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10 रुपये का सिक्का करनाल नहीं दिल्ली और जालंधर में चलता है
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भारतीय करेंसी होने के बावजूद शहर और जिले में 10 रुपये के सिक्के लोगों के जी का जंजाल बने हुए हैं। हाल यह है कि दस रुपये सिक्का कोई लेने को तैयार नहीं है, अगर गलती से किसी ने थाम लिया तो उसके गले पड़ गया। न ही उसे फेंकते बनता है और न ही रखते। दुकानदार और आटो चालक कहते हैं कि जहां चलता हो वहां चलाइए, करनाल में यह सिक्का नहीं चलता जनाब। ऐसा नहीं है कि शासन-प्रशासन और सरकार को समस्या की जानकारी नहीं, लेकिन सभी जानबूझकर अंजान बने हैं, जिसका खामियाजा आम शहरवासी को भुगतना पड़ रहा है।
10 रुपये के सिक्के की समस्या को लेकर लगातार आ रही शिकायतों के बाद रविवार को अमर उजाला की टीम नेे भी इसकी पड़ताल की। दस रुपये के सिक्के लेकर बाजार में चलाने का प्रयास किया, लेकिन कोई इसे लेने को तैयार नहीं हुआ। दिनभर प्रयास के बाद 10 रुपये के सिक्के वापस लेकर आने पड़े। इस दौरान रिपोर्टर ने हास्पिटल चौक स्थित एक दुकान से टॉॅफी मांगी, जैसे ही दुकानदार ने दस रुपये का सिक्का देखा तो बोला-ये नहीं चलेगा। इतना ही नहीं दुकानदार ने नसीहत दे डाली, कहा कि ये सिक्के दिल्ली और जालंधर में ही चलते हैं। कुछ दिन पहले ही ढेरों सिक्के जालंधर में देकर आए हैं। इसके बाद, मुगल कैनाल स्थित दुकान पर बिस्कुट मांगा तो 10 रुपये का सिक्का देखते हुए दुकानदार ने मना कर दिया। जब उसे बताया गया कि आप ऐसा नहीं कर सकते, इस पर दुकानदार ने कहा कि, अगर नकली हुआ तो मैं क्या करूंगा। दुकानदार ने साफ कहा, दिन में 10 रुपये के सिक्के देने के लिए कई ग्राहक आते हैं, लेकिन सभी को मना ही किया जाता है। आटो चालक ने भी दस रुपये के सिक्के लेने से मना कर दिया।
रोजाना होते हैं विवाद
दस रुपये के सिक्के को लेकर बाजार में रोजाना ग्राहक व दुकानदारों में विवाद होता है। कई लोग नियमों की दुहाई भी देते हैं, लेकिन दुकानदार पैसे नहीं लेते। इसके अलावा, कई बार बैंकों में भी इसकी शिकायत की गई, लेकिन समाधान कोई नहीं हुआ। दुकानदार हमेशा ग्राहक को कहता है कि यह सिक्के नहीं चलेंगे। वहीं ग्राहक कहता है कि कैसे नहीं चलेंगे इसे लेकर नोंक झोंक में कई बार मारपीट भी हो जाती है। जबकि कानून यह है कि कोई भी दुकानदार 10 रुपये के सिक्के लेने से मना नहीं कर सकता। अगर कोई व्यक्ति 10 का सिक्का लेने से मना करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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ग्राहक नहीं लेते तो हम क्या करेेंगे : दुकानदार
एक दुकानदार ने 10 रुपये का सिक्का लेने से इंकार करते हुए कहा कि सिक्के को लेकर ग्राहक के मन में उलझन रहती है। ग्राहक सिक्का लेने से इंकार करता है तो हम भी इंकार कर देते हैं। अगर एक बार 10 रुपये का सिक्का ले लें तो बाद में उसे चलाना बड़ा मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि लोगों के अंदर सिक्का नकली होने का कम डर है, लेकिन दुकानदार व अन्य जगह ना चलने का डर ज्यादा है।
पहले बताते तो मैं आटो में बैठाता ही नहीं
ऐसे ही हालात आटो चालकों के हैं। आटो चालक भी दस रुपये का सिक्का देखते ही सवारी को बैठाने से मना कर देते हैं। अगर कोई बाद में सिक्का दिखाता है तो आटो चालक का एक ही जवाब होता है कि पहले बता देते तो बैठाता ही नहीं। वहीं, रोडवेज की बसों में भी कंडक्टर सिक्का लेने से कतरा रहे हैं।
पकड़ी गई थी नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री
प्रदेश में नकली सिक्के बनने वाली फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद हर कोई दस रुपये का सिक्का लेने से कतराता है। अगर कोई सिक्के ले भी लेता है तो लेने से पहले ही बोल देता है कि अगर नहीं चले तो आप को ही वापस करूंगा। बता दें कि वर्ष 2019 में बहादुरगढ़ व फरीदाबाद समेत अन्य स्थानों पर नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी हैं। शायद यही कारण है कि मामले में शासन प्रशासन ने भी चुप्पी साध रखी है।
भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के अनुसार, भारतीय मुद्रा को कोई भी लेने से इंकार नहीं कर सकता है, इसमें चाहे नोट हों या फिर सिक्के हों। अगर 10 रुपये के सिक्के को लेकर दिक्कत है तो इसकी लिखित में शिकायत दें। शिकायत मिलते ही संबंधित
-सुरेंद्र कुमार, एलडीएम, करनाल
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10 रुपये के सिक्के की समस्या को लेकर लगातार आ रही शिकायतों के बाद रविवार को अमर उजाला की टीम नेे भी इसकी पड़ताल की। दस रुपये के सिक्के लेकर बाजार में चलाने का प्रयास किया, लेकिन कोई इसे लेने को तैयार नहीं हुआ। दिनभर प्रयास के बाद 10 रुपये के सिक्के वापस लेकर आने पड़े। इस दौरान रिपोर्टर ने हास्पिटल चौक स्थित एक दुकान से टॉॅफी मांगी, जैसे ही दुकानदार ने दस रुपये का सिक्का देखा तो बोला-ये नहीं चलेगा। इतना ही नहीं दुकानदार ने नसीहत दे डाली, कहा कि ये सिक्के दिल्ली और जालंधर में ही चलते हैं। कुछ दिन पहले ही ढेरों सिक्के जालंधर में देकर आए हैं। इसके बाद, मुगल कैनाल स्थित दुकान पर बिस्कुट मांगा तो 10 रुपये का सिक्का देखते हुए दुकानदार ने मना कर दिया। जब उसे बताया गया कि आप ऐसा नहीं कर सकते, इस पर दुकानदार ने कहा कि, अगर नकली हुआ तो मैं क्या करूंगा। दुकानदार ने साफ कहा, दिन में 10 रुपये के सिक्के देने के लिए कई ग्राहक आते हैं, लेकिन सभी को मना ही किया जाता है। आटो चालक ने भी दस रुपये के सिक्के लेने से मना कर दिया।
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रोजाना होते हैं विवाद
दस रुपये के सिक्के को लेकर बाजार में रोजाना ग्राहक व दुकानदारों में विवाद होता है। कई लोग नियमों की दुहाई भी देते हैं, लेकिन दुकानदार पैसे नहीं लेते। इसके अलावा, कई बार बैंकों में भी इसकी शिकायत की गई, लेकिन समाधान कोई नहीं हुआ। दुकानदार हमेशा ग्राहक को कहता है कि यह सिक्के नहीं चलेंगे। वहीं ग्राहक कहता है कि कैसे नहीं चलेंगे इसे लेकर नोंक झोंक में कई बार मारपीट भी हो जाती है। जबकि कानून यह है कि कोई भी दुकानदार 10 रुपये के सिक्के लेने से मना नहीं कर सकता। अगर कोई व्यक्ति 10 का सिक्का लेने से मना करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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ग्राहक नहीं लेते तो हम क्या करेेंगे : दुकानदार
एक दुकानदार ने 10 रुपये का सिक्का लेने से इंकार करते हुए कहा कि सिक्के को लेकर ग्राहक के मन में उलझन रहती है। ग्राहक सिक्का लेने से इंकार करता है तो हम भी इंकार कर देते हैं। अगर एक बार 10 रुपये का सिक्का ले लें तो बाद में उसे चलाना बड़ा मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि लोगों के अंदर सिक्का नकली होने का कम डर है, लेकिन दुकानदार व अन्य जगह ना चलने का डर ज्यादा है।
पहले बताते तो मैं आटो में बैठाता ही नहीं
ऐसे ही हालात आटो चालकों के हैं। आटो चालक भी दस रुपये का सिक्का देखते ही सवारी को बैठाने से मना कर देते हैं। अगर कोई बाद में सिक्का दिखाता है तो आटो चालक का एक ही जवाब होता है कि पहले बता देते तो बैठाता ही नहीं। वहीं, रोडवेज की बसों में भी कंडक्टर सिक्का लेने से कतरा रहे हैं।
पकड़ी गई थी नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री
प्रदेश में नकली सिक्के बनने वाली फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद हर कोई दस रुपये का सिक्का लेने से कतराता है। अगर कोई सिक्के ले भी लेता है तो लेने से पहले ही बोल देता है कि अगर नहीं चले तो आप को ही वापस करूंगा। बता दें कि वर्ष 2019 में बहादुरगढ़ व फरीदाबाद समेत अन्य स्थानों पर नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी हैं। शायद यही कारण है कि मामले में शासन प्रशासन ने भी चुप्पी साध रखी है।
भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के अनुसार, भारतीय मुद्रा को कोई भी लेने से इंकार नहीं कर सकता है, इसमें चाहे नोट हों या फिर सिक्के हों। अगर 10 रुपये के सिक्के को लेकर दिक्कत है तो इसकी लिखित में शिकायत दें। शिकायत मिलते ही संबंधित
-सुरेंद्र कुमार, एलडीएम, करनाल