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सच्चे प्रेम और निर्मल भाव के भूखे हैं श्रीकृष्ण : तेजस्वी दास महाराज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2026 03:03 AM IST
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Chandigarh Vigilance team inspected the sewerage system in Gharaunda.
विजिलेंस चंडीगढ़ की टीम ने घराैंडा में सीवरेज व्यवस्था जांची - फोटो : विजिलेंस चंडीगढ़ की टीम ने घराैंडा में सीवरेज व्यवस्था जांची
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। श्री कृष्णा मंदिर सेक्टर-14 में गीता भागवत प्रचार सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कृष्णतत्त्ववेत्ता तेजस्वी दास महाराज ने भक्ति, प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का महत्व बताया। उन्होंने ‘ना जाने कौन से गुण पे दयानिधि रीझ जाते हैं’ भजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को समझाया कि भगवान श्रीकृष्ण बाहरी दिखावे, ऐश्वर्य या बड़े आयोजनों से प्रसन्न नहीं होते, बल्कि भक्त के सच्चे प्रेम और समर्पण भाव पर रीझ जाते हैं। तेजस्वी दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा अहैतुकी है। वे अपने भक्तों के निर्मल भाव को देखते हैं। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के राजसी भोजन को ठुकराकर विदुर के घर जाना स्वीकार किया। वहां उन्होंने विदुरानी के प्रेमपूर्वक अर्पित किए गए केले के छिलके भी स्वीकार किए। यह प्रसंग दर्शाता है कि भगवान के लिए पकवानों की भव्यता से अधिक भक्त के मन का प्रेम मायने रखता है।
उन्होंने कहा कि जब सभा में द्रौपदी संकट में थीं, तब भगवान श्रीकृष्ण उनकी रक्षा के लिए आगे आए। इसी प्रकार जटायु ने माता सीता की रक्षा के लिए रावण से युद्ध किया तो भगवान श्रीराम ने उसके प्रति गहरी करुणा दिखाई और उसे अपनी गोद में लेकर अंतिम संस्कार किया। इन प्रसंगों से भगवान के करुणामय स्वरूप और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का पता चलता है।
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तेजस्वी दास महाराज ने कहा कि भगवान ऐश्वर्य या बल के नहीं, बल्कि निर्मल भाव और सच्चे प्रेम के भूखे हैं। श्रीमद्भागवत पुराण भगवान की भक्ति और उनकी कृपा को समझने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि यह संसार भगवान श्रीकृष्ण की माया से संचालित है और उनकी इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। इसलिए मनुष्य को अहंकार और दिखावे से दूर रहकर प्रेम, श्रद्धा और समर्पण के साथ प्रभु की भक्ति करनी चाहिए। कथा में यजमान के रूप में सूक्ष्म गुप्ता, विजय गुप्ता और अकुंश गुप्ता रहे। कथा में जीवानुंगा मृदुला वैष्णवी, जीवानुंगा विशाल वैष्णव, प्रतीक वैष्णव और कृष्णा वैष्णवी के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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