{"_id":"6122c1cf8ebc3e79de0622ac","slug":"anganwadi-centers-will-get-their-own-roof-karnal-news-knl807565121","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलेगी खुद की छत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलेगी खुद की छत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। खुले आसमान और किराए के भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को जल्द खुद की छत मिलेगी। इसके लिए जिले में 61 आंगनबाड़ी केंद्रों की इमारतों का निर्माण शुरू हो चुका है। ये इमारतें गांवों में बनाई जा रही हैं। इसके अलावा जिले के 11 और गांवों में भी आंगनबाड़ी संचालन के लिए भवन नाबार्ड की सहायता से बनाए जाएंगे। इन भवनों के लिए इन गांवों की ग्राम पंचायत जमीन उपलब्ध करवाएगी। अतिरिक्त आंगनबाड़ी भवन गांव राहड़ा, मूनक, बल्ला, सालवन, चोचड़ा और गढ़ी रोड़ान में बनकर तैयार होंगे। चयनित ग्यारह गांवों में से सात गांवों में पंचायत की ओर से जमीनें मिल गई हैं। सालवन और चोरकारसा में भवन का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
प्रत्येक भवन 250 गज भूमि पर बनाए जाएंगे। बच्चों के खेलने और पढ़ाई के लिए अलग कमरे बनाए जाएंगे। बाथरूम बनेगा। खाना बनाने के लिए रसोई और आंगन की सुविधा भी होगी।
किराए पर चल रहे आधे से ज्यादा केंद्र
महिला एवं बाल विकास आयोग की जिला कार्यक्रम अधिकारी राज बाला ने बताया कि नई ईमारतों में आंगनबाड़ी केंद्र खुलने से बच्चों को सुविधाएं मिलेंगी और वर्करों के लिए काम करना भी आसान होगा। जिले में 1475 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जिनमें करीब 590 केंद्र गांवों और शहरों की अपनी सरकारी इमारतों में संचालित हैं। इन्हें कोई किराया नहीं देना पड़ता। लेकिन शेष केंद्रों में से अधिकतर प्राईवेट परिसरों में चल रहे हैं। गांवों में संचालित प्राईवेट परिसरों के लिए केंद्र को 200 रुपये और शहरों के प्राईवेट परिसरों में केंद्र को करीब 1500 रुपये किराया देना पड़ता है। इसलिए सरकारी भवनों का निर्माण करवाया जा रहा है ताकि आंगनबाड़ी केंद्र अपनी जमीन पर संचालित हो सकें।
विज्ञापन
गांवों के केंद्रों में नहीं है व्यवस्था
आंगनबाड़ी वर्कर जिला प्रधान रूपा राणा ने बताया कि गांवों के आंगनबाड़ी केंद्र जो कि किराए के भवनों पर चल रहे हैं उनमें व्यवस्था खस्ताहाल है। बच्चों के सही से बैठने, बाथरूम, खेलने और रसोई की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे वर्करों को भी काम करने में परेशानी आती है। अपने भवनों में केंद्र खुलेंगे तो मदद होगी।
यह एक अच्छा कदम है। हर बच्चा जो आंगनबाड़ी में आता है वह अच्छे माहौल और सुविधा का हकदार है। इन भवनों के निर्माण से बच्चों को अच्छी व्यवस्थाएं मिलेंगी।
-राज बाला, डीपीओ, डब्ल्यूसीडी
विज्ञापन
करनाल। खुले आसमान और किराए के भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को जल्द खुद की छत मिलेगी। इसके लिए जिले में 61 आंगनबाड़ी केंद्रों की इमारतों का निर्माण शुरू हो चुका है। ये इमारतें गांवों में बनाई जा रही हैं। इसके अलावा जिले के 11 और गांवों में भी आंगनबाड़ी संचालन के लिए भवन नाबार्ड की सहायता से बनाए जाएंगे। इन भवनों के लिए इन गांवों की ग्राम पंचायत जमीन उपलब्ध करवाएगी। अतिरिक्त आंगनबाड़ी भवन गांव राहड़ा, मूनक, बल्ला, सालवन, चोचड़ा और गढ़ी रोड़ान में बनकर तैयार होंगे। चयनित ग्यारह गांवों में से सात गांवों में पंचायत की ओर से जमीनें मिल गई हैं। सालवन और चोरकारसा में भवन का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
प्रत्येक भवन 250 गज भूमि पर बनाए जाएंगे। बच्चों के खेलने और पढ़ाई के लिए अलग कमरे बनाए जाएंगे। बाथरूम बनेगा। खाना बनाने के लिए रसोई और आंगन की सुविधा भी होगी।
विज्ञापन
किराए पर चल रहे आधे से ज्यादा केंद्र
महिला एवं बाल विकास आयोग की जिला कार्यक्रम अधिकारी राज बाला ने बताया कि नई ईमारतों में आंगनबाड़ी केंद्र खुलने से बच्चों को सुविधाएं मिलेंगी और वर्करों के लिए काम करना भी आसान होगा। जिले में 1475 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जिनमें करीब 590 केंद्र गांवों और शहरों की अपनी सरकारी इमारतों में संचालित हैं। इन्हें कोई किराया नहीं देना पड़ता। लेकिन शेष केंद्रों में से अधिकतर प्राईवेट परिसरों में चल रहे हैं। गांवों में संचालित प्राईवेट परिसरों के लिए केंद्र को 200 रुपये और शहरों के प्राईवेट परिसरों में केंद्र को करीब 1500 रुपये किराया देना पड़ता है। इसलिए सरकारी भवनों का निर्माण करवाया जा रहा है ताकि आंगनबाड़ी केंद्र अपनी जमीन पर संचालित हो सकें।
विज्ञापन
गांवों के केंद्रों में नहीं है व्यवस्था
आंगनबाड़ी वर्कर जिला प्रधान रूपा राणा ने बताया कि गांवों के आंगनबाड़ी केंद्र जो कि किराए के भवनों पर चल रहे हैं उनमें व्यवस्था खस्ताहाल है। बच्चों के सही से बैठने, बाथरूम, खेलने और रसोई की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे वर्करों को भी काम करने में परेशानी आती है। अपने भवनों में केंद्र खुलेंगे तो मदद होगी।
यह एक अच्छा कदम है। हर बच्चा जो आंगनबाड़ी में आता है वह अच्छे माहौल और सुविधा का हकदार है। इन भवनों के निर्माण से बच्चों को अच्छी व्यवस्थाएं मिलेंगी।
-राज बाला, डीपीओ, डब्ल्यूसीडी