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कर्मचारी घर-घर जाकर जनता को बताएंगे सरकार की वादा खिलाफी
Updated Sun, 23 Jul 2017 10:42 PM IST
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कर्मचारी घर-घर जाकर जनता को बताएंगे सरकार की वादा खिलाफी
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। विभिन्न मांगों व सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा सीएम सिटी में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा द्वारा डाला गया दो दिवसीय महापड़ाव रविवार को सरकार से मिले वार्ता प्रस्ताव के साथ समाप्त हुआ। संघ के प्रतिनिधि मंडल को सीएम ने 9 अगस्त को वार्ता करने के लिए बुलाया है। वहीं सर्व कर्मचारी संघ ने वार्ता तक अपने आंदोलन को स्थगित कर अब अपनी समस्याओं व मांगों को जनता की अदालत तक ले जोने का फैसला किया है। जिसके तहत संघ के सदस्य गांवों, कस्बों व शहरों में जन सभाएं आयोजित कर सरकार की वादाखिलाफी व जन सेवाओं के विभागों मे लागू की जा रही आऊटसोर्सिंग व निजीकरण की नीतियों को बताएंगे।इसकी घोषणा सामूहिक पड़ाव के समापन पर बोलते हुए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान धर्मबीर सिंह ने किया । उन्होंने कहा कि जनवरी, 2006 से लागू नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस ) को रद्द करवाने, पार्ट टाइम, डीसी रेट अनुबंध पर लगे कर्मचारियों को पक्का करवाने व समान काम के लिए समान वेतन देने आदि की मांग को लेकर अगस्त माह में राज्य स्तरीय कार्यकर्ता समेलन और सितबर व अक्तूबर मे जिला एंव खंड स्तरीय सम्मेलन किये जायेंगे और नवंबर माह मे राज्य स्तर पर प्रदर्शन किया जायेगा। सामूहिक पड़ाव में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में अखिल भारतीय किसान सभा के 3 से 7 अक्तूबर तक हिसार में होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन व रैली का तन मन धन से सहयोग एवीं समर्थन करने का ऐलान किया गया । एक अन्य प्रस्ताव में निदेशक, महिला एंव बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के धरने-प्रदर्शन पर रोक लगाने व पीओ करनाल द्वारा इस बाबत दर्जनों कार्यकर्ताओं को बर्खास्तगी करने के नोटिस देने की निन्दा करते हुए अलोकतांत्रिक पत्र व नोटिस को वापस लेने की मांग की । मंच से महासचिव सुभाष लाबा ने सरकार व शिक्षा विभाग को चेतावनी दी कि अगर आमरण अनशन पर बेठे जेबीटी टीचरों के साथ कोई अनहोनी हुई तो विभिन्न विभागों के लाखों कर्मचारी सरकार को चैन से नहीं बैठने देंगे। सामूहिक पड़ाव को सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, मुख्य संगठनकर्ता बीरेन्द्र डंगवाल, उप महासचिव जीवन सिंह, प्रेस प्रवक्ता इन्द्र सिंह बधाना, उप प्रधान सबिता, ऑडिटर सतीश सेठी, बिजली यूनियन के महासचिव नरेश कुमार, उपाध्यक्ष एन पी सिंह चौहान, जिला प्रधान ओमप्रकाश सिंहमार, जिला सचिव कृष्ण शर्मा, सह-सचिव सुशील गुर्जर, मकैनिकल वर्कर यूनियन के महासचिव शीलक राम मलिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन के महासचिव दलेल सिंह, रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव राजेन्द्र अहलावत व वाईपी गुप्ता, एमपीएचई एसोसिएशन की प्रधान लाजवंती बेवाल आदि ने संबोधित किया।
-अल्टीमेटम के बाद वार्ता का प्रस्ताव लेकर पहुंचे नायब तहसीलदार
-सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के नेतृत्व ने शनिवार को सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि पड़ाव समाप्ति से पहले तक अगर सरकार की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया तो बड़े आंदोलन का ऐलान किया जाएगा। कर्मचारियों के आक्रामक तेवरो को देखते हुए जिला प्रशासन ने सरकार से बातचीत की और 9 अगस्त को मुयमंत्री की अध्यक्षता में सरकार व सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के बीच कर्मचारियों की मांगो पर बातचीत का समय निश्चित किया। पड़ाव समापन से ठीक पहले उक्त मीटिंग का पत्र लेकर नायब तहसीलदार पड़ाव स्थल पर पहुंचे और संघ के नेताओं इसकी जानकारी दी। महासचिव सुभाष लाबा ने सरकार की वादाखिलाफी, मांगो की अनदेखी करने ,कर्मचारियों एंव टीचरो की छंटनी करने व ट्रेंड यूनियन अधिकारों पर निरंतर किये जा रहे हमलो को लेकर तहसीलदार को खुब-खरी खोटी सुनाई और कहा की सरकार के पास कर्मचारियों के आक्रोश को पहुंचाने का प्रशासन कार्य करे सामूहिक पड़ाव को अखिल भारतीय किसान सभा हरियाणा के महासचिव फूल सिंह श्योकंद ने अपने संगठन की और से कर्मचारियों की मांगो एंव आन्दोलन का पुरजोर समर्थन किया।
यह हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगे
- कर्मचारियों की प्रमुख मांगे में सभी वंचित बोर्ड, निगमों, सहकारी विभागों के नियमित व अनुबंध कर्मचारियों, पैंशनर्ज व मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, पार्ट टाइम, डीसी रेट अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों को नियमित करने, अनुबंध कर्मियों को सभी प्रकार के सामाजिक लाभ देने, आऊटसोर्सिंग नीति के विरुद्ध स्वीकृत रिक्त पदों के विरूद्ध ठेकेदार के मार्फत लगाए अनुबंध कर्मियों को सीधा विभागों के रोल पर रखने, पंजाब के समान वेतनमान देने, ठेका प्रथा समाप्त करने, अकुशल कर्मकार को 15 हजार न्यूनतम वेतनमान देने आदि चुनावी वादों को लागू करने, सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग के अनुपात में सभी प्रकार के भत्ते जनवरी 2016 से संशोधित करने, कैशलेस मेडिकल सुविधा प्रदान करने, जख्म पूर्ण कार्य करने वाले कर्मचारियों को पांच हजार रूपये जोखिम भत्ता देने, रोडवेज के रूट परमिट को निजी हाथों में देने की नीति का ड्राफ्ट वापिस लेते हुए आऊटसोर्सिंग, निजीकरण व ठेका प्रथा की नीतियों पर रोक लगाना, विभिन्न विभागों मे खाली पड़े पदों को स्थाई भर्ती से भरते हुए बेरोजगार युवाओं को रोजगार देना, भ्रष्टाचार पर रोक लगाना, श्रम कानूनो की कड़ाई से पालना करवाना सुनिश्चित करना आदि शामिल हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। विभिन्न मांगों व सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा सीएम सिटी में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा द्वारा डाला गया दो दिवसीय महापड़ाव रविवार को सरकार से मिले वार्ता प्रस्ताव के साथ समाप्त हुआ। संघ के प्रतिनिधि मंडल को सीएम ने 9 अगस्त को वार्ता करने के लिए बुलाया है। वहीं सर्व कर्मचारी संघ ने वार्ता तक अपने आंदोलन को स्थगित कर अब अपनी समस्याओं व मांगों को जनता की अदालत तक ले जोने का फैसला किया है। जिसके तहत संघ के सदस्य गांवों, कस्बों व शहरों में जन सभाएं आयोजित कर सरकार की वादाखिलाफी व जन सेवाओं के विभागों मे लागू की जा रही आऊटसोर्सिंग व निजीकरण की नीतियों को बताएंगे।इसकी घोषणा सामूहिक पड़ाव के समापन पर बोलते हुए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान धर्मबीर सिंह ने किया । उन्होंने कहा कि जनवरी, 2006 से लागू नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस ) को रद्द करवाने, पार्ट टाइम, डीसी रेट अनुबंध पर लगे कर्मचारियों को पक्का करवाने व समान काम के लिए समान वेतन देने आदि की मांग को लेकर अगस्त माह में राज्य स्तरीय कार्यकर्ता समेलन और सितबर व अक्तूबर मे जिला एंव खंड स्तरीय सम्मेलन किये जायेंगे और नवंबर माह मे राज्य स्तर पर प्रदर्शन किया जायेगा। सामूहिक पड़ाव में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में अखिल भारतीय किसान सभा के 3 से 7 अक्तूबर तक हिसार में होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन व रैली का तन मन धन से सहयोग एवीं समर्थन करने का ऐलान किया गया । एक अन्य प्रस्ताव में निदेशक, महिला एंव बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के धरने-प्रदर्शन पर रोक लगाने व पीओ करनाल द्वारा इस बाबत दर्जनों