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लघु सचिवालय के घेराव पर अड़ी महिलाओं को पुलिस ने डंडों से रोका, जमकर चली खींचतान
Updated Thu, 19 Jul 2018 01:10 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के तत्वावधान में आंगनबाड़ी मदर ग्रुप की महिलाओं ने सीएम सिटी में सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। शहर में जुलूस निकालकर लघु सचिवालय के घेराव पर अड़ी महिलाओं को पुलिस ने लाठियों से रोकने की कोशिश की। इस दौरान महिलाओं और पुलिस के बीच करीब एक घंटे तक खींचतान चली। बाद में महिलाओं को बेरिकेड्स लगाकर लघु सचिवालय में घुसने से रोका गया। इस दौरान पुलिस और महिलाओं के बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई। आपाधापी में दो महिलाओं को चोटें भी आई हैं। बाद में प्रशासन की ओर से 23 जुलाई को सीएम और मंत्री कविता जैन से मीटिंग का आश्वासन मिला तो महिलाओं ने सड़क खाली कर दी।
इससे पहले, मदर ग्रुप की महिलाएं पुरानी सब्जी मंडी के ग्राउंड में एकत्रित हुई सरकार के खिलाफ जमकर गरजीं। तेज बारिश में भी आंगनबाड़ी मदर ग्रुप के पांव नहीं रुके और वे प्रदर्शन करती हुई पुरानी सब्जी मंडी से सेक्टर-12 लघु सचिवालय पहुंची। इस दौरान महिलाओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इतना ही नहीं उन्होंने सीएम के नाम का स्यापा भी पाया। शाम 4 बजे लघु सचिवालय में पहुंचने पर आक्रोश में आई आंगनबाड़ी मदर ग्रुप की महिलाओं को पुरुष पुलिस कर्मचारियों ने लाठी से रोकने की कोशिश की। इस दौरान मदर ग्रुप महिलाओं और पुलिस कर्मचारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। पुलिस कर्मचारी महिलाओं को धकेलते रहे तो वहीं, महिलाएं आगे बढ़ने का प्रयास करती रही। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव मरियम धवले व मदर ग्रुप की कमला घायल घायल हो गई। इसके बाद पुलिस ने बेरिकेड्स लगाकर मदर ग्रुप की महिलाओं को रोका। महिला वर्करों ने शाम पांच बजे तक लघु सचिवालय में ही धरना देकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन ने मुख्यमंत्री के ओएसडी भूपेश्वर दयाल के साथ 23 जुलाई को बैठक न कराकर आश्वासन दिया कि उन्हें 23 जुलाई को ही सीएम और महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री कविता जैन से भी मुलाकात करवाई जाएगी।
जमकर निकाली सरकार पर भड़ास
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के राष्ट्रीय महासचिव मरियम धवले ने कहा कि आंगनबाड़ी परियोजना महिलाओं और बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए शुरू की गई थी, जिसमें पिछले 11 सालों से खाना बनाने वाली मदर ग्रुप की महिलाओं को मजदूरी केवल 250 रुपये प्रति महीना मिल रही है, जबकि आज के समय में एक मजदूर की एक दिन की मजदूरी 400 रुपये से कम नहीं है। ये 250 रुपये भी साल-साल भर नहीं मिलते हैं। अभी भी साल भर से मदर ग्रुप को मेहनताना नहीं मिला है, जबकि एडवांस में ईंधन, दलाई, पिसाई आदि पर महिलाओं के पैसे खर्च कराकर मुफ्त में काम करवाया जा रहा है। सविता ने कहा कि हरियाणा की सरकार ने मदर ग्रुप की महिलाओं के काम के दिन घटाकर सप्ताह में केवल 3 दिन कर दिए। इसी कड़ी में 9 दिसंबर, 2013 को रोहतक में भारी तादाद में इकट्ठे होकर रोष प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार के साथ मेहनताना 1 रुपये से बढ़ाकर 1.60 रुपये प्रति बच्चा करने पर सहमति बनी थी। इसे लागू करवाने के लिए भी कई बार धरने प्रदर्शन किए। अप्रैल 2015 में जैसे ही ये लागू हुआ भाजपा सरकार ने आते ही मदर ग्रुप के काम के दिन घटा दिए। करनाल में प्रदर्शन के बाद 2 फरवरी 17 को सीएम ने मदर ग्रुप की मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया, लेकिन इन आश्वासनों को आज तक पूरा नहीं किया गया है। 29 जून को मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी परंतु मुख्यमंत्री का रवैया महिलाओं के प्रति बेहद ही नकारात्मक था।
