फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Banks are people upset strike

बैंकों में हड़ताल से लोग रहे परेशान

Mon, 10 Feb 2014 08:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल Updated Mon, 10 Feb 2014 08:07 PM IST
विज्ञापन
Banks are people upset strike
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले जिलेभर के बैंक अधिकारियों और कर्मियों ने सोमवार को सरकार के खिलाफ अपने तेवर कडे़ कर दिए। पूर्व में दिए अल्टीमेटम के मुताबिक हरियाणा सरकार और निजी क्षेत्र के बैंकों को छोड़ कर अन्य तमाम सरकारी बैंकों की करीब 200 शाखाओं में दिन भर हड़ताल रही।
विज्ञापन


पूरा दिन बैंकों के बाहर ताले लटके रहे। किसी भी बैंक में कोई अधिकारी और कर्मचारी काम करने के लिए नहीं पहुंचा। किसी भी बैंक में कोई कामकाज नहीं किया गया। बैंकों में रोजमर्रा की तरह पहुंचने वाले हजारों उपभोक्ताओं को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी। सरकारी कामकाज कराने वाले लोगों को पूरा दिन इधर-उधर भटकना पड़ा।
विज्ञापन


सुबह करीब पौने 11 बजे जिलेभर के सैकड़ों बैंक अधिकारी और कर्मचारी अंबेडकर चौक पर इंडियन बैंक के बाहर एकत्रित हुए। कर्मियों का नेतृत्व यूएफबीयू के राज्य अध्यक्ष बीएन शर्मा ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


उनके साथ पंजाब एंड सिंध बैंक इंप्लाइज यूनियन के राज्य महासचिव सतवंत सिंह, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर इंप्लाइज यूनियन के राज्य महासचिव प्रताप सिंह तथा सिंडिकेट बैंक एंप्लाइज यूनियन के राज्य चेयरमैन प्रमोद गुप्ता समेत काफी बैंक कर्मचारी नेताओं ने सरकार के प्रति कड़ी नाराजगी जाहिर की।

दिनभर बैंक के बाहर केंद्र सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के अड़ियल रवैये पर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि यूएफबीयू और आईबीए के साझा मांगपत्र पर आईबीए का रुख पूरी तरह नकारात्मक रहा है।

दिल्ली के चीफ लेबर कमिश्नर के दखल के बाद आईबीए बैंक कर्मियों से वार्ता के लिए सहमत हुई थी, लेकिन कुछ नहीं किया गया।

बैंक कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर एक दिन की सांकेतिक हड़ताल 18 दिसंबर 2013 को की थी। 20 और 21 जनवरी 2014 को दो दिन हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन चीफ लेबर कमिश्नर के बीच में आने से बैंक कर्मियों ने हड़ताल को टाल दिया था।

आईबीए अड़ियल रवैये पर अडिग नहीं रहती तो हड़ताल नहीं होती। बैंक कर्मी और अधिकारी हड़ताल पर नहीं जाना चाहते। सरकार बैंकों में कर्ज डूबने के नाम पर हो रहे घाटे के मूल कारणों को छुपाने का काम कर रही है।

कारपोरेट घरानों को बहुत बड़ा लाभ दिया जा रहा है। घाटे में जा रही कंपनियों के ही शेयर खरीदे जा रहे है। ऐसे में घाटे पूरे नहीं हुआ करते, घाटे बढे़ंगे।

बैंकों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मियों की मांगों को मानने में आईबीए कोई रूचि नहीं लेता है। साफ है पूरा मामला आईबीए ने ही लटका रखा है।

हड़ताल पर गए तमाम अधिकारियों और कर्मियों ने खुले तौर पर कहा वह लोग भी कमजोर नहीं है। संघर्ष को और तेज कर देंगे। अभी हड़ताल दो दिन की है।

वह लोग हड़ताल कर लोगों को परेशान नहीं करना चाहते। न ही राष्ट्र का राजस्व नुकसान चाहते हैं, लेकिन उन लोगों की सुनवाई नहीं होने पर मजबूरन हड़ताल पर जाना पड़ रहा है। वह लोग भी अपनी मांगों को मनवा कर ही दम लेंगे।

निजी बैंकों ने एटीएम से थोड़ी राहत    

निजी क्षेत्र के बैंकों और हरियाणा सरकार के बैंकों के खुला रहने से कई हजार लोग परेशानी झेलने से बच गए। दूसरी ओर, सरकारी बैंकों के एटीएम ने भी लोगों को दिन भर सुकून दिए रखा।


बैंक उपभोक्ताओं का कहना है निजी क्षेत्र और हरियाणा सरकार से संबंधित बैंक नहीं होते और एटीएम से पैसा निकालने की सुविधा नहीं होती तो हड़ताल के दौरान बैंकों में होने वाला लेन देन कई गुणा अधिक होने के साथ बुरी तरह प्रभावित रहता। मात्र सरकारी बैंकों की हड़ताल रहने से भी कई हजार उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed