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Karnal News: दो साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दिए जाएंगे कफ सीरप

Mon, 06 Oct 2025 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Mon, 06 Oct 2025 12:43 AM IST
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Cough syrups will not be given to children under two years of age.
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सीरप से हुई मौतों के बाद करनाल में भी स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है। जिले में दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सीरप नहीं दिए जाएंगे। जिन कफ सीरप से मौतें हुई हैं वह करनाल में नहीं दिए जा रहे हैं। आगे भी उनके इस्तेमाल के लिए स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी जारी की है। सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में करीब 14 बच्चों की मौत होने के बाद तमिलनाडु स्थित श्रीसन फार्मा और जयपुर स्थित कायसन फार्मा के सीरपों और अन्य उत्पादों पर बिक्री और उत्पादन पर रोक लगा दी गई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने इन कंपनियों की निर्माण इकाइयों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 11 और राजस्थान में 3 बच्चों की मौत हुई। बुखार और जुकाम से पीड़ित बच्चों को सीरप दिया गया था, जिसके बाद किडनी में गंभीर संक्रमण और मौतें हुईं। तमिलनाडु में बने कोल्ड्रिफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल डीईजी का स्तर अनुमत सीमा (0.1%) से अधिक 48.6% पाया गया, जो बेहद विषाक्त रसायन है।
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केंद्रीय एडवाइजरी के तहत बैन हुए कफ सीरप
- डेक्सट्रोमेथरोन हाईड्रोब्रोमाइड सिरप आईपी 30 एमएल, बैच नंबर केएल-25/148
- फिनाईलफिराइन एचसीआई, क्लोरफेनाइरामाइन मेलिआटे सिरप कॉल्डसिफ, बैच नंबर एसआर-13

जिले में ये सीरप पहले भी बच्चों को नहीं दिए जा रहे थे। आगे भी किसी बच्चे को नहीं दिए जाएंगे। बच्चों की सुरक्षा के लिए सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। माता-पिता से अपील की गई है कि इन सीरप का प्रयोग न करें। इस विषय पर सख्त निगरानी और अलर्ट जारी है। किसी भी फार्मेसी या स्वास्थ्य केंद्र पर इन सिरपों का वितरण पाए जाने पर तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। -विकास राठी, जिला औषधि निरीक्षक, करनाल
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डॉक्टर तो सिर्फ दवा की नाम लिखते हैं
कफ सीरप हो या कोई अन्य दवा, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित सभी राजकीय अस्पतालों में तो अधिकृत दवा विक्रेताओं से ही दवा खरीदी जाती हैं। जिसका बाकायदा बिल होता है। जहां तक डॉक्टरों की बात है तो डॉक्टर तो सिर्फ दवाई लिखते हैं। अब उसमें अंदर क्या है, ये तो डॉक्टर तय नहीं कर सकते। -डॉ. एमके गर्ग, निदेशक कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल
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