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खेत में आग लगाना मतलब मां के पेट को जलाना - धनखड़
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Tue, 24 Jan 2017 11:41 PM IST
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खेत में आग लगाना मतलब मां के पेट को जलाना - धनखड़
- फोटो : Amar Ujala
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जो किसान खेतों में फसल अवशेष जलाते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि वे उस मां के पेट की हरियाली जला रहे हैं जो उनका भरण पोषण करती है। उन्हें यह भी समझना होगा कि खेतों में फसल जीवांस से पैदा होता है, अगर वे जीवांस को जला कर खत्म कर देंगे तो एक दिन उनका खेत बंजर हो जाएगा।
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यह बातें कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने जुंडला में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर आयोजित राज्यस्तरीय किसान मेला और प्रदर्शनी में किसानों को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम में फसल अवशेष प्रबंधन को प्रोत्साहित करने वाले 31 किसानों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। धनखड़ ने कहा कि यदि किसानों को बेहतर पैदावार चाहिए तो अवशेषों को जलाना बंद करे। अवशेषों जलाने से भूमि के मित्र कीट नष्ट हो जाते है। उन्होंने कहा कि एनजीटी के निर्देश पर पराली प्रबंधन पद्धतियों के प्रोत्साहन के लिए करनाल को पायलट जिले के रूप में चयनित किया गया है।
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किसानों को खाद, बीज व दवाई की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। किसानों को जोखिम फ्री होने के लिए खेत, पशु तथा अन्य प्रकार की कृषि से संबंधित सामग्री का बीमा कराने की अपील की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे बायों एनर्जी एंड बायों फ्यूल के चेयरमैन अन्ना एमके पाटिल ने कहा कि अवशेष प्रबंधन अत्याधिक गर्मी और ठंड में भूमि के तापमान नियंत्रण में सहायक है। फसल अवशेषों को कम्पोस्ट खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। वहीं मुख्य संसदीय सचिव बख्शीश सिंह विर्क ने कहा कि फसल के अवशेषों को जलाने से प्रदूषण होता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
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इसलिए किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन का प्रयोग करना चाहिए। कार्यक्रम में नीलोखेड़ी के विधायक भगवानदास कबीरपंथी ने कहा कि किसान मेले से किसानों को उन्नत किस्म की खेती के लिए अधिक से अधिक जानकारी लेनी चाहिए तथा आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग करके अच्छी पैदावार करनी चाहिए। समारोह में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखि ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में सरकार बहुत गंभीर है और इसके लिए एक अच्छी नीति बनाना चाहती है। किसानों को इस बात का पता होना चाहिए कि प्रदेश में 12.5 लाख एकड़ भूमि पर चावल की खेती की जाती है, जिसमें से लगभग 60 लाख मीट्रिक टन पराली प्राप्त होती है। प्रदेश सरकार ने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र खरीदने पर सब्सिडी देने का भी प्रावधान किया है। कृषि विभाग के निदेशक डी.के. बेहरा, उप-निदेशक डॉ. प्रदीप मील, अतिरिक्त निदेशक सुरेश गहलोत, संयुक्त निदेशक आरएस चहल, नपा असंध के चेयरमैन दीपक छाबड़ा, ब्लॉक समिति चेयरपर्सन सीमा देवी, हरप्रीत सिंह, राजेश कादियन, निसिंग खंड के सरपंच एसोसिएशन के प्रधान प्रवीन नरवाल आदि मौजूद रहे।
विशेषज्ञों ने किसानों को दी जानकारी
कार्यक्रम में किसानों को अच्छी फसल पैदा करने और फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में विशेषज्ञों ने जानकारी दी। इसमें डॉ. विजय अरोड़ा ने फसल अवशेष का मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ पर प्रभाव, संजीव नागपाल ने धान के फसल अवशेष से बायोगैस का उत्पादन, डॉ. समरसिंह ने सतत धान उत्पादन में फसल अवशेष का प्रबंधन, रवि बैरी ने फसल अवशेष प्रबंधन में मशीनों का महत्व, एसएन शुक्ला ने फसल अवशेष से इथेनोल, डॉ. हरिओम ने फसल अवशेष प्रबंधन व उपयोग, मुकेश जैन ने फसल अवशेष प्रबंधन में मशीनों का महत्व, डॉ. एमएल जाट ने फसल के अवशेष का बाजारीकरण, संजय पटेल ने फसल अवशेष को बायोफ्यूल में बदलने की तकनीक विषय पर महत्वपूर्ण जानकारियां किसानों को दी।
प्रदर्शनी में किसानों को दिखाया गया नई तकनीकी
प्रदर्शनी में किसानों को फसल अवशेष जलाने की जगह उसे फिर से मिट्टी में मिलाकर खाद की तरह उपयोग करने की सलाह दी गई। इसमें कामगर साबित होने वाले मशीनों को प्रदर्शनी में भी शामिल किया गया था। हैप्पली, मल्चर, जीरो टिल सीड, रिवर्सिबल प्लो, स्ट्रा चोपर, स्ट्रा बेलर, हे रेक, स्ट्रा रिपर, रिपर बाइन्डर, रोटावेटर जैसे मशीनों के उपयोग के बारे में बताया गया।
हरियाणा के फूल और सब्जी बिकेगा मिडिल ईस्ट में
हरियाणा में पैदा हुए फूल और सब्जी जल्द ही मिडिल ईस्ट के देशों में बिकते नजर आएंगे। इसके लिए कृषि विभाग पूरे हरियाणा को होर्टिकल्चर के रूप में डवलप करेगा। यहां के किसानों को इसकी जानकारी देने और अच्छी फसल पैदा करने के लिए विभाग प्रोत्साहित करेगा। कृषि विभाग ने अब तक 340 गांवों को होर्टिकल्चर के रूप में विकसित कर चुका हैै। कृषि मंत्री ओमपाल धनखड़ ने कहा कि फूल और सब्जियों की दिल्ली-एनसीआर में बहुत खपत है। अगर किसान चाहे तो वह अपने खेतों में धान-गेहूं लगाने कि जगह फूल और सब्जी उगाकर अधिक पैसा कमा सकता है। धनखड़ ने कहा कि हरियाणा में 90 लाख एकड़ में खेती की जाती है, अब इस क्षेत्र का 25 प्रतिशत भाग बागवानी में बदला जा रहा है। साथ ही गुडग़ांव में फूलों की मंडी भी लगाई जा रही है।