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400 प्रतिभागियों ने किया डेयरी चुनौतियों पर मंथन

Sat, 24 Sep 2016 11:52 PM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला Updated Sat, 24 Sep 2016 11:52 PM IST
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400 participants to brainstorm on the challenges dairy
400 प्रतिभागियों ने किया डेयरी चुनौतियों पर मंथन - फोटो : अमर उजाला
एनडीआरआई में ग्रेजुएट्स एसोसिएशन के सहयोग से भारतीय दुग्ध एवं खाद्य क्षेत्र की भविष्य में आने वाली चुनौतियों एवं समाधान विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को समापन हो गया। इसमें मिल्क फेडरेशन पंजाब के प्रबंध निदेशक मनजीत सिंह बराड़ आईएएस ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और संस्थान के निदेशक डा. एके श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। देश विदेश से आए डेयरी उद्योग से जुड़े करीब 400 प्रतिभागियों ने दुग्ध एवं खाद्य क्षेत्र के तमाम पहलुओं पर मंथन किया और नई नई सिफारिशें लागू की। डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि फूड और डेयरी सेक्टर को अलग नहीं किया जा सकता।
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हिंदुस्तान विश्व का सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला देश है और दुनिया के कुल दुग्ध उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।  उन्होंने कहा कि कृषि एवं डेयरी सेक्टर में अनेक चुनौतियां है। मुख्यरूप से हमारे पास 140 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि है और इसमें से 50 प्रतिशत ऐसी है तो वर्षा पर आधारित है। लेकिन वर्ष 2050 में हिंदुस्तान की जनसंख्या 174 करोड़ हो जाएगी, ऐसे में बढ़ती जनसंख्या की खाद्य डिमांड पूरा करने के लिए 70 से 80 प्रतिशत अधिक अनाज पैदा करना होगा। इस सेमिनार में वैज्ञानिक, डेयरी, फार्मा सेक्टर, केंद्र और राज्य सरकार के संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी, सहकारी और निजी क्षेत्र मुख्य कार्यकारी अधिकारी, किसान संगठनों, ग्रामीण विकास एजेंसियों से प्रख्यात लोग एक मंच पर दिखे। निश्चित रूप से इस सेमिनार के भविष्य में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
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आईएएस मनजीत सिंह बराड़ ने कहा कि आज भारत डेयरी क्षेत्र में विशाल अवसरों की दहलीज पर खड़ा है। सवा सौ करोड़ की जनसंख्या के साथ भारत विश्व में सबसे बड़े बढ़ते हुए उपभोक्ता बाजारों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। बराड़ ने कहा कि डेयरी क्षेत्र में मिलावट बहुत बड़ी समस्या है। इसलिए वैज्ञानिकों को ऐसे टेस्ट विकसित करने चाहिए, जो आम आदमी की पहुंच में हो। उन्होंने कहा कि एनडीआरआई को डेयरी उद्यमी तैयार करने चाहिए और युवाओं को संस्थान द्वारा विकसित टेक्नोलॉजी हस्तांतरित करनी चाहिए, ताकि डेयरी उद्योग को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमें ब्रीडिंग की ओर ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि देश में पशुओं की संख्या अधिक, लेकिन उनमें से अच्छी नस्ल के पशु कम हैं। उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां पर 2.5 प्रतिशत मवेशियों से देश का 8 प्रतिशत दूध पैदा किया जाता है। इसलिए इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने के लिए हमारे वैज्ञानिकों को अच्छी नस्ल के पशुओं की पहचान करनी होगी।
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मदर डेरी के एमडी डॉ. नागाराजन ने कहा कि देश में 30 साल की उम्र से नीचे की आबादी का एक बड़ा वर्ग है। युवा आबादी की प्रसंस्कृत और स्वस्थ आहार की डिमांड की वजह से डेयरी उद्योग एक आकर्षक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने दही के उदाहरण दिए और बताया कि किस उम्र के व्यक्ति को कौन सी दही खानी चाहिए।

प्रदर्शनी में उमड़ी भीड़
विभिन्न कंपनियों द्वारा डेयरी से संबंधित प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें तमाम प्रकार की मशीनरियां और प्रोडक्ट को प्रदर्शित किया गया। दो दिन में हजारों लोगों ने काफी उत्सुकता के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया और मशीनरियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

जल्द लागू होंगे इंडियन फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड-2016
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकारण (एफएसएसएआई) की सहायक निदेशक डा. मोनिका पूनिया ने खाद्य सुरक्षा के नियम बताए और कहा कि एफएसएसएआई मानव उपभोग के लिए सुरक्षित तथा पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि इंडियन फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड-2016 जल्द ही लागू कर दिए जाएंगे। इस अवसर पर डॉ. एचआर गुप्ता, डॉ. एके जैन, अशोक राव, रवि शंकर सहित संस्थान के अन्य लोग उपस्थित रहे।
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