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Karnal News: भारी आवक के बीच चल रहा कच्ची पर्ची का खेल, एमएसपी से कम पर खरीद
Mon, 13 Oct 2025 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 13 Oct 2025 12:47 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। किसान बड़ी संख्या में धान लेकर अनाज मंडी पहुंच रहे हैं, जिसके कारण मंडियां भरने लगी हैं। किसानों की धान बेचने की जल्दबाजी का राइस मिलर्स फायदा उठा रहे हैं। नमी अधिक बताकर 2100 से 2300 रुपये तक में धान खरीद रहे हैं। एमएसपी से भावांतर का खेल कच्ची पर्ची के सहारे खेला जा रहा है। जो बदरंग धान है, उसका भाव तो 1900 से 2050 रुपये के बीच ही दिया जा रहा है। जिससे किसानों को भारी घाटा हो रहा है।
किसी भी आढ़ती ने अभी तक इलेक्ट्राॅनिक कांटा नहीं लगाया है, जबकि 50 प्रतिशत से अधि धान मंडियों में पहुंच चुका है। रविवार को भी करनाल अनाज मंडी सहित जिले की विभिन्न मंडियों में धान की आवक के साथ खरीद जारी रही, सुबह से कांटे से हाईवे के दोनों ओर सर्विस लेन तक ट्रैक्टर ट्राॅलियों की कतार लगी रही। हाईवे से कांटे तक तो शाम तक वाहनों की कतार थी। हालांकि रविवार को शनिवार की अपेक्षा कम खरीद हुई है।
सबसे खास बात ये है कि खरीद एजेंसियां मंडियों में कहीं नजर नहीं आ रही है, सीधे राइस मिलर्स ही ढेरी पर आकर धान खरीद रहे हैं। करीब 30 से 40 प्रतिशत धान बदरंग आ रहा है, जिसे बमुश्किल एमएसपी से 300 से 450 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट में खरीदा जा रहा है। राइस मिलर्स से हुए सौदे के आधार पर आढ़ती किसान को कच्ची पर्ची पर हिसाब लिखकर देता है, जब एमएसपी से तय सौदे का जो भावांतर होता है, उतना धान किसान से अधिक ले लिया जाता है या फिर उतनी कीमत किसान से नगद ले ली जाती है। विश्वास के किसान भुगतान आने के बाद भावांतर की राशि आढ़ती को देते हैं, आढ़ती राइस मिलर को दे देते हैं।
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किसान संगठन लगातार इलेक्ट्रानिक कांटे की मांग कर रहे हैं लेकिन शुरुआत में प्रशासन की सख्ती को देखते हुए कई आढ़तियों ने इलेक्ट्रानिक कांटे खरीद तो लिए हैं लेकिन तौल पुराने कांटों से ही हो रही है। शनिवार को करीब छह लाख क्विंटल से अधिक खरीद हुई थी लेकिन रविवार को शाम तक चार लाख 65 हजार 360 क्विंटल की खरीद हुई। जिससे जिले की मंडियों में कुल खरीद 44 लाख 78 हजार 540 क्विंटल पहुंच गई है।
यूपी के व्यापारी भी करनाल की मंडी में ला रहे धान
- उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से भी धान को करनाल की मंडियों में लाया जा रहा है। जिसे स्थानीय किसान के बचे रकबे में बेचा जा रहा है, जिसका भुगतान बाद में किसान से आढ़ती ले लेते हैं, क्योंकि यूपी से आने वाले धान को आढ़ती व राइस मिलर्स करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट पर खरीद लेते हैं। एक किसान ने बताया कि आढ़तियों व रसि मिलर्स ने यूपी के व्यापारियों से सांठगांठ कर रखी है, ये किसान यूपी से ट्रक मे धान लेकर आते हैं, सीमा पर मंगलौरा के पास धान को ट्रालियों में भरवा लेते हैं, जिसे उनके संपर्क में रहने वाले स्थानीय किसान लेकर मंडियों तक आते हैं। ये व्यापारी यूपी से 1500 से 1600 रुपये में धान खरीद कर लाते हैं, यहां राइस मिलर्स व आढ़तियों को 1800-1900 रुपये में बेचते हैं, आढ़ती व राइस मिलर्स इसी धान को स्थानीय किसानों के अवशेष पोर्टल रकबे पर एमएसपी पर बेचकर बड़ा मुनाफा कमाते हैं।
