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सरकारी अभिलेख से छेड़छाड़ और गायब करने के आरोप में वन रक्षक के खिलाफ केस दर्ज
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करनाल। सरकारी अभिलेख से छेड़छाड़ और गायब करने के आरोप में वन विभाग के वन रक्षक के खिलाफ करीब साढ़े तीन साल बाद मामला दर्ज हुआ है। इससे पहले मुख्य वन संरक्षक की जांच 11 माह तक चली। विभागीय जांच में आरोपी वन रक्षक कुलदीप सिंह पर लगे आरोपी सही पाए गये। इसके बाद करनाल वन मंडल अधिकारी नरेश कुमार रंगा की शिकायत पर थाना सिविल लाइन में पुलिस ने केस दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में वन मंडल अधिकारी नरेश कुमार रंगा ने बताया कि वनरक्षक कुलदीप सिंह का करनाल से झज्जर वन मंडल में स्थानांतरण उपरांत सितंबर 2017 में कर्मचारी का निजी अभिलेख झज्जर के कार्यालय में भेजा जा रहा था। परंतु कर्मचारी कुलदीप सिंह के अनुरोध पर मंडल की डिस्पैच शाखा के इंचार्ज द्वारा रिकार्ड चेक करवाने के उपरांत अभिलेख को डाक के लिफाफे में बंद करके कर्मचारी को दे दिया गया। आरोप है कि कुलदीप सिंह ने रिकार्ड झज्जर वन मंडल में न देकर अपने पास रख लिया। इसके बाद वन संरक्षक मध्य परिमंडल रोहतक ने 28 अगस्त 2018 को कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
11 सितंबर 2018 को वन मंडल अधिकारी सोनीपत को कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा गया, क्योंकि कर्मचारी उस समय सोनीपत मंडल में कार्यरत था। इसके बाद वन मंडल अधिकारी सोनीपत ने 19 नवंबर 2018 को कर्मचारी के संदिग्ध आचरण को देखते हुए आरोप पत्र जारी किया। मुख्य वन संरक्षक ने आरोप पत्र में लगाए आरोपों की सत्यता जानने के लिए 11 फरवरी 2019 को वन राजिक अधिकारी जयकिशन पानीपत को जांच अधिकारी नियुक्त किया। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2019 को रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट 17 फरवरी 2020 को करनाल भेजी गई। रिपोर्ट के अनुसार जांच में कुलदीप सिंह के खिलाफ दोष सिद्ध हुआ। मामले में एसपी गंगाराम पूनिया का कहना है कि वनमंडल अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। पुलिस की जांच के बाद आरोपी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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पुलिस को दी शिकायत में वन मंडल अधिकारी नरेश कुमार रंगा ने बताया कि वनरक्षक कुलदीप सिंह का करनाल से झज्जर वन मंडल में स्थानांतरण उपरांत सितंबर 2017 में कर्मचारी का निजी अभिलेख झज्जर के कार्यालय में भेजा जा रहा था। परंतु कर्मचारी कुलदीप सिंह के अनुरोध पर मंडल की डिस्पैच शाखा के इंचार्ज द्वारा रिकार्ड चेक करवाने के उपरांत अभिलेख को डाक के लिफाफे में बंद करके कर्मचारी को दे दिया गया। आरोप है कि कुलदीप सिंह ने रिकार्ड झज्जर वन मंडल में न देकर अपने पास रख लिया। इसके बाद वन संरक्षक मध्य परिमंडल रोहतक ने 28 अगस्त 2018 को कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
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11 सितंबर 2018 को वन मंडल अधिकारी सोनीपत को कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा गया, क्योंकि कर्मचारी उस समय सोनीपत मंडल में कार्यरत था। इसके बाद वन मंडल अधिकारी सोनीपत ने 19 नवंबर 2018 को कर्मचारी के संदिग्ध आचरण को देखते हुए आरोप पत्र जारी किया। मुख्य वन संरक्षक ने आरोप पत्र में लगाए आरोपों की सत्यता जानने के लिए 11 फरवरी 2019 को वन राजिक अधिकारी जयकिशन पानीपत को जांच अधिकारी नियुक्त किया। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2019 को रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट 17 फरवरी 2020 को करनाल भेजी गई। रिपोर्ट के अनुसार जांच में कुलदीप सिंह के खिलाफ दोष सिद्ध हुआ। मामले में एसपी गंगाराम पूनिया का कहना है कि वनमंडल अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। पुलिस की जांच के बाद आरोपी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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