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Karnal News: मांगों के समर्थन में गरजीं आशा वर्कर, राष्ट्रव्यापी हड़ताल का एलान
Fri, 23 Jan 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 23 Jan 2026 01:47 AM IST
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सुपरिडेंट कमलेश को मांग पत्र सौंपती आगंबाड़ी की महिलाएं। संगठन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। फव्वारा पार्क में वीरवार को स्थाई रोजगार, न्यूनतम वेतन 26 हजार करने, चार लेबर कोड रद्द करने और खाली पदों को भरने जैसी मांगों के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्पर यूनियन की ओर से प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन कर यूनियन सदस्यों ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को राष्ट्रीय हड़ताल का नोटिस व मांग पत्र साैंपा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि आठ या नाै माह बाद उनका वेतन आता है साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में राशन की कमी और सुविधाओं की कमी के कारण भी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मियों के लिए न्यूनतम वेतन 26 हजार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्पर को चौथे कर्मचारी की श्रेणी देना, सेवानिवृत्त के बाद कम से कम 1200 रुपये की पेंशन लागू की जाए, ग्रेच्युटी दी जाए, सुपरवाइजर हेल्पर व कार्यकर्ता की पदोन्नति वरिष्ठता के आधार पर की जाए, दुर्घटना व निधन होने पर पांच लाख का मुआवजा व घायल का इलाज दिया जाए, प्ले स्कूल व क्रेच केंद्रों में कार्यकर्ताओं व हेल्पर को ग्रेड दिया जाए और चार लेबर कोड को वापस लिया जाएगा। जिला आंगनबाड़ी व हेल्पर यूनियन प्रधान रूपा राणा ने बताया कि सरकार की ओर से ग्रेच्युटी देने का आदेश तो कर दिया गया लेकिन कार्यकर्ताओं को अब तक इसका लाभ नहीं दिया गया है। मौके पर पिंकी रीना, मंजू, ममता, बबीता, कान्ता, सर्वेश राणा, सरोज, नीलम, सुदेश सग्गा, सुखविन्द्र, गीता, रीटा, रेखा और राकेश राणा सहित अन्य मौजूद रहे।
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मांगों को पूरा किया जाए
जिला सीटू प्रधान बिजनेश राणा ने बताया कि वर्ष 2025 में आईसीडीएस ने 50 वर्ष पूरे किए हैं और 45वीं भारतीय श्रम सम्मेलन की ओर से योजना वर्कर्स को नियमित करने, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा की सिफारिश किए हुए एक दशक से अधिक समय बीत चुका है। सर्वोच्च न्यायालय ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया है लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। डिजिटलीकरण के नाम पर सरकार इन योजनाओं के हकदारों को समाप्त कर रही है। बजट कटौती और वेतन का भुगतान न होना आम बात हो गई है। ऐसे में मांगों को पूरा किया जाए ताकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, वर्कर व हेल्पर काम को सही कर सके।
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आठ माह से नहीं आया मानदेय
शहरी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मूर्ति ने बताया कि इस प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांगों को पहुंचाना बहुत जरूरी है। पिछले आठ माह से कार्यकर्ताओं व हेल्परों का मानदेय नहीं दिया जा रहा है। ऐसे घर का खर्च व अन्य कई चीजों में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग रखते हुए कहा कि उनके वेतन व मानदेय की तिथि को निश्चित किया जाए।
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केंद्रों में राशन की भारी कमी
मोहिदनपुर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पिंकी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले एक साल से मेन्यू के हिसाब से राशन नहीं आ रहा है। कई केंद्रों में राशन खराब होने की स्थिति तक पहुंचता है ऐसे में बच्चों व गर्भवती महिलाओं के पोषण के साथ भी खिलवाड़ होता है। मांग है कि सभी केंद्रों में राशन मेन्यू के हिसाब से व समय पर पहुंचाया जाए।
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खाना बनाने के लिए सिलिंडर तक का नहीं आ रहा पैसा
अंगोध आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करेशनी ने बताया कि केंद्रों में पिछले आठ माह से सिलिंडर का पैसा तक नहीं आ रहा है। ऐसे में बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए खाना तैयार करने में परेशानी आती है, स्वयं के खर्चों पर सिलिंडर भरवाकर खाना बनाना पड़ रहा है। मांग है कि कम से कम सिलिंडर का पैसा तो दिया जाए।
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पोषण ट्रेकर एप में आ रही परेशानियां
नीलोखेड़ी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुदेश ने बताया कि पोषण ट्रेकर एप में कई समस्याएं आ रही हैं। ऐसे में बच्चों को पोषण उपलब्ध करवाना भी मुश्किल हो रहा है। राशन की कमी व ऐप में फेस कैप्चर करने के कारण पोषण सामग्री नहीं मिली पाती। उन्होंने मांग की कि पोषण ट्रैकर ऐप की समस्याओं को ठीक किया जाए और समय पर फोन का रिचार्ज किया जाए।
