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मक्खियों के बाद अब उल्टी-दस्त की चपेट में बच्चे
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
Updated Fri, 01 Jul 2016 12:15 AM IST
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डायरिया ने पैर पसारे
- फोटो : अमर उजाला
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करनाल जिले के गांव रसूलपुर में प्रशासन के प्रयासों से मक्खियां तो कम हो रही हैं, लेकिन अब यहां डायरिया ने पैर पसार लिए हैं। तेज गर्मी और मक्खियों के कारण बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। तीन हजार की आबादी वाले गांव मेें 70 से ज्यादा बच्चे उल्टी और दस्त से पीड़ित हैं। डायरिया फैलने की जानकारी होते ही स्वास्थ्य विभाग ने गांव के आंगनबाड़ी सेंटरों पर बच्चों के लिए ओआरएस के पैकेट पहुंचवा दिए।
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अमर उजाला की टीम गुरुवार को फिर से गांव पहुंची तो हालात बिगड़े हुए मिले। गांव में प्रशासन के स्प्रे और सफाई कराने से मक्खियां कम हुई हैं, लेकिन मक्खियों ने अब अपना डेरा आंगनबाड़ी केंद्रों में जमा लिया है। इसका कारण है आंगनबाड़ी सेंटरों में सप्ताह में दो दिन मंगलवार और गुरुवार को मीठे चावल या गुलगुले बनते हैं। ऐसे में मक्खियां मीठे पर पहुंचने लगी है। खाना बनाते समय और फिर खाते समय यहां मक्खियां उड़ती रहती हैं। इससे बच्चे बीमार हो रहे हैं। इसके अलावा, गर्मी और उमस भी नुकसान पहुंचा रही है।
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आंकड़ों के मुताबिक गांव में जून माह में करीब 70 बच्चे डायरिया से पीड़ित हुए हैं। ये आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आंगनबाड़ी केेंद्रों पर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करने के बाद पेश किए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव के 70 बच्चों को ओआरएस के पैकेट भी बांटे हैं।
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गांव में स्थित दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां बनने वाले खाने के कारण् यहां बेतहाशा मक्खियां हैं। आगनबाड़ी केंद्रों पर नियुक्त आगनबाड़ी वर्कर संतोष और दर्शना देवी के अनुसार पहले की तुलना में मक्खियों की तादाद अब कम तो हुई है, लेकिन वे अभी नुकसान पहुंचा रही हैं। आंगनबाड़ी वर्करों के मुताबिक बच्चों के लिए जिस दिन मीठे गुलगुले या मीठा दलिया तैयार किया जाता है, उस दिन बहुत मुश्किल हो जाती है। मीठे के कारण पूरे दिन आंगनबाड़ी में मक्खियों का झुंड लगा रहता है।
नहीं मिली मक्खियों से निजात
ग्रामीणों के मुताबिक सफाई अभियान और दवाइयों के स्प्रे से मक्खियों की तादाद में कमी जरूर आई है, लेकिन उन्हें मक्खियों से निजात नहीं मिली। गांव की गलियों की बजाये अब घरों में मक्खियां डेरा जमाए हुए हैं। ये खाने को दूषित कर रही हैं। इससे अन्य लोग भी बीमार हो रहे हैं। इस बारे में गांव के सरपंच रामेश्वर दास का कहना है कि पहले से मक्खियां कम हुई हैं, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों में मक्खियों के कारण बच्चे बीमार हो रहे हैं। गांव में ओआरएस घोल के पैकेट बांटे गए हैं।
हम लगातार रसूलपुर पर नजर रखे हुए हैं। खुद भी गांव गए थे। गांव में ओआरएस के पैकेट बांटे गए हैं।
डॉ. संतलाल, सीएमओ
प्रशासन ने दिया था 15 दिन का समय
गांव के आसपास बने पोल्ट्री फार्मों की वजह से गांव में मक्खियों का प्रकोप है। मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे और वहां के हालात देखे। ग्रामीणों ने गांव से पलायन करके सीएम कैंप आफिस में डेरा जमा लिया था। एसडीएम योगेश कुमार के आश्वासन के बाद ग्रामीण गांव लौट गए थे। इसके बाद गांव में प्रशासन ने सफाई अभियान चलाया और दवाओं का स्प्रे भी करवाया। इससे मुक्खियां कम हुई है। इसके साथ ही पोल्ट्री फार्मों का भी निरीक्षण किया जा रहा है।