प्रशासन के दावे फेल, स्टड का काम अधूरा
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करनाल जिले के इंद्री क्षेत्र में यमुना किनारे बने कई स्टड खस्ता हालत में हैं और उनके पत्थर भी बिखरे पड़े हैं। ऐसे में अगर बाढ़ आ जाए तो आसपास के गांवों को डूबने से कोई नहीं बचा सकता। अबकी बार मौसम विभाग ज्यादा बरसात आने के दावे कर रहा है अगर बरसात अनुमान के मुताबिक हुई तो यमुना में जल स्तर काफी बढ़ेगा। दो दिनों से यमुना में पानी कुछ हजार क्यूसिक ही रहा, इसी पानी से लोगों की सांसे फूल गई। यमुना क्षेत्र में कुछ स्टडों पर निर्माण कार्य जारी है। प्रशासन अब केवल यमुना में बाढ़ को रोकने के प्रयासों मे लगे है। केवल 30 हजार क्यूसिक पानी ने ही इतना भूमि कटाव कर दिया तो लाखों क्यूसिक पानी आने पर क्या हाल होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है।
हथनीकुंड बैराज से छोड़े गये करीब 30 हजार क्यूसिक पानी किसानों की चिंता बढ़ गई है और पानी ने यमुना के किनारों को काटना शुरू कर दिया है। किसानों की सैकड़ों एकड़ सब्जी की फसल बर्बाद हो गई। यमुना क्षेत्र के लोगों को अब पुराने तबाही वाले दिन याद आने लगे है। लोग डरे हुए है और सरकार के आश्वासन को छोड़कर भगवान से रहम मांग रहे हैं। यमुना क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यमुना की एक बार की तबाही से उनका भारी नुकसान हो जाता है। प्रशासन केवल आश्वासन परोस देता है। मुआवजे के नाम पर फूटी कोड़ी भी नहीं मिलती।
क्या कहते हैं किसान
किसान रमेश लबकरी ने बताया कि हमारे यहां अभी तक यमुना में आये पानी को देखने के लिए सरकार का काई भी नुमाइंदा नहीं आया। रही स्टड वाली बात अब तक तो केवल पुराने पत्थर ही यमुना नदी के किनारे पड़े है। हमारे यहां 10-15 एकड़ जमीन है। दो-तीन दिन पहले यमुना में पानी आने से यमुना नदी में लगी सब्जियां खराब हो गई। आनन फानन में कुछ किसानों ने जान जोखिम में डालकर सब्जियां तोड़ी लेकिन नुकसान ज्यादा रहा।
ग्रामीण कुलदीप ने बताया कि बाढ़ से स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि पशुओं के लिए चारा व तुड़ी सारी खराब हो जाती है और जन जीवन अस्त पस्त हो जाता है। किसान देवेंद्र ने बताया कि पानी आने से सारी सब्जियां खराब हो गई है। आने वाले समय में पानी आने से हमारे घरों में सांप और जहरीले जीव जंतु घुसने से खतरों का सामना करना पड़ता है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन मनीष ने कहा कि नहर में पानी बढ़ा है। बाढ़ बचाव के इंतजाम पूरे हैं और जो स्टड पर काम रह गया है उनका शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।