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27 जनवरी को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्परों के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग में आमने-सामने बैठ कर समस्याओं पर बातचीत की जाएगी। साथ ही उपरोक्त विभाग को केंद्रों के बजट व सभी मांगों को लेकर कहा जाएगा ताकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्परों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
- राजबाला मोर, महिला एवं बाल विकास विभाग जिला कार्यक्रम अधिकारी
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करनाल। फव्वारा पार्क में वीरवार को स्थाई रोजगार, न्यूनतम वेतन 26 हजार करने, चार लेबर कोड रद्द करने और खाली पदों को भरने जैसी मांगों के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्पर यूनियन की ओर से प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन कर यूनियन सदस्यों ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को राष्ट्रीय हड़ताल का नोटिस व मांग पत्र साैंपा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि आठ या नाै माह बाद उनका वेतन आता है साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में राशन की कमी और सुविधाओं की कमी के कारण भी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मियों के लिए न्यूनतम वेतन 26 हजार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्पर को चौथे कर्मचारी की श्रेणी देना, सेवानिवृत्त के बाद कम से कम 1200 रुपये की पेंशन लागू की जाए, ग्रेच्युटी दी जाए, सुपरवाइजर हेल्पर व कार्यकर्ता की पदोन्नति वरिष्ठता के आधार पर की जाए, दुर्घटना व निधन होने पर पांच लाख का मुआवजा व घायल का इलाज दिया जाए, प्ले स्कूल व क्रेच केंद्रों में कार्यकर्ताओं व हेल्पर को ग्रेड दिया जाए और चार लेबर कोड को वापस लिया जाएगा। जिला आंगनबाड़ी व हेल्पर यूनियन प्रधान रूपा राणा ने बताया कि सरकार की ओर से ग्रेच्युटी देने का आदेश तो कर दिया गया लेकिन कार्यकर्ताओं को अब तक इसका लाभ नहीं दिया गया है। मौके पर पिंकी रीना, मंजू, ममता, बबीता, कान्ता, सर्वेश राणा, सरोज, नीलम, सुदेश सग्गा, सुखविन्द्र, गीता, रीटा, रेखा और राकेश राणा सहित अन्य मौजूद रहे।
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मांगों को पूरा किया जाए
जिला सीटू प्रधान बिजनेश राणा ने बताया कि वर्ष 2025 में आईसीडीएस ने 50 वर्ष पूरे किए हैं और 45वीं भारतीय श्रम सम्मेलन की ओर से योजना वर्कर्स को नियमित करने, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा की सिफारिश किए हुए एक दशक से अधिक समय बीत चुका है। सर्वोच्च न्यायालय ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया है लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। डिजिटलीकरण के नाम पर सरकार इन योजनाओं के हकदारों को समाप्त कर रही है। बजट कटौती और वेतन का भुगतान न होना आम बात हो गई है। ऐसे में मांगों को पूरा किया जाए ताकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, वर्कर व हेल्पर काम को सही कर सके।
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आठ माह से नहीं आया मानदेय
शहरी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मूर्ति ने बताया कि इस प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांगों को पहुंचाना बहुत जरूरी है। पिछले आठ माह से कार्यकर्ताओं व हेल्परों का मानदेय नहीं दिया जा रहा है। ऐसे घर का खर्च व अन्य कई चीजों में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग रखते हुए कहा कि उनके वेतन व मानदेय की तिथि को निश्चित किया जाए।
केंद्रों में राशन की भारी कमी
मोहिदनपुर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पिंकी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले एक साल से मेन्यू के हिसाब से राशन नहीं आ रहा है। कई केंद्रों में राशन खराब होने की स्थिति तक पहुंचता है ऐसे में बच्चों व गर्भवती महिलाओं के पोषण के साथ भी खिलवाड़ होता है। मांग है कि सभी केंद्रों में राशन मेन्यू के हिसाब से व समय पर पहुंचाया जाए।
खाना बनाने के लिए सिलिंडर तक का नहीं आ रहा पैसा
अंगोध आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करेशनी ने बताया कि केंद्रों में पिछले आठ माह से सिलिंडर का पैसा तक नहीं आ रहा है। ऐसे में बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए खाना तैयार करने में परेशानी आती है, स्वयं के खर्चों पर सिलिंडर भरवाकर खाना बनाना पड़ रहा है। मांग है कि कम से कम सिलिंडर का पैसा तो दिया जाए।
पोषण ट्रेकर एप में आ रही परेशानियां
नीलोखेड़ी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुदेश ने बताया कि पोषण ट्रेकर एप में कई समस्याएं आ रही हैं। ऐसे में बच्चों को पोषण उपलब्ध करवाना भी मुश्किल हो रहा है। राशन की कमी व ऐप में फेस कैप्चर करने के कारण पोषण सामग्री नहीं मिली पाती। उन्होंने मांग की कि पोषण ट्रैकर ऐप की समस्याओं को ठीक किया जाए और समय पर फोन का रिचार्ज किया जाए।
27 जनवरी को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्परों के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग में आमने-सामने बैठ कर समस्याओं पर बातचीत की जाएगी। साथ ही उपरोक्त विभाग को केंद्रों के बजट व सभी मांगों को लेकर कहा जाएगा ताकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्परों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
- राजबाला मोर, महिला एवं बाल विकास विभाग जिला कार्यक्रम अधिकारी