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Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   5000 sword hangs over the future of poor children

5000 गरीब बच्चों के भविष्य पर लटकी तलवार

Fri, 03 Jul 2015 01:06 AM IST
करनाल/अमर उजाला ब्यूरो
करनाल/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 03 Jul 2015 01:06 AM IST
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एक जुलाई से स्कूल खुलने के साथ ही 134 ए के तहत निजी स्कूलों में मुफ्त
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शिक्षा लेने का सपना संजोए बैठे  जिलेभर के करीब पांच हजार विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है। तीन महीने स्कूली शैक्षणिक सत्र 2015-16 के निकल चुके हैं। अब तक इन विद्यार्थियों को किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं मिला है।

 ऐसे में बिना स्कूल में जाए इन बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी यह चिंता का विषय बन गया है। इस मामले की 10 जुलाई को सुनवाई होनी है। जिले की बात करें तो यहां पहली से 12वीं में 134 ए के तहत दाखिला लेने के लिए 6 हजार विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 9वीं, 10वीं व 12वीं के विद्यार्थियों को 134 ए के तहत जिले में दाखिला दे दिया गया था, लेकिन शेष कक्षाओं के दाखिले पर शिक्षा विभाग पंचकूला की ओर से रोक लगा दी गई थी। वह रोक अब तक जारी है। ऐसे में यह बच्चे अब कहां जाएं और कैसे अपने सिलेबस को कवर करें यह खुद शिक्षा विभाग की समझ से बाहर है।

32 करोड़ का बनता है बजट
शिक्षा अधिनियम 134 ए के तहत प्रदेशभर में करीब 60 हजार विद्यार्थियों ने 134 ए के तहत आवेदन किया है। चंडीगढ़ में 134 ए के तहत प्रत्येक बच्चे पर प्रति माह 750 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस खर्च को 65 प्रतिशत स्टेट व 35 प्रतिशत सेंटर गवर्नमेंट वहन करती है। ऐसे में यह खर्च साढ़े 54 करोड़ रुपये बनता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रदेश में हर बच्चे पर 450 रुपये का बजट प्रति माह खर्च आएगा जो 60 हजार बच्चों पर 32 करोड़ 40 लाख रुपये बनता है। ऐसे यदि सरकार की मंशा सही है तो गरीब बच्चों के दाखिलों में कोई अड़चन न आए।

शिक्षा विभाग ने दी गलत जानकारी
2 जमा 5 जनमुद्दे की जिला प्रधान रानी कंबोज ने बताया कि करीब दो सप्ताह पहले वे इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से मिली थीं। मुख्यमंत्री ने कहा था कि यदि बजट 40 करोड़ रुपये तक का बनता है तो वह यह बजट एक दिन में ही पास कर देंगे। बाकायदा मुख्यमंत्री ने इस बारे में लिखित रूप से डिटेल भी मांगी है। रानी ने बताया कि शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री को बताया है कि बजट 100 करोड़ चाहिए, जो गलत है। चूंकि कोर्ट के आदेशों के बावजूद अब तक गरीब बच्चों को दाखिला नहीं दिया गया। उम्मीद है कि 10 जुलाई से पहले मुख्यमंत्री इस मामले को निपटा देंगे।

फैसला आने तक न ली जाए फीस
2 जमा 5 जनमुद्दे की जिला प्रधान रानी व सचिव पूजा शर्मा ने इस मामले में शिक्षा विभाग व मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि जब तक हाईकोर्ट इस मामले में अपना फैसला नहीं सुनाती, निजी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों से फीस नहीं ली जाए। साथ ही इन गरीब बच्चों को 134 ए के तहत दाखिला देने का नोटिफिकेशन जारी किया जाए। इस पूरे मामले को लेकर सदस्यों ने सीएम विंडो पर भी अपनी शिकायत दी है।
कक्षा पहली से 8वीं और 11वीं में 134 ए के तहत फिलहाल दाखिला नहीं दिया जा सका है। शिक्षा विभाग की ओर से जब तक आदेश नहीं आते तब तक हम दाखिला नहीं दिला सकते। जैसे ही शिक्षा विभाग 134 ए के तहत इन कक्षाओं में दाखिले के आदेश देगा, हम बच्चों को दाखिला दिला देंगे। अब बच्चों की पढ़ाई और सिलेबस कैसे पूरा होगा। इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
- सरोज बाला गुर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, करनाल।
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