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मांगें नहीं मानी तो दिल्ली में किया जाएगा प्रदर्शन
मदर ग्रुप समिति ने कहा कि अगर मांगे नहीं मानी गई तो राज्य सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। राज्य नेताओं ने एलान किया कि 4 सितंबर को नई दिल्ली में महिलाओं पर बढ़ रही हिंसा के खिलाफ तथा रोजगार की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही 9 अगस्त को किसान मजदूरों के गिरफ्तारी कार्यक्रम में
मदर ग्रुप की महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगी।
ये हैं मुख्य मांगें
मेहनताना एक रुपये से बढ़ाकर कम से कम चार रुपये प्रति बच्चा और गर्भवती महिला किया जाए। इसके अलावा 4000 रुपये फिक्स वेतन किया जाए।
- पिछला रुका हुआ मेहनताना तुरंत प्रभाव से दिया जाए और मेहनताना हर महीने पारदर्शी तरीके से दिया जाए। तीन दिन हेल्पर व तीन दिन मदर ग्रुप्स द्वारा खाना बनाने के आदेश को तुरंत वापस लिया जाए। पूरा सप्ताह मदर ग्रुप को काम दिया जाए। राशन बनाने के लिए गैस सिलिंडर की सब्सिडी सीधे मदर ग्रुप के खाते में डाली जाए तथा दलिया दलाई, आटा पिसाई, मसाला, आलू आदि का रेट बाजार भाव के अनुसार दिया जाए।
आंगनबाड़ी में खाना बनाने वाली सभी महिलाओं का पंजीकरण किया जाए। अलग-अलग जगहों पर हटाई गई महिलाओं को काम पर वापस लिया जाए। मदर ग्रुप्स की सभी महिलाओं का खाता खोला जाए और मेहनताना सीधा खाते में डाला जाए। राशन बनाने वाली मदर ग्रुप की वर्कर्स को बी.पी.एल की श्रेणी में रखा जाए और सभी महिलाओं का बीमा किया जाए।
जिला पुलिस की रही लापरवाही, महिला पुलिस कर्मी थी नाममात्र
प्रदर्शन के दौरान जिला पुलिस की लापरवाही सामने आई है। प्रशासन को पहले ही पता था कि प्रदेशभर की आंगनबाड़ी मदर ग्रुप महिलाएं प्रदर्शन करेंगी। उनकी संख्या के अनुसार जिला पुलिस ने मात्र 10 के करीब ही महिला पुलिस कर्मी तैनात की। इस लिए पुरुष पुलिस कर्मियों ने उन महिलाओं के साथ धक्का मुक्की की। इससे मदर ग्रुप की महिलाओं में जिला पुलिस के प्रति भारी रोष प्रकट किया।
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करनाल। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के तत्वावधान में आंगनबाड़ी मदर ग्रुप की महिलाओं ने सीएम सिटी में सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। शहर में जुलूस निकालकर लघु सचिवालय के घेराव पर अड़ी महिलाओं को पुलिस ने लाठियों से रोकने की कोशिश की। इस दौरान महिलाओं और पुलिस के बीच करीब एक घंटे तक खींचतान चली। बाद में महिलाओं को बेरिकेड्स लगाकर लघु सचिवालय में घुसने से रोका गया। इस दौरान पुलिस और महिलाओं के बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई। आपाधापी में दो महिलाओं को चोटें भी आई हैं। बाद में प्रशासन की ओर से 23 जुलाई को सीएम और मंत्री कविता जैन से मीटिंग का आश्वासन मिला तो महिलाओं ने सड़क खाली कर दी।
इससे पहले, मदर ग्रुप की महिलाएं पुरानी सब्जी मंडी के ग्राउंड में एकत्रित हुई सरकार के खिलाफ जमकर गरजीं। तेज बारिश में भी आंगनबाड़ी मदर ग्रुप के पांव नहीं रुके और वे प्रदर्शन करती हुई पुरानी सब्जी मंडी से सेक्टर-12 लघु सचिवालय पहुंची। इस दौरान महिलाओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इतना ही नहीं उन्होंने सीएम के नाम का स्यापा भी पाया। शाम 4 बजे लघु सचिवालय में पहुंचने पर आक्रोश में आई आंगनबाड़ी मदर ग्रुप की महिलाओं को पुरुष पुलिस कर्मचारियों ने लाठी से रोकने की कोशिश की। इस दौरान मदर ग्रुप महिलाओं और पुलिस कर्मचारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। पुलिस कर्मचारी महिलाओं को धकेलते रहे तो वहीं, महिलाएं आगे बढ़ने का प्रयास करती रही। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव मरियम धवले व मदर ग्रुप की कमला घायल घायल हो गई। इसके बाद पुलिस ने बेरिकेड्स लगाकर मदर ग्रुप की महिलाओं को रोका। महिला वर्करों ने शाम पांच बजे तक लघु सचिवालय में ही धरना देकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन ने मुख्यमंत्री के ओएसडी भूपेश्वर दयाल के साथ 23 जुलाई को बैठक न कराकर आश्वासन दिया कि उन्हें 23 जुलाई को ही सीएम और महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री कविता जैन से भी मुलाकात करवाई जाएगी।
