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गन्ना विकास में सहकारी चीनी मिल करनाल देश में अव्वल
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जिले की सहकारी चीनी मिल एक बार फिर गन्ना विकास के मामले में देश में नंबर-वन रही है। चीनी मिल को राष्ट्रीय स्तर पर पेराई सत्र 2019-20 के लिए 27-28 मार्च 2021 को राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल प्रसंघ नई दिल्ली द्वारा गुजरात के वड़ोदरा में होने वाले पुरस्कार वितरण समारोह में सम्मानित किया जाएगा। अब तक चीनी मिल राष्ट्रीय स्तर पर 20 पुरस्कार हासिल कर चुकी है।
उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि करनाल चीनी मिल की स्थापना 1976-77 में हुई। पहला पेराई सत्र जनवरी 1977 से शुरू किया हुआ था। शुरू में पेराई क्षमता 1250 टीसीडी थी, लेकिन अब बढ़कर 2200 टीसीडी कर दी गई है। चीनी मिल ने वर्ष 2020-21 के लिए 35 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य रखा है। अब तक 21.90 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई करके 10 प्रतिशत रिकवरी प्राप्त की है। वहीं दो लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। इस वर्ष मिल ने 479.58 लाख रुपये की गन्ना विकास योजना तैयार की है। इसमें 58.14 लाख रुपये की सब्सिडी व 421.44 लाख ब्याज रहित ऋण पर खर्च किए जाएंगे। इस वर्ष मिल एरिया में गन्ने का क्षेत्रफल 20165 एकड़ है। इसमें 99 प्रतिशत अगेती किस्मों का गन्ना है। मिल के 32 किमी क्षेत्र में आने वाले 232 गांवों में से 135 गांवों में गन्ने की खेती होती है। चीनी मिल को पेराई सत्र 2001-02 और 2010-11 में अच्छी कार्य कुशलता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट कोपरेटिव शुगर फैक्ट्री का और पेराई सत्र 2012-13 से लगातार 2017-18 तक गन्ना विकास में 5 बार प्रथम और एक बार द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। तकनीकि व वित्तीय प्रबंधन के लिए भी दो-दो बार राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार हासिल किया है।
-करनाल चीनी मिल में राज्य टिशू कल्चर लैब की स्थापना की गई है, जिसमें गन्ने की उत्तम किस्में तैयार करके किसानों को कम कीमत पर दी जा रही हैं। बीमारी रहित बीज मिलने से उत्पादन बढ़ता है। किसानों के लिए आधुनिक कैंटीन भी बनाई गई है। यहां खाने पीने सोने की व्यवस्था के साथ मनोरंजन के लिए एक बड़ी एलसीडी भी लगाई गई है। ट्रालियों के लिए एक नया यार्ड भी बनाया गया है। अटल मजदूर किसान कैंटीन भी खोली गई है, जिसमें किसानों व मजदूरों को दस रुपये में शुद्ध भोजन उपलब्ध है। 6 नए व आधुनिक शौचालय बनाए गए हैं।
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-अदिति, महाप्रबंधक सहकारी चीनी मिल करनाल।
-नए मिल की स्थापना पर 260 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इस नए प्लांट का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जिसका ट्रायल मार्च के अंतिम सप्ताह में होगा। इसकी पेराई क्षमता 35000 क्विंटल प्रतिदिन होगी। जिसे बाद मेें 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन किया जाएगा। नए मिल से 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। मिल खर्च के अलावा शेष बिजली को बेचा जाएगा। नए मिल में रिफाइंड चीनी का उत्पादन भी किया जाएगा।
-निशांत कुमार यादव, उपायुक्त करनाल।
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उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि करनाल चीनी मिल की स्थापना 1976-77 में हुई। पहला पेराई सत्र जनवरी 1977 से शुरू किया हुआ था। शुरू में पेराई क्षमता 1250 टीसीडी थी, लेकिन अब बढ़कर 2200 टीसीडी कर दी गई है। चीनी मिल ने वर्ष 2020-21 के लिए 35 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य रखा है। अब तक 21.90 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई करके 10 प्रतिशत रिकवरी प्राप्त की है। वहीं दो लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। इस वर्ष मिल ने 479.58 लाख रुपये की गन्ना विकास योजना तैयार की है। इसमें 58.14 लाख रुपये की सब्सिडी व 421.44 लाख ब्याज रहित ऋण पर खर्च किए जाएंगे। इस वर्ष मिल एरिया में गन्ने का क्षेत्रफल 20165 एकड़ है। इसमें 99 प्रतिशत अगेती किस्मों का गन्ना है। मिल के 32 किमी क्षेत्र में आने वाले 232 गांवों में से 135 गांवों में गन्ने की खेती होती है। चीनी मिल को पेराई सत्र 2001-02 और 2010-11 में अच्छी कार्य कुशलता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट कोपरेटिव शुगर फैक्ट्री का और पेराई सत्र 2012-13 से लगातार 2017-18 तक गन्ना विकास में 5 बार प्रथम और एक बार द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। तकनीकि व वित्तीय प्रबंधन के लिए भी दो-दो बार राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार हासिल किया है।
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-करनाल चीनी मिल में राज्य टिशू कल्चर लैब की स्थापना की गई है, जिसमें गन्ने की उत्तम किस्में तैयार करके किसानों को कम कीमत पर दी जा रही हैं। बीमारी रहित बीज मिलने से उत्पादन बढ़ता है। किसानों के लिए आधुनिक कैंटीन भी बनाई गई है। यहां खाने पीने सोने की व्यवस्था के साथ मनोरंजन के लिए एक बड़ी एलसीडी भी लगाई गई है। ट्रालियों के लिए एक नया यार्ड भी बनाया गया है। अटल मजदूर किसान कैंटीन भी खोली गई है, जिसमें किसानों व मजदूरों को दस रुपये में शुद्ध भोजन उपलब्ध है। 6 नए व आधुनिक शौचालय बनाए गए हैं।
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-अदिति, महाप्रबंधक सहकारी चीनी मिल करनाल।
-नए मिल की स्थापना पर 260 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इस नए प्लांट का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जिसका ट्रायल मार्च के अंतिम सप्ताह में होगा। इसकी पेराई क्षमता 35000 क्विंटल प्रतिदिन होगी। जिसे बाद मेें 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन किया जाएगा। नए मिल से 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। मिल खर्च के अलावा शेष बिजली को बेचा जाएगा। नए मिल में रिफाइंड चीनी का उत्पादन भी किया जाएगा।
-निशांत कुमार यादव, उपायुक्त करनाल।