कार्यकर्ताओं को बर्खास्तगी करने के नोटिस देने की निन्दा करते हुए अलोकतांत्रिक पत्र व नोटिस को वापस लेने की मांग की । मंच से महासचिव सुभाष लाबा ने सरकार व शिक्षा विभाग को चेतावनी दी कि अगर आमरण अनशन पर बेठे जेबीटी टीचरों के साथ कोई अनहोनी हुई तो विभिन्न विभागों के लाखों कर्मचारी सरकार को चैन से नहीं बैठने देंगे। सामूहिक पड़ाव को सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, मुख्य संगठनकर्ता बीरेन्द्र डंगवाल, उप महासचिव जीवन सिंह, प्रेस प्रवक्ता इन्द्र सिंह बधाना, उप प्रधान सबिता, ऑडिटर सतीश सेठी, बिजली यूनियन के महासचिव नरेश कुमार, उपाध्यक्ष एन पी सिंह चौहान, जिला प्रधान ओमप्रकाश सिंहमार, जिला सचिव कृष्ण शर्मा, सह-सचिव सुशील गुर्जर, मकैनिकल वर्कर यूनियन के महासचिव शीलक राम मलिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन के महासचिव दलेल सिंह, रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव राजेन्द्र अहलावत व वाईपी गुप्ता, एमपीएचई एसोसिएशन की प्रधान लाजवंती बेवाल आदि ने संबोधित किया।
-अल्टीमेटम के बाद वार्ता का प्रस्ताव लेकर पहुंचे नायब तहसीलदार
-सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के नेतृत्व ने शनिवार को सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि पड़ाव समाप्ति से पहले तक अगर सरकार की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया तो बड़े आंदोलन का ऐलान किया जाएगा। कर्मचारियों के आक्रामक तेवरो को देखते हुए जिला प्रशासन ने सरकार से बातचीत की और 9 अगस्त को मुयमंत्री की अध्यक्षता में सरकार व सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के बीच कर्मचारियों की मांगो पर बातचीत का समय निश्चित किया। पड़ाव समापन से ठीक पहले उक्त मीटिंग का पत्र लेकर नायब तहसीलदार पड़ाव स्थल पर पहुंचे और संघ के नेताओं इसकी जानकारी दी। महासचिव सुभाष लाबा ने सरकार की वादाखिलाफी, मांगो की अनदेखी करने ,कर्मचारियों एंव टीचरो की छंटनी करने व ट्रेंड यूनियन अधिकारों पर निरंतर किये जा रहे हमलो को लेकर तहसीलदार को खुब-खरी खोटी सुनाई और कहा की सरकार के पास कर्मचारियों के आक्रोश को पहुंचाने का प्रशासन कार्य करे सामूहिक पड़ाव को अखिल भारतीय किसान सभा हरियाणा के महासचिव फूल सिंह श्योकंद ने अपने संगठन की और से कर्मचारियों की मांगो एंव आन्दोलन का पुरजोर समर्थन किया।
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यह हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगे
- कर्मचारियों की प्रमुख मांगे में सभी वंचित बोर्ड, निगमों, सहकारी विभागों के नियमित व अनुबंध कर्मचारियों, पैंशनर्ज व मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, पार्ट टाइम, डीसी रेट अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों को नियमित करने, अनुबंध कर्मियों को सभी प्रकार के सामाजिक लाभ देने, आऊटसोर्सिंग नीति के विरुद्ध स्वीकृत रिक्त पदों के विरूद्ध ठेकेदार के मार्फत लगाए अनुबंध कर्मियों को सीधा विभागों के रोल पर रखने, पंजाब के समान वेतनमान देने, ठेका प्रथा समाप्त करने, अकुशल कर्मकार को 15 हजार न्यूनतम वेतनमान देने आदि चुनावी वादों को लागू करने, सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग के अनुपात में सभी प्रकार के भत्ते जनवरी 2016 से संशोधित करने, कैशलेस मेडिकल सुविधा प्रदान करने, जख्म पूर्ण कार्य करने वाले कर्मचारियों को पांच हजार रूपये जोखिम भत्ता देने, रोडवेज के रूट परमिट को निजी हाथों में देने की नीति का ड्राफ्ट वापिस लेते हुए आऊटसोर्सिंग, निजीकरण व ठेका प्रथा की नीतियों पर रोक लगाना, विभिन्न विभागों मे खाली पड़े पदों को स्थाई भर्ती से भरते हुए बेरोजगार युवाओं को रोजगार देना, भ्रष्टाचार पर रोक लगाना, श्रम कानूनो की कड़ाई से पालना करवाना सुनिश्चित करना आदि शामिल हैं।
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