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कृषि भूमि के दाम 15 लाख रुपये प्रति एकड़, घर का सपना भी 50 प्रतिशत महंगा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Aug 2019 01:45 AM IST
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collector rate
लोकसभा चुनाव के बाद और विधानसभा चुनाव से पहले करनाल में पहली बार कलेक्टर रेट रिवाइज हुआ है। इस बार जमीनों के दाम सिर्फ बढ़ाए हैं। किसी भी क्षेत्र में रेट घटाकर लोगों को राहत नहीं दी गई है। सबसे ज्यादा एग्रीकल्चर लैंड के दामों में 15 लाख रुपये प्रति एकड़ तक उछाल आया है। इधर 10 से ज्यादा कॉलोनियों में आवासीय जमीन के 50 प्रतिशत तक दाम बढ़ने से अपने घर का सपना भी महंगा होता दिखाई दे रहा है। जबकि कामर्शियल लैंड के भी 20 प्रतिशत तक दाम बढ़े हैं। हालांकि कई जगहों पर जमीन के रेट में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। प्रथम चरण के यह रेट वर्ष 2019-20 के लिए लागू हुए हैं। 13 अगस्त से इन निर्धारित रेटों के अनुसार ही रजिस्ट्री होगी।
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दो स्लैब में बांटा एग्रीकल्चर जमीन का दाम
जिला योजनाकार के मास्टर प्लान वाले और तहसील क्षेत्र में पड़ने वाले 78 से ज्यादा गांवों के एग्रीकल्चर लैंड के रेट इस बार दो स्लैब में बांटे हैं। जबकि पहले ज्यादातर गांवों में एक ही स्लैब पर रेट लागू थे। सड़क के साथ तक दो एकड़ भूमि का रेट ज्यादा रखा गया है, जबकि सड़क से दो एकड़ बाद तक की भूमि का रेट थोड़ा कम है।
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ये गांव जहां सबसे ज्यादा महंगी हुई जमीन
करनाल की कृषि भूमि नगर निगम से बाहर के गांवों के अलावा सलारू, दरड़, कुराली, रंबा व करनाल से कुंजपुरा तक सड़क के साथ लगती पहली दो एकड़ जमीन का रेट 15 लाख तक बढ़ा है। जबकि दरड़, कुराली व रंबा गांव में सड़क से दो एकड़ बाद की कृषि योग्य जमीन पर 8 लाख रुपये तक महंगी हुई है।
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गांव डबरी: पिछले साल दो लाख घटा, अब पांच लाख तक बढ़ा रेट
डबरी की एग्रीकल्चर लैंड का कलेक्टर रेट पिछले साल दो स्लैब में बांटकर 35 लाख से घटाकर सड़क से दो एकड़ पीछे तक की जमीन का रेट 33 लाख रुपये प्रति एकड़ किया गया था। इस बार इसे दो लाख बढ़ाने के साथ-साथ सड़क के साथ लगती जमीन भी पांच लाख रुपये प्रति एकड़ तक महंगी हुई है। जबकि अन्य गांवों में जहां पिछले साल स्लैब बनी थी वहां भी इस तरह से रेटों में परिवर्तन हुआ है।

राजस्व विभाग के वित्त आयुक्त से स्वीकृति मिलने के बाद ही नया कलेक्टर रेट तय हुआ है। यह 13 अगस्त से लागू होगा। इसी रेट के अनुसार ही जमीन की रजिस्ट्री होगी। -श्याम लाल, डीआरओ करनाल।
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