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Karnal News: दूषित सूई दे रही बीमारी, पांच वर्षों में एचआईवी के 1415 मरीज
Mon, 01 Dec 2025 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 01 Dec 2025 02:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दूषित सूई एड्स की बीमारी दे रही है। नशीली पदार्थों के प्रयोग के लिए इंजेक्शन लेने वाले युवाओं में बीमारी अधिक मिल रही है। हालांकि असुरक्षित यौन संबंध भी इसका बड़ा कारण हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ाें के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में अक्तूबर 2021 से 2025 तक 1,96,573 लोगों की जांच में 1,415 एचआईवी पॉजिटिव केस सामने आए। युवाओं और किशोरों के बीच संक्रमण तेजी से फैल रहा है
पिछले पांच वर्षों में हुए टेस्ट में 0-14 वर्ष के बच्चों से लेकर 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग पॉजिटिव पाए गए। 1415 मरीजों में पुरुष, महिलाएं, किशोर और ट्रांसजेंडर शामिल हैं। गर्भवती महिलाओं का आंकड़ा भी चिंता बढ़ाता है। इनमें 86 महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव मिली हैं। जिला नागरिक अस्पताल के एआरटी सेंटर में फिलहाल 1994 मरीज इलाज और काउंसलिंग ले रहे हैं।
24 जगह पर नि:शुल्क जांच की सुविधा
जिले में जागरूकता बढ़ाने के लिए 1500 से अधिक जागरूकता शिविर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं बावजूद इसके संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं, छह जगह नागरिक अस्पताल, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, असंध, घरौंडा, इंद्री और नीलोखेड़ी में आईसीटीसी सेंटर चल रहे हैं। जिले में 24 जगह शिव कॉलोनी, रामनगर, इंदिरा कॉलोनी, डीटीसी करनाल, धोबी मोहल्ला, वसंत विहार, बल्ला, सालवन, उपलाना, जुंडला, पोपड़ा, बरसत, कुटेल, चौरा, गगसीना, खुखनी, भादसो, मधुबन, काछवा, तरावड़ी, सग्गा, बडौता, सांभली व निसिंग में एफआईसीटीसी सेंटर चल रहे हैं। जिनमें नि:शुल्क जांच सुविधा मरीजों को दी जा रही है।
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जागरूकता ही इसका बचाव
उप-जिला सिविल सर्जन व नोडल अधिकारी डॉ. मुनीष ने बताया कि एड्स लाइलाज बीमारी है, लेकिन जागरूकता ही इसका बचाव है। असुरक्षित यौन संबंध, अशुद्ध रक्त का चढ़ाया जाना, दूषित सुइयों व सिरिंज का प्रयोग और संक्रमित गर्भवती मां से जन्म लेने वाले बच्चे या स्तनपान कराने से यह बीमारी फैलती है। एचआईवी संक्रमण को रोकने का एकमात्र तरीका लोगों में जागरूकता है। इसे ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की चलाया जा रहा है।
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करनाल। दूषित सूई एड्स की बीमारी दे रही है। नशीली पदार्थों के प्रयोग के लिए इंजेक्शन लेने वाले युवाओं में बीमारी अधिक मिल रही है। हालांकि असुरक्षित यौन संबंध भी इसका बड़ा कारण हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ाें के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में अक्तूबर 2021 से 2025 तक 1,96,573 लोगों की जांच में 1,415 एचआईवी पॉजिटिव केस सामने आए। युवाओं और किशोरों के बीच संक्रमण तेजी से फैल रहा है
पिछले पांच वर्षों में हुए टेस्ट में 0-14 वर्ष के बच्चों से लेकर 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग पॉजिटिव पाए गए। 1415 मरीजों में पुरुष, महिलाएं, किशोर और ट्रांसजेंडर शामिल हैं। गर्भवती महिलाओं का आंकड़ा भी चिंता बढ़ाता है। इनमें 86 महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव मिली हैं। जिला नागरिक अस्पताल के एआरटी सेंटर में फिलहाल 1994 मरीज इलाज और काउंसलिंग ले रहे हैं।
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24 जगह पर नि:शुल्क जांच की सुविधा
जिले में जागरूकता बढ़ाने के लिए 1500 से अधिक जागरूकता शिविर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं बावजूद इसके संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं, छह जगह नागरिक अस्पताल, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, असंध, घरौंडा, इंद्री और नीलोखेड़ी में आईसीटीसी सेंटर चल रहे हैं। जिले में 24 जगह शिव कॉलोनी, रामनगर, इंदिरा कॉलोनी, डीटीसी करनाल, धोबी मोहल्ला, वसंत विहार, बल्ला, सालवन, उपलाना, जुंडला, पोपड़ा, बरसत, कुटेल, चौरा, गगसीना, खुखनी, भादसो, मधुबन, काछवा, तरावड़ी, सग्गा, बडौता, सांभली व निसिंग में एफआईसीटीसी सेंटर चल रहे हैं। जिनमें नि:शुल्क जांच सुविधा मरीजों को दी जा रही है।
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जागरूकता ही इसका बचाव
उप-जिला सिविल सर्जन व नोडल अधिकारी डॉ. मुनीष ने बताया कि एड्स लाइलाज बीमारी है, लेकिन जागरूकता ही इसका बचाव है। असुरक्षित यौन संबंध, अशुद्ध रक्त का चढ़ाया जाना, दूषित सुइयों व सिरिंज का प्रयोग और संक्रमित गर्भवती मां से जन्म लेने वाले बच्चे या स्तनपान कराने से यह बीमारी फैलती है। एचआईवी संक्रमण को रोकने का एकमात्र तरीका लोगों में जागरूकता है। इसे ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की चलाया जा रहा है।