ञापन
Wires of skin-bone traders linked to another cowshed, Accused used to poison the cattle
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करनाल नगर निगम की गोशाला नंदी ग्राम में जाकर गोवंश को जहर देकर मारने, फिर मृत पशुओं को उठाकर ले जाने के बाद खाल व हड्डी बेचने के धंधेबाजों के तार जिले की एक और गोशाला से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। पूछताछ में आरोपियों ने इस बात का खुलासा किया है।

विज्ञापन


हालांकि पुलिस अभी तक धंधेबाजों के सरगना सहित प्रकाश में आए अन्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। दूसरी बार मिली रिमांड सोमवार को खत्म हो रही है। आरोपियों को न्यायालय में पेश करना होगा।
विज्ञापन


26 जनवरी को 45 गायों को जहर देकर मारने के चार आरोपियों को पुलिस ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया था। जो अब दूसरी बार चार दिन की रिमांड पर पुलिस के पास हैं। इनकी रिमांड सोमवार को पूरी हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीआईए-2 प्रभारी मोहन लाल व उनकी टीम आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है। अंबाला और शाहबाद में कई छापामारी के बाद भी फरार आरोपी गिरोह का सरगना अमित उर्फ अमर व अंबाला से जहर खरीदकर लाने के आरोपी विजय पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके हैं।

हालांकि इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा हैं। ये गिरोह हड्डी व खालों को जालंधर (पंजाब) में ले जाकर बेचते थे। एक नया खुलासा ये भी हुआ है कि इस गिरोह के सदस्य करनाल की नंदी ग्राम गोशाला के साथ साथ जुंडला की भी एक गोशाला में जाकर गोवंश को जहर देते थे। वहां से भी मृत पशुओं को उठाकर लाते थे। खास बात ये है कि ये खुलासा होने के बाद अभी तक जुंडला क्षेत्र की गोशाला में पूछताछ नहीं की गई है।

सबसे बड़ी बात ये भी है कि पुलिस की जांच में गोशाला कर्मियों की संलिप्तता को अभी तक क्लीनचिट दी गई है। जबकि लोगों के मन में ये सवाल है कि बिना गोशाला के किसी व्यक्ति की संलिप्तता के जहर देने से लेकर मृत पशुओं को उठाकर ले जाने तक की प्रक्रिया को अंजाम देना संभव नहीं लग रहा है।

दूसरी ओर लगातार नगर निगम व अन्य लोगों को द्वारा लावारिश पशुओं को गोशाला में पहुंचाया जाता था लेकिन गोशाला में आखिर ये पशु कहां चले जाते थे। इसका कोई रिकॉर्ड कहीं नहीं रखा गया। लाखों की धनराशि मिलने, बडृ़ी संख्या में दान मिलने के बावजूद गोवंश की देखभाल आखिर क्यों नहीं हुई, इस मामले में दोषियों के नाम अभी तक उजागर नहीं किए गए हैं।


नंदियों की मौत में एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार
उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने भले ही 11 फरवरी को 10 नंदियों की मौत के मामले को जांच में शामिल कर लिया हो लेकिन अभी उच्च स्तरीय कमेटी को भी एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार है। हालांकि एफएसएल को सैंपल भेजे हुए करीब एक सप्ताह हो चुका है लेकिन अभी रिपोर्ट नहीं मिल सकी है। इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed