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करनाल पुलिस ने अपने अपराधी हाथ आए न ही कुख्यात बदमाश
अमर उजाला/ब्यूरो/करनाल
Updated Fri, 06 Jan 2017 12:23 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दिसंबर माह के दो केस पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। दोनों ही केसों में पुलिस की टीमें अलग-अलग तरीके जांच भी कर रही हैं, लेकिन जांच दो कदम तक नहीं बढ़ पा रही है। एक तरफ क्राइम करने वाले आरोपी अपने ही विभाग के हैं तो दूसरी ओर एक गैंग के जुड़े सदस्य। दोनों ही केसों की फाइलें पुलिस की टेबल पर घूम रही हैं। दोनों ही मामलों को लेकर पुलिस पर लगातार दबाव भी है, समाज का भी और विभाग का भी, बावजूद इसके पुलिस की जांच एजेंसी कोई करामात नहीं कर पा रही हैं।
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हालांकि, तीन दिन पहले नये पुलिस कप्तान ने जिले की कमान संभाली है और दोनों ही मामलों को लेकर जांच अधिकारियों से विस्तार बात करके अपडेट ही है और केसों को साल्व करने के निर्देश दिये हैं, लेकिन देखना यह है कि पुलिस पहले कौन से केस को सुलझाती है अपने वालों या फिर अपराधियों वाला?
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केस नंबर-1
न आरोपी मिले और न ही 53.58 लाख रुपये
करनाल। सप्ताह पहले तरावड़ी थाना पुलिस द्वारा डिप्टी मेयर मनोज वधवा के अकाउंटेंट से 70 लाख रुपये बरामद करके 16.42 लाख रुपये दिखाने के मामले में पुलिस के पास कहने के लिए कुछ नहीं है। पुलिस न तो ये पता कर पाई कि शेष राशि किसके पास है, आरोपी पुलिस अधिकारी उसे ले गए या फिर डिप्टी मेयर। सवाल यह भी है कि अगर 70 लाख रुपये थे तो कितने रुपये में इन्हें कम दिखाने को लेकर सौदा हुआ था।
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गौरलब है कि 30 दिसंबर को तरावड़ी थाना प्रभारी व कबड्डी के खिलाड़ी जसमेर गुलिया ने तरावड़ी में मोहित पोपली के कब्जे से लाखों रुपये की संपत्। िबरामद की थी, हालांकि, पुलिस ने मात्र 16.42 लाख रुपये बरामदगी दिखाई थी। बाद में मामला उछला तो दो डीएसपी मामले की जांच के लिए पहुंचे। दोनों डीएसपी ने जांच में पाया कि मामला 70 लाख रुपये का था। इस पर डीएसपी विवेक चौधरी की शिकायत में थाना प्रभारी जसमेर गुलिया, एएसआई शिवचरण व एएसआई जितेंद्र के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ था।
जांच डीएसपी जितेंद्र गहलावत को सौंपी गई थी। अभी तक डीएसपी की जांच में कुछ भी नहीं हो पाया है। सप्ताह बीत जाने के बाद भी न तो डिप्टी मेयर पुलिस की जांच में शामिल हो पाए हैं और न ही आरोपी इंस्पेक्टर व दोनों एएसआई। हालांकि, इन दोनों ही मामले में नए एसपी जेएस रंधावा कह चुके हैं कि पुलिस टीमें गंभीरता से केंसों की जांच कर रही हैं। वहीं, जांच अधिकारी डीएसपी जितेंद्र गहलावत का कहना है कॎ जांच के बाद ही इस बात का खुलासा हो सकेगा कि पैसे कितने थे और किसके पास शेष राशि है। अभी जांच चल रही है। बरामद की गई राशि आयकर विभाग के हवाले की गई थी।
इन सवालों का जवाब मांग रहा शहर
अगर 70 लाख रुपये नहीं थे तो बिना तथ्यों के डीएसपी ने केस दर्ज क्यों कराया? -अगर 70 लाख रुपये थे तो शेष राशि किसके पास है, इंस्पेक्टर या फिर डिप्टी मेयर के पास?, सप्ताह बितने पर भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई, न ही डिप्टी मेयर से पूछताछ, क्यों? इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारी कुछ भी बोलने से क्यों कतरा रहे हैं?
जांच के बारे में कुछ नहीं बता सकते
प्रारंभिक जांच में 70 लाख रुपये की पुख्ता बात सामने आई थी, इसके बाद ही आरोपियों के खिलाफ शिकायत दी गई थी। 70 लाख की बात पुख्ता होने के बाद ही केस रजिस्टर्ड हुआ है। शेष राशि किसके पास है या फिर कहां गई यह जांच का हिस्सा है। इस मामले की जांच डीएसपी जितेंद्र गहलावत कर रहे हैं, जांच के बारे में वे ही कुछ बता सकते हैं।
-विवेक चौधरी, सिटी डीएसपी।
केस नंबर-2
एक माह बीता, न इनामी बदमाश मिला और न ही उसके गुर्गे
8 दिसंबर को सरेआम ब्रह्मानंद चौक पर एक गाड़ी में सवार सात दोस्तों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई, इसमे शिव कालोनी निवासी नरेश, गुलाब वासी बस्तली व राजेश वाली जाणी की हत्या कर दी गई, जबकि चांद व मनोज को गोली लगी थी। इस मामले में सिटी थाना में कप्तान निवासी रंगरुटीखेड़ा समेत अन्य पर केस दर्ज हैं। पुलिस मानती है कि इस हत्याकांड में सोनीपत व रोहतक के गैंग के सदस्य भी शामिल हैं।
एक माह बीत जाने के बाद भी पुलिस मात्र उन चार युवकों को काबू कर पाई है, जिन्होंने नरेश व उसके दोस्तों की मुखबरी की थी। सीआईए समेत अन्य टीमें इस मामले में कई जगह छापामारी कर चुकी हैं, लेकिन पुलिस कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। मामला बड़ा होने के कारण डीजीपी ने कप्तान पर 50 हजार रुपये इनाम भी रखा था, लेकिन करनाल पुलिस के हाथ यह न तो इनामी बदमाश हाथ लग पाया और न ही उसके गुर्गे। इस मामले में मृतकों के परिजन कई बार पुलिस से मिल चुके हैं और सुरक्षा की गुहार लगाने के साथ-साथ हत्यारोपियों को पकड़ने की गुहार लगा चुके हैं। फिलहाल इस मामले में पुलिस के पास बताने के लिए कुछ खास नहीं है।
यूपी, दिल्ली समेत कई प्रदेशों में दे चुके दबिश
कप्तान व उसके गुर्गों की गिरफ्तारी को लेकर करनाल पुलिस दिल्ली, यूपी व अन्य प्रदेशों में दबिशें दे चुकी है। पुलिस कई बार दावा कर चुकी है कि बदमाशों के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है। वहीं, पुलिस ने इसी मामले में रोहतक और सोनीपत भी छापामारी की थी। तत्कालीन एसपी पंकज नैन ने बताया कि इस हत्याकांड में सोनीपत और रोहतक के बदमाशों के नाम भी सामने आए हैं, जो पहले ही दोनों जिलों में मोस्टवांटेड हैं।