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बाढ़ से बचाव को चार करोड़ रुपये की लागत से यमुना नदी में लगाए जाएंगे स्टोर स्टड
Updated Tue, 22 May 2018 12:36 AM IST
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बाढ़ से बचाव के लिए चार करोड़ की लागत से बनाएंगे पत्थर के बांध
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। मानसून में संभावित बाढ़ से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यमुना के साथ लगते क्षेत्र में 2 नए स्टोन स्टड (पत्थर की ठोकरें) बनाने, नौ की मरम्मत व 627 फुट पत्थरों के सहारे दीवार तैयार करवाने का कार्य प्रगति पर चल रहा है। आगामी 30 जून तक ये कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इन पर 4 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन कार्यों को समय पर पूरा करने को लेकर डीसी ने निर्देश जारी किए हैं।
यमुना नदी करनाल के पूर्व में स्थित है, जो उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है। इसका बहाव क्षेत्र करीब 11 किलोमीटर तक फैला है। बाढ़ की स्थिति में अतिरिक्त पानी की निकासी करने के लिए जिले में 44 ड्रेनों का नेटवर्क है, जो 306 किलोमीटर लंबाई तक फैली हैं। असंध, नीलोखेड़ी, करनाल, निसिंग व इंद्री ब्लॉक को कवर करती हैं।
बीते वर्षों में जिले में फ्लड का इतिहास
1978 में यमुना में 7.14 लाख क्यूसिक पानी आया। वर्ष 2010 में यह 7.45 लाख क्यूसिक रिकॉर्ड किया गया था, जिसने 48 साल का रिकॉर्ड तोड़ा था। इसी प्रकार वर्ष 2013 में ताजे वाला हेड से यमुना में 8 लाख, 6 हजार 464 क्यूसिक पानी छोड़ा गया था, जिससे करनाल के कुछ हिस्से प्रभावित हुए थे। वर्ष 2014 में 1 लाख, 28 हजार 339 क्यूसिक व वर्ष 2015 में 1 लाख 1 हजार 360 क्यूसिक पानी छोड़ा गया था। वर्ष 2017 में 1 लाख, 47 हजार क्यूसिक पानी यमुना में आया।
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यह हैं जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
यमुना नदी के साथ लगते नबियाबाद, सैयद छपरा, जपती छपरा, गढ़पुर टापू, खिराजपुर, कुंडा कलां, जम्मूखाला, बलेड़ा, चंद्रों तथा शेरगढ़ टापू ऐसे गांव हैं जो यमुना की चपेट में आ जाते हैं। दूसरी ओर, यमुना की बाढ़ से चोगावां, नग्गल, हंसूमाजरा, डबकोली कलां, हलवाना, कमालपुर गडरियां, सदरपुर, मुंडीगढ़ी, बड़सत, फरीदपुर, लालूपुरा, गढ़ीबरल, बराना, बहलोलपुर, डेरा खोकीपुर, खुखनी, डबरकीपार, जड़ौली, देवीपुर, नबीपुर, नसीरपुर, मुस्तफाबाद, पीर बडौली, डबकोली खुर्द, नगली, तातारपुर व कलसोरा गांव भी बाढ़ से प्रभावित हो जाते हैं।
जिले में हैं छह रिंग बांध
जिले में 6 रिंग बांध हैं, जिनकी देखरेख की जाती है। यह राहड़ा, बंदराला, बाहरी, अरडाना, गंगाटेहड़ी व कमालपुर गडरियां हैं। बाढ़ से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में रेत से भरे बैग सिंचाई विभाग के मेरठ रोड़ स्थित स्टोर में उपलब्ध रहेंगे जो जरूरत के समय जगहों पर सहायतार्थ भेजे जाएंगे। बाढ़/बारिश के पानी को निकालने के लिए खेड़ी मानसिंह में एक स्थाई पम्प हाउस है। दो स्थाई पंप हाउस बल्ला व सुल्तानपुर में भी बनाए गए हैं। जिला में 41 डीजल पंप व 40 विद्युत चालित पम्प भी हैं। मानसून से पहले इनकी मरम्मत सुनिश्चित की जाती है।
कब कितनी हुई बारिश
गत करीब डेढ़ दशक से जिले में बारिश का रिकॉर्ड भिन्न रहा है। इसके तहत, वर्ष 2017 में जिले में सर्वाधिक 2697 एमएम बारिश हुई, जबकि 2007 में मात्र 297 एमएम हुई थी। इसी प्रकार, 2016 में 1647 एमएम, 2013 में 742 एमएम, 2010 में 715 एमएम, 2012 में 675 एमएम और 2015 में 618 एमएम हुई। वर्ष 2014 में 569 एमएम, 2008 में 502 एमएम, 2011 में 424 एमएम, 2009 में 430 एमएम, 2006 में 415 एमएम और 2005 में 405 एमएम बारिश हुई। चालू वर्ष 2018 में बीती अप्रैल तक 167 एमएम बारिश हो चुकी है।
प्रशासन पूरी तरह से तैयार : डीसी
डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि फ्लड कंट्रोल रूम व चेतावनी सिस्टम के सुचारु रूप से कार्य के लिए, इंद्री के गढ़पुर टापू, कुंजपुरा के जम्मूखाला व घरौंडा के मुंडीगढ़ी कॉम्पलेक्स में वायरलेस स्टेशन रहेंगे। जिला में बाढ़ राहत मशीनरी/यंत्रों की उपलब्धता व प्रशिक्षित कर्मचारी भी हैं। इनमें 15 किश्तियां, 6 ओबीएम यानि बोट इंजन, 65 चप्पू, 54 कुंडे, 92 लाइफ जैकट, 3 ट्रेलर, 1 टूल किट व 8 आयल टैंकर भी वर्किंग कंडीशन में उपलब्ध हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। मानसून में संभावित बाढ़ से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यमुना के साथ लगते क्षेत्र में 2 नए स्टोन स्टड (पत्थर की ठोकरें) बनाने, नौ की मरम्मत व 627 फुट पत्थरों के सहारे दीवार तैयार करवाने का कार्य प्रगति पर चल रहा है। आगामी 30 जून तक ये कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इन पर 4 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन कार्यों को समय पर पूरा करने को लेकर डीसी ने निर्देश जारी किए हैं।
यमुना नदी करनाल के पूर्व में स्थित है, जो उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है। इसका बहाव क्षेत्र करीब 11 किलोमीटर तक फैला है। बाढ़ की स्थिति में अतिरिक्त पानी की निकासी करने के लिए जिले में 44 ड्रेनों का नेटवर्क है, जो 306 किलोमीटर लंबाई तक फैली हैं। असंध, नीलोखेड़ी, करनाल, निसिंग व इंद्री ब्लॉक को कवर करती हैं।
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बीते वर्षों में जिले में फ्लड का इतिहास
1978 में यमुना में 7.14 लाख क्यूसिक पानी आया। वर्ष 2010 में यह 7.45 लाख क्यूसिक रिकॉर्ड किया गया था, जिसने 48 साल का रिकॉर्ड तोड़ा था। इसी प्रकार वर्ष 2013 में ताजे वाला हेड से यमुना में 8 लाख, 6 हजार 464 क्यूसिक पानी छोड़ा गया था, जिससे करनाल के कुछ हिस्से प्रभावित हुए थे। वर्ष 2014 में 1 लाख, 28 हजार 339 क्यूसिक व वर्ष 2015 में 1 लाख 1 हजार 360 क्यूसिक पानी छोड़ा गया था। वर्ष 2017 में 1 लाख, 47 हजार क्यूसिक पानी यमुना में आया।
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यह हैं जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
यमुना नदी के साथ लगते नबियाबाद, सैयद छपरा, जपती छपरा, गढ़पुर टापू, खिराजपुर, कुंडा कलां, जम्मूखाला, बलेड़ा, चंद्रों तथा शेरगढ़ टापू ऐसे गांव हैं जो यमुना की चपेट में आ जाते हैं। दूसरी ओर, यमुना की बाढ़ से चोगावां, नग्गल, हंसूमाजरा, डबकोली कलां, हलवाना, कमालपुर गडरियां, सदरपुर, मुंडीगढ़ी, बड़सत, फरीदपुर, लालूपुरा, गढ़ीबरल, बराना, बहलोलपुर, डेरा खोकीपुर, खुखनी, डबरकीपार, जड़ौली, देवीपुर, नबीपुर, नसीरपुर, मुस्तफाबाद, पीर बडौली, डबकोली खुर्द, नगली, तातारपुर व कलसोरा गांव भी बाढ़ से प्रभावित हो जाते हैं।
जिले में हैं छह रिंग बांध
जिले में 6 रिंग बांध हैं, जिनकी देखरेख की जाती है। यह राहड़ा, बंदराला, बाहरी, अरडाना, गंगाटेहड़ी व कमालपुर गडरियां हैं। बाढ़ से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में रेत से भरे बैग सिंचाई विभाग के मेरठ रोड़ स्थित स्टोर में उपलब्ध रहेंगे जो जरूरत के समय जगहों पर सहायतार्थ भेजे जाएंगे। बाढ़/बारिश के पानी को निकालने के लिए खेड़ी मानसिंह में एक स्थाई पम्प हाउस है। दो स्थाई पंप हाउस बल्ला व सुल्तानपुर में भी बनाए गए हैं। जिला में 41 डीजल पंप व 40 विद्युत चालित पम्प भी हैं। मानसून से पहले इनकी मरम्मत सुनिश्चित की जाती है।
कब कितनी हुई बारिश
गत करीब डेढ़ दशक से जिले में बारिश का रिकॉर्ड भिन्न रहा है। इसके तहत, वर्ष 2017 में जिले में सर्वाधिक 2697 एमएम बारिश हुई, जबकि 2007 में मात्र 297 एमएम हुई थी। इसी प्रकार, 2016 में 1647 एमएम, 2013 में 742 एमएम, 2010 में 715 एमएम, 2012 में 675 एमएम और 2015 में 618 एमएम हुई। वर्ष 2014 में 569 एमएम, 2008 में 502 एमएम, 2011 में 424 एमएम, 2009 में 430 एमएम, 2006 में 415 एमएम और 2005 में 405 एमएम बारिश हुई। चालू वर्ष 2018 में बीती अप्रैल तक 167 एमएम बारिश हो चुकी है।
प्रशासन पूरी तरह से तैयार : डीसी
डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि फ्लड कंट्रोल रूम व चेतावनी सिस्टम के सुचारु रूप से कार्य के लिए, इंद्री के गढ़पुर टापू, कुंजपुरा के जम्मूखाला व घरौंडा के मुंडीगढ़ी कॉम्पलेक्स में वायरलेस स्टेशन रहेंगे। जिला में बाढ़ राहत मशीनरी/यंत्रों की उपलब्धता व प्रशिक्षित कर्मचारी भी हैं। इनमें 15 किश्तियां, 6 ओबीएम यानि बोट इंजन, 65 चप्पू, 54 कुंडे, 92 लाइफ जैकट, 3 ट्रेलर, 1 टूल किट व 8 आयल टैंकर भी वर्किंग कंडीशन में उपलब्ध हैं।