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Karnal: चिप में सुरक्षित रहेंगे पहाड़ी पशुओं के बेहतर जीन, एनडीडीपी व एनबीएजीआर कर रहा शोध कार्य

Thu, 07 Dec 2023 11:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो देव शर्मा, करनाल (हरियाणा)
देव शर्मा, करनाल (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 07 Dec 2023 11:43 AM IST
सार

करनाल में डीएनए चिप तैयार करने पर कार्य चल रहा है, जिसमें तलाशे गए, सर्वोत्तम जीन को एकत्र किया जाएगा। जो अच्छे प्रजनन, वातावरण अनुकूल, बेहतर दुग्ध उत्पादन वाले हों। नए पशुओं में इसी चिप से मिलान किया जाएगा। देखा जाएगा कि किस पशु में कितने प्रतिशत जीन का मिलान होता है।

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Better genes are being searched in hill and plain animals which will be protected in the chip.
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : ANI

विस्तार

जलवायु परिवर्तन के बीच पशुओं की उत्पादकता और दुग्ध उत्पादन को बरकरार रखना बड़ी चुनौती है। इसके लिए कई स्तर पर शोध चल रहे हैं। कुछ शोध संस्थानों में ऐसे जीन की तलाश चल रही है, जो पशुओं को अत्यधिक सर्दी तो कभी अति ताप की स्थिति में उन्हें जीवित रखते हैं। लेह, लद्दाख और जंस्कार आदि बर्फीले, ऊंचे क्षेत्रों में जाकर गाय, याक, भेड़, बकरी व मुर्गी आदि में विभिन्न जीन तलाशे गए हैं, इनमें से 1000 जीन को एकत्र भी कर लिया गया है। पशुओं में पाए जाने वाले ये बेहतर जीन अब एक चिप में सुरक्षित रखे जाएंगे। यह चिप पर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीपी) और राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) तैयार कर रहा है।

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राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) करनाल आए बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पटना के अनुसंधान निदेशक डॉ. विशेष कुमार सक्सेना ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का असर दिखने लगा है। कभी अत्यधिक गर्मी, बारिश या अत्यधिक सर्दी होने लगी है, ऐसे में ऐसे पशुओं की जरूरत महसूस होने लगी है, जो हर मौसम में सहज रहे। यानी विपरीत मौसम में भी उनकी उत्पादकता और दुग्ध उत्पादन प्रभावित न हो।
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डॉ. विशेष कुमार ने बताया कि भारतीय पशु एवं डेयरिंग मंत्रालय के दिशा निर्देशन में आईसीएआर व डीआरडीओ मिलकर इस पर कार्य कर रहे हैं। गाय, यॉक, भेड़, बकरी और मुर्गी पर शोध चल रहा है। जीन स्तर पर देखा जा रहा है कि ऐसी क्या विशेषताएं हैं, जो इन पशुओं को अत्यधिक सर्दी में भी जीवित रखती हैं। शोध का विषय ये भी है कि उनके जीन के आधार पर ये भी देखा जा रहा है कि आखिर मैदानी क्षेत्र के पशुओं में कौन सा ऐसा जीन या प्रोटीन नहीं है, जिसके कारण वह पहाड़ी क्षेत्रों के पशुओं के समान सर्दी सहन नहीं कर पाते हैं।
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पिछले दिनों टीम ने लेह लद्दाख आदि जाकर देसी गाय साहीवाल और मुर्रा भैंस आदि को देखा है। क्योंकि अधिक सर्दियों में बर्फ से ढक जाने के कारण चारे की समस्या पैदा हो जाती है, इसलिए पशु पालक उन्हें नीचे लेकर आते हैं, नदियों, झीलों के किनारे चारा मिल जाता है। पशुओं के व्यवहार में क्या परिवर्तन है, ये भी देखा जा रहा है।

नए पशुओं में इसी चिप से किया जाएगा मिलान
डॉ. विशेष कुमार सक्सेना ने बताया कि गर्मी में पशुओं की सहनशीलता को निकरा परियोजना में भी शामिल किया गया है। अलग-अलग अनुकूलन की स्थिति में शोध किया जा रहा है। जिसके तहत एक जीन के बारे में जानकारी मिली है, जिसका नाम है एचएसपी-70, इसकी पहचान 500 पशुओं में की जा चुकी है। शोध डीएनए आधारित है।


एक डीएनए चिप भी तैयार करने पर कार्य चल रहा है, जिसमें तलाशे गए, सर्वोत्तम जीन को एकत्र किया जाएगा। जो अच्छे प्रजनन, वातावरण अनुकूल, बेहतर दुग्ध उत्पादन वाले हों। नए पशुओं में इसी चिप से मिलान किया जाएगा। देखा जाएगा कि किस पशु में कितने प्रतिशत जीन का मिलान होता है। चिप पर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीपी) और राष्ट्रीय पशु अनुवांशिकी संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) करनाल भी कार्य कर रहा है।

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