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Karnal News: अस्पताल के भवन का लटका निर्माण
Fri, 29 Nov 2024 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 29 Nov 2024 02:23 AM IST
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गौतम जोशी
नीलोखेड़ी। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के नाम पर बन रहे उपमंडल अस्पताल ने नए भवन अधर में लटका निर्माण कार्य लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन रहा है। नए भवन का निर्माण करने के लिए पुराने भवन का एक हिस्सा भी तोड़ दिया है। इससे चिकित्सकों के बैठने और मरीजों को उपचार के लिए दाखिल करने में अस्पताल प्रबंधन के पसीने छूट जाते हैं।
आलम ये है कि एक ही बेड पर कई मरीजों बैठाकर उपचार किया जाता है। पिछले करीब ढाई वर्ष से रुका निर्माण कार्य स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार के दावे की हवा निकाल रहा है। पूर्व विधायक धर्मपाल गोंदर के अनुसार निर्माण कार्य शुरू करवाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर सरकार और मुख्यमंत्री तक दर्जनों बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
वहीं सरकार गठन को दो माह बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होने से लोगों में रोष पनप रहा है। क्योंकि जीटी रोड के नजदीक स्थित होने के कारण दुर्घटनाओं आदि में घायल होने वाले ज्यादातर लोगों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाता है। संसाधनों की कमी के चलते स्थानीय इमरजेंसी इलाज की बजाए रेफर केंद्र बनकर रह गया है।
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वर्ष 2019 में लोस व विस चुनावों से ठीक पहले 10 सितंबर 2018 को पूर्व विधायक भगवानदास कबीरपंथी ने अस्पताल के पहले चरण का निर्माण कार्य चालू कराया था। लगभग 6.80 करोड़ रुपये की लागत से 60 हजार वर्ग फुट में बनने वाले इस चार मंजिला भवन का निर्माण कार्य 18 महीने में पूरा होना था। छह साल बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। भगवानदास कबीरपंथी के पुन: विधायक बनने से लोगों में आस जगी है कि अस्पताल का निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा।
निजी अस्पताल में कराते हैं अल्ट्रासाउंड : भवन निर्माण कार्य अधर में लटकने से उपमंडल का दर्जा पाने बाद भी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा नहीं है। इससे लोगों निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों जाना पड़ रहा है। वहीं हड्डियों के डॉक्टर, सर्जन, फिजिशियन और नेत्र चिकित्सक न होने के कारण लोगों को करनाल जाना पड़ता है।
अस्पताल में एक्सरे सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहने से लोगों को इसका लाभ भी मिल रहा है। दांतों का एक्सरे न होने के कारण लोगों को निजी डॉक्टरों के पास जेब ढीली करनी पड़ती है। संवाद
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नीलोखेड़ी। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के नाम पर बन रहे उपमंडल अस्पताल ने नए भवन अधर में लटका निर्माण कार्य लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन रहा है। नए भवन का निर्माण करने के लिए पुराने भवन का एक हिस्सा भी तोड़ दिया है। इससे चिकित्सकों के बैठने और मरीजों को उपचार के लिए दाखिल करने में अस्पताल प्रबंधन के पसीने छूट जाते हैं।
आलम ये है कि एक ही बेड पर कई मरीजों बैठाकर उपचार किया जाता है। पिछले करीब ढाई वर्ष से रुका निर्माण कार्य स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार के दावे की हवा निकाल रहा है। पूर्व विधायक धर्मपाल गोंदर के अनुसार निर्माण कार्य शुरू करवाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर सरकार और मुख्यमंत्री तक दर्जनों बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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वहीं सरकार गठन को दो माह बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होने से लोगों में रोष पनप रहा है। क्योंकि जीटी रोड के नजदीक स्थित होने के कारण दुर्घटनाओं आदि में घायल होने वाले ज्यादातर लोगों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाता है। संसाधनों की कमी के चलते स्थानीय इमरजेंसी इलाज की बजाए रेफर केंद्र बनकर रह गया है।
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वर्ष 2019 में लोस व विस चुनावों से ठीक पहले 10 सितंबर 2018 को पूर्व विधायक भगवानदास कबीरपंथी ने अस्पताल के पहले चरण का निर्माण कार्य चालू कराया था। लगभग 6.80 करोड़ रुपये की लागत से 60 हजार वर्ग फुट में बनने वाले इस चार मंजिला भवन का निर्माण कार्य 18 महीने में पूरा होना था। छह साल बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। भगवानदास कबीरपंथी के पुन: विधायक बनने से लोगों में आस जगी है कि अस्पताल का निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा।
निजी अस्पताल में कराते हैं अल्ट्रासाउंड : भवन निर्माण कार्य अधर में लटकने से उपमंडल का दर्जा पाने बाद भी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा नहीं है। इससे लोगों निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों जाना पड़ रहा है। वहीं हड्डियों के डॉक्टर, सर्जन, फिजिशियन और नेत्र चिकित्सक न होने के कारण लोगों को करनाल जाना पड़ता है।
अस्पताल में एक्सरे सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहने से लोगों को इसका लाभ भी मिल रहा है। दांतों का एक्सरे न होने के कारण लोगों को निजी डॉक्टरों के पास जेब ढीली करनी पड़ती है। संवाद