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समाज की रक्षा करना पुलिस और जनप्रतिनिधि का दायित्व : डीजीपी
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
Updated Tue, 21 Jun 2016 12:25 AM IST
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सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
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पुलिस महानिदेशक डॉ. केपी सिंह ने सोमवार को जिलेभर के पंच, सरपंच और पार्षदों को कहानियों, इतिहास, साहित्य और अनुभव के माध्यम से पंचों और पुलिस की जिम्मेदारियों का अहसास कराया। इसके साथ ही उन्होंने सभी का आह्वान भी किया कि वे सच को सच कहने की कुव्वत रखें, ताकि पीड़ित के साथ न्याय हो सके। समाज की रक्षा करना, अपराध मुक्त रखना और भाईचारा कायम रखना जनप्रतिनिधियों और पुलिस दोनों का दायित्व है।
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मधुबन पुलिस कांपलेक्स के डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में पंचायती राज में पुलिस की भूमिका विषय पर हुए सम्मेलन में डीजीपी ने 45 मिनट तक जनप्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की पंच परमेश्वर कहानी सुनाई तो महाभारत से तालाब पर पांडवों से यक्ष द्वारा पूछे गए सवालों का भी जिक्र किया।
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आंदोलन के दौरान बिगड़े भाईचारे को दोबारा से कायम करने का आह्वान करते हुए डीजीपी ने कहा कि कुछ लोग भाईचारा बिगाड़ने का काम कर रहे हैं, लेकिन हमें किसी के बहकावे में नहीं आना है। समाज के ताने बाने को जोड़े रखना है।
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गांवों के परिवेष पर डा. केपी सिंह ने कहा कि गांवों में अक्सर से काफी संख्या में लोग ताश खेलते मिल जाते हैं, इस कारण ही बेरोजगारी है व अन्य समस्याएं है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस बार तीन हजार पूर्व सैनिक पुलिस में भर्ती करने थे, लेकिन केवल 2200 ही आए, अन्य सीटें खाली रह गई।
इसका कारण है कि लोग गांव नहीं छोड़ना चाहते हैं। डीजीपी ने भरे सभागार में आंदोलनों के दौरान पेड़ काटने पर बड़ा दुख जताया। उन्होंने कहा कि आखिर पेड़ों ने किसी का क्या बिगाड़ा है, क्यों लोग ऐसा करते हैं? इस मौके पर मधुबन कांप्लेक्स के केक सिंधु, आईजी सुमन मंजरी, आईजी सुभाष यादव, रोहतक रेंज के आईजी संजय कुमार, गुड़गांव के पुलिस कमिश्नर नवदीप सिंह विर्क, आईजी सीआईडी संदीप खिरवार, डीआईजी शिबास कविराज, एसपी पंकज नैन समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
जनप्रतिनिधि बोले, थानों में मिले सम्मान
वहीं, सम्मेलन में जिला पार्षद अशोक मित्तल ने कहा कि थानों में पुलिस को अपना व्यवहार बदलने की जरूरत है। थानों में जन प्रतिनिधियों को उचित मान सम्मान मिले, ताकि वे पुलिस का सहयोग कर सकें। अक्सर थानों में पुलिस का व्यवहार कड़वा होता है, इससे लोग उनसे कट जाते हैं। वहीं, गांव गोंदर के सरपंच देवेंद्र राणा ने कहा कि दहेज हत्या के मामले में पुलिस पूरे परिवार पर केस दर्ज कर देती है, जबकि उनमें से सभी का कसूर नहीं होता। ऐसे मामलों में पुलिस को विवेक से काम लेना चाहिए। दोनों ही जनप्रतिनिधियों की बातों को डीजीपी ने कहा कि वे इस पर सुधार कराएंगे।
डीजीपी के भाषण की अहम बातें
- खुद सकारात्मक रहें और अपने बच्चों को पॉजीटिव सोच पैदा करें
- बच्चों को धरने प्रदर्शन के लिए न भेजें-बेटी को बचाने और पढ़ाने के लिए आगे आएं
- नशे के खिलाफ आवाज उठाएं।
- एसएचओ व एसपी न सुनें तो सीधे डीजीपी के नंबर 9416004464 पर करें मैसेज
- गांवों से निकलें और रोजगार के नए तरीके अपनाएं
- बिजली बिल भरें, और बाहर मीटर लगाने का विरोध न करें,
- कोई ऐसी प्रतिज्ञा न करें, जिससे देश का नुकसान हो
- कोई ऐसी जिद न करें, जिसे लांघा न जा सके।
- दुख के कारण-जिद, जुर्म और जायदाद।
- महिलाओं का सम्मान करें, नहीं तो विनाश।
- सम्मेलन में महिला सरपंचों की संख्या कम रही
नशे की चपेट में आ रहे युवा
डीजीपी ने कहा कि करनाल में नशे का कारोबार बढ़ रहा है, चंद लोग पूरे समाज को गंदा कर रहे हैं, ऐसे लोगों की पहचान करके उनको पकड़वाया जाए। पहले करनाल में भुक्की का नशा होता था, लेकिन अब यहां पर स्मैक और दूसरे नशे होने लगे हैं। इसलिए इस पर रोक लगाने के लिए भी जनप्रतिनिधियों को आगे आना होगा, तभी हमारी पीढ़ी बच सकती है। दुखद है कि युवा अब इसकी चपेट में आ रहे हैं।
मैंने दबाव झेला, लेकिन आज मुझे गर्व है
डीजीपी ने बताया कि करीब 25 साल पहले जब वे एसपी थे तो पहली बेटी के बाद उनकी पत्नी गर्भवती थी। उस समय ही लिंग जांच की मशीनें आई थी। परिवार, रिश्तेदार और समाज का काफी दबाव झेला, लेकिन लिंग जांच नहीं कराई। आज मेरी दो बेटियां हैं और मुझे दोनों बेटियों पर गर्व है। उन्होंने जन प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे भी बेटियों के लिए आगे आएं और कन्या भ्रूण हत्या जैसे महापाप से बचें।