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10. हड़ताल को एक माह बीता, लेकिन मांगों पर नहीं बनी सहमति
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करनाल। आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स की हड़ताल को शनिवार को एक माह बीत गए। लेकिन, उनकी मांगों पर अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई। हड़ताल के दौरान सीएम समेत महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ चार बार बैठक के अलावा प्रदेश स्तरीय रैली भी हो चुकी है। अब सोमवार को पांचवीं बार अधिकारियों ने बातचीत के लिए चंडीगढ़ बुलाया है। यदि अब भी समाधान नहीं निकला तो 12 जनवरी को सभी जिलों में आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर जेल भरो आंदोलन करेंगी।
करनाल में आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन के बैनर तले धरने पर बैठीं कर्मियों का कहना है कि केंद्रों के बेहतर संचालन, अपने मेहनताने और जीवन सुरक्षा के हक को लेकर वह लड़ाई लड़ रही हैं। सरकार उनकी की सुध ले और हठधर्मिता छोड़कर लंबित मांगों को जल्द लागू करे।
धरने की अध्यक्षता कर रही निसिंग की उपप्रधान सुनीता ने बताया कि आठ दिसंबर को सीएम सिटी में धरना शुरू किया था। धरने पर सुनीता, रीना, सीटु जिला प्रधान सतपाल सैनी और हुडा यूनियन के राज्य वरिष्ठ उपप्रधान सेवा राम, उपप्रधान ओपी माटा और बिजनेस राणा ने कहा कि तालमेल कमेटी ने एलान किया कि मांगों के समाधान होने तक हड़ताल जारी रहेगी। इस मौके पर नीलम, बबीता, ओपी माटा, ममता, सुमन, सुनीता, पिंकी, उर्मिला और नीरू मौजूद रहे। ब्यूरो
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ये हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें-
- वर्कर से सुपरवाइजर के रूप में 50 प्रतिशत की पदोन्नति बिना किसी शर्त के लागू हो।
- केंद्रों का बढ़ा किराया ग्रामीण क्षेत्र में 2000, कस्बे में 3000 और शहरों में 5000 रुपये मिले।
- वर्कर और हेल्पर की वर्दी की राशि बढ़ाकर 2000 रुपये की जाए।
- ईंधन की राशि को बढ़ाया जाए या गैस सिलिंडर विभाग भरवाकर दे।
- वर्कर और हेल्पर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले। जब तक दर्जा नहीं मिलता तब तक न्यूनतम वेतन वर्कर को 24 हजार और हेल्पर को 16 हजार रुपये मिले।
- 2018 में की गई घोषणाओं को लागू करते हुए महंगाई भत्ते की सभी किस्त मानदेय में जोड़कर दें और महंगाई भत्ते का बकाया एरियर भी तुरंत मिले।
- विभाग बिना मोबाइल फोन और अन्य संसाधन दिए ऑनलाइन काम न करवाए। इस बारे में उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन हो।
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करनाल में आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन के बैनर तले धरने पर बैठीं कर्मियों का कहना है कि केंद्रों के बेहतर संचालन, अपने मेहनताने और जीवन सुरक्षा के हक को लेकर वह लड़ाई लड़ रही हैं। सरकार उनकी की सुध ले और हठधर्मिता छोड़कर लंबित मांगों को जल्द लागू करे।
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धरने की अध्यक्षता कर रही निसिंग की उपप्रधान सुनीता ने बताया कि आठ दिसंबर को सीएम सिटी में धरना शुरू किया था। धरने पर सुनीता, रीना, सीटु जिला प्रधान सतपाल सैनी और हुडा यूनियन के राज्य वरिष्ठ उपप्रधान सेवा राम, उपप्रधान ओपी माटा और बिजनेस राणा ने कहा कि तालमेल कमेटी ने एलान किया कि मांगों के समाधान होने तक हड़ताल जारी रहेगी। इस मौके पर नीलम, बबीता, ओपी माटा, ममता, सुमन, सुनीता, पिंकी, उर्मिला और नीरू मौजूद रहे। ब्यूरो
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ये हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें-
- वर्कर से सुपरवाइजर के रूप में 50 प्रतिशत की पदोन्नति बिना किसी शर्त के लागू हो।
- केंद्रों का बढ़ा किराया ग्रामीण क्षेत्र में 2000, कस्बे में 3000 और शहरों में 5000 रुपये मिले।
- वर्कर और हेल्पर की वर्दी की राशि बढ़ाकर 2000 रुपये की जाए।
- ईंधन की राशि को बढ़ाया जाए या गैस सिलिंडर विभाग भरवाकर दे।
- वर्कर और हेल्पर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले। जब तक दर्जा नहीं मिलता तब तक न्यूनतम वेतन वर्कर को 24 हजार और हेल्पर को 16 हजार रुपये मिले।
- 2018 में की गई घोषणाओं को लागू करते हुए महंगाई भत्ते की सभी किस्त मानदेय में जोड़कर दें और महंगाई भत्ते का बकाया एरियर भी तुरंत मिले।
- विभाग बिना मोबाइल फोन और अन्य संसाधन दिए ऑनलाइन काम न करवाए। इस बारे में उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन हो।