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जमकर निकाली सरकार पर भड़ास
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के राष्ट्रीय महासचिव मरियम धवले ने कहा कि आंगनबाड़ी परियोजना महिलाओं और बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए शुरू की गई थी, जिसमें पिछले 11 सालों से खाना बनाने वाली मदर ग्रुप की महिलाओं को मजदूरी केवल 250 रुपये प्रति महीना मिल रही है, जबकि आज के समय में एक मजदूर की एक दिन की मजदूरी 400 रुपये से कम नहीं है। ये 250 रुपये भी साल-साल भर नहीं मिलते हैं। अभी भी साल भर से मदर ग्रुप को मेहनताना नहीं मिला है, जबकि एडवांस में ईंधन, दलाई, पिसाई आदि पर महिलाओं के पैसे खर्च कराकर मुफ्त में काम करवाया जा रहा है। सविता ने कहा कि हरियाणा की सरकार ने मदर ग्रुप की महिलाओं के काम के दिन घटाकर सप्ताह में केवल 3 दिन कर दिए। इसी कड़ी में 9 दिसंबर, 2013 को रोहतक में भारी तादाद में इकट्ठे होकर रोष प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार के साथ मेहनताना 1 रुपये से बढ़ाकर 1.60 रुपये प्रति बच्चा करने पर सहमति बनी थी। इसे लागू करवाने के लिए भी कई बार धरने प्रदर्शन किए। अप्रैल 2015 में जैसे ही ये लागू हुआ भाजपा सरकार ने आते ही मदर ग्रुप के काम के दिन घटा दिए। करनाल में प्रदर्शन के बाद 2 फरवरी 17 को सीएम ने मदर ग्रुप की मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया, लेकिन इन आश्वासनों को आज तक पूरा नहीं किया गया है। 29 जून को मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी परंतु मुख्यमंत्री का रवैया महिलाओं के प्रति बेहद ही नकारात्मक था।
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मांगें नहीं मानी तो दिल्ली में किया जाएगा प्रदर्शन
मदर ग्रुप समिति ने कहा कि अगर मांगे नहीं मानी गई तो राज्य सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। राज्य नेताओं ने एलान किया कि 4 सितंबर को नई दिल्ली में महिलाओं पर बढ़ रही हिंसा के खिलाफ तथा रोजगार की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही 9 अगस्त को किसान मजदूरों के गिरफ्तारी कार्यक्रम में
मदर ग्रुप की महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगी।
ये हैं मुख्य मांगें
मेहनताना एक रुपये से बढ़ाकर कम से कम चार रुपये प्रति बच्चा और गर्भवती महिला किया जाए। इसके अलावा 4000 रुपये फिक्स वेतन किया जाए।
- पिछला रुका हुआ मेहनताना तुरंत प्रभाव से दिया जाए और मेहनताना हर महीने पारदर्शी तरीके से दिया जाए। तीन दिन हेल्पर व तीन दिन मदर ग्रुप्स द्वारा खाना बनाने के आदेश को तुरंत वापस लिया जाए। पूरा सप्ताह मदर ग्रुप को काम दिया जाए। राशन बनाने के लिए गैस सिलिंडर की सब्सिडी सीधे मदर ग्रुप के खाते में डाली जाए तथा दलिया दलाई, आटा पिसाई, मसाला, आलू आदि का रेट बाजार भाव के अनुसार दिया जाए।
आंगनबाड़ी में खाना बनाने वाली सभी महिलाओं का पंजीकरण किया जाए। अलग-अलग जगहों पर हटाई गई महिलाओं को काम पर वापस लिया जाए। मदर ग्रुप्स की सभी महिलाओं का खाता खोला जाए और मेहनताना सीधा खाते में डाला जाए। राशन बनाने वाली मदर ग्रुप की वर्कर्स को बी.पी.एल की श्रेणी में रखा जाए और सभी महिलाओं का बीमा किया जाए।
जिला पुलिस की रही लापरवाही, महिला पुलिस कर्मी थी नाममात्र
प्रदर्शन के दौरान जिला पुलिस की लापरवाही सामने आई है। प्रशासन को पहले ही पता था कि प्रदेशभर की आंगनबाड़ी मदर ग्रुप महिलाएं प्रदर्शन करेंगी। उनकी संख्या के अनुसार जिला पुलिस ने मात्र 10 के करीब ही महिला पुलिस कर्मी तैनात की। इस लिए पुरुष पुलिस कर्मियों ने उन महिलाओं के साथ धक्का मुक्की की। इससे मदर ग्रुप की महिलाओं में जिला पुलिस के प्रति भारी रोष प्रकट किया।