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करनाल। किसान बड़ी संख्या में धान लेकर अनाज मंडी पहुंच रहे हैं, जिसके कारण मंडियां भरने लगी हैं। किसानों की धान बेचने की जल्दबाजी का राइस मिलर्स फायदा उठा रहे हैं। नमी अधिक बताकर 2100 से 2300 रुपये तक में धान खरीद रहे हैं। एमएसपी से भावांतर का खेल कच्ची पर्ची के सहारे खेला जा रहा है। जो बदरंग धान है, उसका भाव तो 1900 से 2050 रुपये के बीच ही दिया जा रहा है। जिससे किसानों को भारी घाटा हो रहा है।
किसी भी आढ़ती ने अभी तक इलेक्ट्राॅनिक कांटा नहीं लगाया है, जबकि 50 प्रतिशत से अधि धान मंडियों में पहुंच चुका है। रविवार को भी करनाल अनाज मंडी सहित जिले की विभिन्न मंडियों में धान की आवक के साथ खरीद जारी रही, सुबह से कांटे से हाईवे के दोनों ओर सर्विस लेन तक ट्रैक्टर ट्राॅलियों की कतार लगी रही। हाईवे से कांटे तक तो शाम तक वाहनों की कतार थी। हालांकि रविवार को शनिवार की अपेक्षा कम खरीद हुई है।
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सबसे खास बात ये है कि खरीद एजेंसियां मंडियों में कहीं नजर नहीं आ रही है, सीधे राइस मिलर्स ही ढेरी पर आकर धान खरीद रहे हैं। करीब 30 से 40 प्रतिशत धान बदरंग आ रहा है, जिसे बमुश्किल एमएसपी से 300 से 450 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट में खरीदा जा रहा है। राइस मिलर्स से हुए सौदे के आधार पर आढ़ती किसान को कच्ची पर्ची पर हिसाब लिखकर देता है, जब एमएसपी से तय सौदे का जो भावांतर होता है, उतना धान किसान से अधिक ले लिया जाता है या फिर उतनी कीमत किसान से नगद ले ली जाती है। विश्वास के किसान भुगतान आने के बाद भावांतर की राशि आढ़ती को देते हैं, आढ़ती राइस मिलर को दे देते हैं।
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किसान संगठन लगातार इलेक्ट्रानिक कांटे की मांग कर रहे हैं लेकिन शुरुआत में प्रशासन की सख्ती को देखते हुए कई आढ़तियों ने इलेक्ट्रानिक कांटे खरीद तो लिए हैं लेकिन तौल पुराने कांटों से ही हो रही है। शनिवार को करीब छह लाख क्विंटल से अधिक खरीद हुई थी लेकिन रविवार को शाम तक चार लाख 65 हजार 360 क्विंटल की खरीद हुई। जिससे जिले की मंडियों में कुल खरीद 44 लाख 78 हजार 540 क्विंटल पहुंच गई है।
यूपी के व्यापारी भी करनाल की मंडी में ला रहे धान
- उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से भी धान को करनाल की मंडियों में लाया जा रहा है। जिसे स्थानीय किसान के बचे रकबे में बेचा जा रहा है, जिसका भुगतान बाद में किसान से आढ़ती ले लेते हैं, क्योंकि यूपी से आने वाले धान को आढ़ती व राइस मिलर्स करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट पर खरीद लेते हैं। एक किसान ने बताया कि आढ़तियों व रसि मिलर्स ने यूपी के व्यापारियों से सांठगांठ कर रखी है, ये किसान यूपी से ट्रक मे धान लेकर आते हैं, सीमा पर मंगलौरा के पास धान को ट्रालियों में भरवा लेते हैं, जिसे उनके संपर्क में रहने वाले स्थानीय किसान लेकर मंडियों तक आते हैं। ये व्यापारी यूपी से 1500 से 1600 रुपये में धान खरीद कर लाते हैं, यहां राइस मिलर्स व आढ़तियों को 1800-1900 रुपये में बेचते हैं, आढ़ती व राइस मिलर्स इसी धान को स्थानीय किसानों के अवशेष पोर्टल रकबे पर एमएसपी पर बेचकर बड़ा मुनाफा कमाते हैं।