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अपने मन के अंदर की भी सफाई करें : आशीष सागर महाराज
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- श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जुंडला गेट के श्री बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य आशीष सागर महाराज ने, तुम मेरी मंजिल, तुम हो मेरी पूजा, तुम ही मेरे देवता... भजन गाकर सभी को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भगवान ने गीता के उपदेश में कहा था कि, कर्म करो, जैसे आप कर्म करोगे आपकों वैसा ही फल मिलेगा। लेकिन आजकल हम चमत्कार के पीछे भाग रहे हैं।
हमें केवल यमुना जी की ही सफाई नहीं करनी अपने मन के अंदर की भी सफाई करनी है। उन्होंने महिलाओं से निवेदन किया कि अपने बच्चों को धार्मिक कहानियां और लोरी जरूर सुनानी चाहिए ताकि वे संस्कारवान बन सकें। आज की मां को खुद ही लोरी नहीं आती केवल खुद भी अपने आप को मोबाइल में व्यस्त रखतीं है। बच्चों को भी मोबाइल दे देती हैं, जो कि उनकी सेहत और भौतिक जीवन के लिए ठीक नहीं है, क्योकि मोबाइल उनकी आंखों, कानों के साथ उनको संस्कारहीन बना रहा है।
उन्होंने मधु मंगल की कथा सुनाते हुए बताया कि श्रीकृष्ण जी ने मधु मंगल से कहा कि आज में तुम्हारे घर का भोजन करूगा, तभी वह घर गया तो कुछ बना ही नहीं था, केवल खट्टी कढ़ी रखी थी। वही लेकर चल पड़ा। रास्ते में आया तो नहर किनारे कढ़ी गिराने का प्रयास किया तो उसे लगा कि ये तो प्रभु को पता लग जाएगा। उसने उस खट्टी कढ़ी को निगल लिया। इससे उसके चेहरे पर थोड़ी सी कढ़ी लग गई।
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जब मधु मंगल प्रभु के पास पहुंचे तो उन्होंने उससे भोजन लाने के बारे में पूछा उसने मना कर दिया। तभी प्रभु ने देखा कि उसके चेहरे पर कढ़ी लगी है। श्रीकृष्ण जी ने उसे चाट लिया, ये ब्रह्म जी ने देख लिया और ब्रह्मा जी ने बाल गोपाल को गायब कर दिया। भगवान ने सभी बाल गोपाल को वैसा ही बना दिया। ब्रह्म जी ने तीन महीने बाद वहां आकर देखा तो सबकुछ वैसे ही चल रहा था। ये देख ब्रह्म जी श्रीकृष्ण जी के चरणों में बैठकर बोले कि ब्रह्म किसी ओर को दे तो मुझे तो बृजवासी बना दो।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जुंडला गेट के श्री बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य आशीष सागर महाराज ने, तुम मेरी मंजिल, तुम हो मेरी पूजा, तुम ही मेरे देवता... भजन गाकर सभी को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भगवान ने गीता के उपदेश में कहा था कि, कर्म करो, जैसे आप कर्म करोगे आपकों वैसा ही फल मिलेगा। लेकिन आजकल हम चमत्कार के पीछे भाग रहे हैं।
हमें केवल यमुना जी की ही सफाई नहीं करनी अपने मन के अंदर की भी सफाई करनी है। उन्होंने महिलाओं से निवेदन किया कि अपने बच्चों को धार्मिक कहानियां और लोरी जरूर सुनानी चाहिए ताकि वे संस्कारवान बन सकें। आज की मां को खुद ही लोरी नहीं आती केवल खुद भी अपने आप को मोबाइल में व्यस्त रखतीं है। बच्चों को भी मोबाइल दे देती हैं, जो कि उनकी सेहत और भौतिक जीवन के लिए ठीक नहीं है, क्योकि मोबाइल उनकी आंखों, कानों के साथ उनको संस्कारहीन बना रहा है।
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उन्होंने मधु मंगल की कथा सुनाते हुए बताया कि श्रीकृष्ण जी ने मधु मंगल से कहा कि आज में तुम्हारे घर का भोजन करूगा, तभी वह घर गया तो कुछ बना ही नहीं था, केवल खट्टी कढ़ी रखी थी। वही लेकर चल पड़ा। रास्ते में आया तो नहर किनारे कढ़ी गिराने का प्रयास किया तो उसे लगा कि ये तो प्रभु को पता लग जाएगा। उसने उस खट्टी कढ़ी को निगल लिया। इससे उसके चेहरे पर थोड़ी सी कढ़ी लग गई।
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जब मधु मंगल प्रभु के पास पहुंचे तो उन्होंने उससे भोजन लाने के बारे में पूछा उसने मना कर दिया। तभी प्रभु ने देखा कि उसके चेहरे पर कढ़ी लगी है। श्रीकृष्ण जी ने उसे चाट लिया, ये ब्रह्म जी ने देख लिया और ब्रह्मा जी ने बाल गोपाल को गायब कर दिया। भगवान ने सभी बाल गोपाल को वैसा ही बना दिया। ब्रह्म जी ने तीन महीने बाद वहां आकर देखा तो सबकुछ वैसे ही चल रहा था। ये देख ब्रह्म जी श्रीकृष्ण जी के चरणों में बैठकर बोले कि ब्रह्म किसी ओर को दे तो मुझे तो बृजवासी बना दो।