फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   administration ready for third weve

तीसरी लहर हराने के लिए प्रशासन तैयार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 28 May 2021 01:42 AM IST
विज्ञापन
administration ready for third weve
लॉकडाउन से कोरोना के केसों में बढ़ोतरी होना कम हो गया है, लेकिन लॉकडाउन इसका केवल अस्थायी समाधान है। अगर कोरोना को पूरी तरह से रोकना है तो इसका सिर्फ एक उपाय है कि लोगों को खुद जागरूक होना पड़ेगा। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर कोरोना को हराया जा सकता है। अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीनेशन कराना होगा। तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए लोगों को जागरूक करने और मेडिकल व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर रहेगा। यह कहना है मोदी के फील्ड कमांडर और डीसी धर्मेंद्र सिंह का।
विज्ञापन

अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में कोरोना की दूसरी लहर फरवरी में शुरू हो चुकी थी और मार्च तक कोरोना अपने पीक पर था, लेकिन मई की शुरुआत में जिले में स्थिति बेकाबू होने लगी थी। स्थिति यह हुई कि लोगों को बेड नहीं मिल रहे थे, ऑक्सीजन की किल्लत होने लगी। पानीपत के मरीजों के अलावा दिल्ली तक के मरीज यहां के अस्पतालों में भर्ती होने लगे। हालात बिल्कुल बेकाबू होते जा रहे थे। कुछ लोगों ने आपदा को अवसर बनाते हुए रेमडेसिविर इंजेक्शन के अलावा दूसरी दवाओं की कालाबाजारी शुरू कर दी। इन पर अंकुश लगाने के साथ ही कम समय और विकट परिस्थितियों में जिले की स्थिति को संभाला और हर मरीज को बेहतर इलाज देने की दिशा में दिन रात 18 से 24 घंटे तक काम किया है। हर चीज की बारीकी से रिपोर्ट स्टडी करने के बाद उस पर फैसला लिया। सुबह 5 बजे से लेकर रात के दो बजे तक भी ऑक्सीजन की डिमांड के लिए कॉल आते थे। स्थित को देखते हुए महज 20 दिन में रिफाइनरी के पास 500 ऑक्सीजन बेड का कोविड अस्पताल तैयार किया गया। आइसोलेशन वार्ड बनाए गए। लोगों को घरों में आइसोलेट होने के लिए जागरूक किया गया। रिफाइनरी और दूसरे उद्योगों से उत्पादित ऑक्सीजन को नियंत्रण में लेकर ऑक्सीजन उपलब्ध कराई गई। लोगों को घरों पर ही मेडिकल सुविधाएं दी जाने लगीं। आज से दस दिन पहले जो हालात थे, अब उससे बिल्कुल विपरीत और नियंत्रण में हैं।
विज्ञापन

जब परिवार संक्रमण से घिरा तो और बढ़ी मुश्किलें
डीसी धर्मेंद्र सिंह बताते हैं कि उनके परिवार में सभी लोग कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। यहां तक कि घर में काम करने वाले नौकर तक संक्रमण की चपेट में थे। ऐसे में सिर्फ वे अकेले ही बचे थे। एक तरफ परिवार की चिंता थी तो दूसरी तरफ पूरे जिले की। वैक्सीन की दोनों डोज लगवाई, जिसकी बदौलत वे संक्रमण से बच सके। परिवार के सभी सदस्यों को आइसोलेट किया और खुद को अलग आइसोलेट किया। घर के बाहर से ही छत पर जाने के लिए अलग से सीढ़ियां लगवाई। ऑफिस में पूरा दिन काम करने के बाद घर में आइसोलेशन में रहते हुए रात दो-दो बजे तक काम किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिले में मौतों को देख हुआ दुख
कई केसों में कुछ बच्चे अनाथ तक हो गए। एक ही घर में कई लोगों की संक्रमण से मौत हो गई। ये सब देखकर काफी दुख हुआ और अफसोस भी। लोग कभी डेड बॉडी के लिए फोन करते तो कभी दवा और ऑक्सीजन की डिमांड करते, जिसके लिए निरंतर प्रयास किए गए और अब हम इस जंग में जीत की ओर अग्रसर हैं। जिले के पास हर सुविधा पर्याप्त मात्रा में है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed