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राज्य की 34 फल-सब्जी मंडियां ई-नेम पोर्टल से जुड़ीं
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। हरियाणा राज्य कृषि मार्केटिंग बोर्ड ने करनाल सहित प्रदेश की 34 फल एवं सब्जी मंडियों को ई-नेम पोर्टल से जोड़ दिया है। जिससे अब किसी भी मंडी में बैठकर आढ़ती व किसान अपने फलों व सब्जियों को खरीद और बेच सकेंगे, लेकिन इससे सब्जी-फल आढ़तियों की दिक्कतों में इजाफा हो सकता है, क्योंकि अब मंडियों में आने वाले फलों और सब्जियों का गेटपास अनिवार्य कर दिया है। जिन मंडियों को पोर्टल से नहीं जोड़ा है, उनके लिए भी नए नियम बनाए हैं। व्यवस्था को संचालित करने के लिए सक्षम युवाओं की नियुक्तियां की जाएंगी।
प्रदेश की अधिकांश अनाज मंडियों को तो पहले ही ई-नेम पोर्टल से जोड़ा गया था, अब फल एवं सब्जी मंडियों को भी ई-नेम पोर्टल से जोड़ना शुरू कर दिया गया है, जिससे फल एवं सब्जी मंडियां भी राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ सकेंगी।
करनाल मंडी विश्लेषक दिलावर सिंह ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत मंडी सुुपरवाइजर व ऑक्शन रिकॉर्डर 24 घंटे मंडी की निगरानी करेंगे। फल एवं सब्जी लेकर आने वाले प्रत्येक वाहन को मैन्युअल गेटपास अनिवार्य रूप से जारी करेंगे। इस गेट पास पर तिथि व समय, किसान का नाम, पता, वाहन संख्या, फल और सब्जी का नाम, भार (क्विंटल में) और आढ़ती का दुकान नंबर भी लिखा जाएगा। ई-नेम पोर्टल पर कार्यरत एक कर्मचारी हर रोज यह जानकारी दोपहर दो बजे तक पंचकूला कंट्रोल रूम को भेजेगा।
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पोर्टल से नहीं जुड़ी मंडियाें को भी देना होगा डाटा रिपोर्ट
जिन फल एवं सब्जी मंडियों को ई-नेम पोर्टल से नहीं जोड़ा गया है। वहां के मंडी सचिव भी संबंधित डाटा ऑपरेटर के माध्यम से ऐसी ही रिपोर्ट तैयार करेंगे और इसकी रिपोर्ट भेजेंगे। इसमें तीन सक्षम युवा डाटा ऑपरेटर की मदद करेंगे। सभी मंडी सचिवों को निर्देशित किया गया है कि वे कर्मचारियों के नाम, पद और मोबाइल नंबर और ड्यूटी रोस्टर कंट्रोल रूम को भेजेंगे।
इन सब्जी-फल मंडियों को जोड़ा गया
करनाल, अंबाला सिटी, अंबाला कैंट, बबैन, बहादुर गढ़, भिवानी, चरखी दादरी, डबवाली, ऐलनाबाद, फरीदाबाद, गोहाना, गुरुग्राम, हांसी, हिसार, जगधारी, झज्जर, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, पलवल, पंचकूला, पानीपत, पटौदी, पीपली, रेवाड़ी, रोहतक, शाहबाद, सिरसा, सोहाना, सोनीपत, थानेसर, बल्लभगढ़, फतेहाबाद व यमुनानगर।
सक्षम युवाओं की होगी नियुक्ति
फल एवं सब्जी मंडियों को ई-नेम पोर्टल पर लाने के लिए किए गए बदलाव के तहत अब सक्षम युवाओं की नियुक्तियां की जाएंगी। दो-दो सक्षम युवा सभी फल एवं सब्जी मंडियों के थोक मूल्य को एकत्रित करेंगे। हर मंडी में दैनिक मूल्य को डाटा प्रारूप पर भरकर पंचकूला स्थित कंट्रोल रूम को व्हाट्सएप या ई-मेल के जरिए हर रोज भेजा जाएगा। इन सक्षम युवाओं की नियुक्ति के लिए मार्केटिंग बोर्ड ने पहले ही जिला रोजगार अधिकारियों के माध्यम से मार्केट कमेटी के सचिवों को मांग भेजने के निर्देश दिए हैं। इन सभी 34 मंडियों में नियुक्त सक्षम युवाओं की उपस्थिति को सब्जी मंडियों के साथ-साथ नियंत्रण कक्ष को दैनिक रिपोर्ट पेश करने के आधार पर नियंत्रण कक्ष के प्रभारी द्वारा सत्यापित किया जाएगा।
ई-नेम पोर्टल पर फल एवं सब्जी मंडियों को जोड़ने से प्रदेश भर की सब्जी मंडियों में आढ़तियों को दिक्कत आ रही है। ये सरकार की तानाशाही है। इसमें पहले से एसोसिएशन के आढ़तियों से बात की जानी चाहिए थी। सब्जियां व फल कई श्रेणी के होते हैं, मंडी कर्मी सारे माल को एक ही ग्रेड में अंकित कर देते हैं। गेट पर पर्ची किसी और के नाम की होती है, माल कहीं और उतरता है, क्योंकि कभी-कभी माल देखने के बाद वो आढ़ती माल नहीं खरीदता है तो दूसरे को बेचना पड़ता है। इसमें काफी परेशानी हो रही है।
तेजिंद्र सिंह डिंपी, प्रधान फल एवं सब्जी आढ़ती एसोसिएशन करनाल
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करनाल। हरियाणा राज्य कृषि मार्केटिंग बोर्ड ने करनाल सहित प्रदेश की 34 फल एवं सब्जी मंडियों को ई-नेम पोर्टल से जोड़ दिया है। जिससे अब किसी भी मंडी में बैठकर आढ़ती व किसान अपने फलों व सब्जियों को खरीद और बेच सकेंगे, लेकिन इससे सब्जी-फल आढ़तियों की दिक्कतों में इजाफा हो सकता है, क्योंकि अब मंडियों में आने वाले फलों और सब्जियों का गेटपास अनिवार्य कर दिया है। जिन मंडियों को पोर्टल से नहीं जोड़ा है, उनके लिए भी नए नियम बनाए हैं। व्यवस्था को संचालित करने के लिए सक्षम युवाओं की नियुक्तियां की जाएंगी।
प्रदेश की अधिकांश अनाज मंडियों को तो पहले ही ई-नेम पोर्टल से जोड़ा गया था, अब फल एवं सब्जी मंडियों को भी ई-नेम पोर्टल से जोड़ना शुरू कर दिया गया है, जिससे फल एवं सब्जी मंडियां भी राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ सकेंगी।
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करनाल मंडी विश्लेषक दिलावर सिंह ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत मंडी सुुपरवाइजर व ऑक्शन रिकॉर्डर 24 घंटे मंडी की निगरानी करेंगे। फल एवं सब्जी लेकर आने वाले प्रत्येक वाहन को मैन्युअल गेटपास अनिवार्य रूप से जारी करेंगे। इस गेट पास पर तिथि व समय, किसान का नाम, पता, वाहन संख्या, फल और सब्जी का नाम, भार (क्विंटल में) और आढ़ती का दुकान नंबर भी लिखा जाएगा। ई-नेम पोर्टल पर कार्यरत एक कर्मचारी हर रोज यह जानकारी दोपहर दो बजे तक पंचकूला कंट्रोल रूम को भेजेगा।
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पोर्टल से नहीं जुड़ी मंडियाें को भी देना होगा डाटा रिपोर्ट
जिन फल एवं सब्जी मंडियों को ई-नेम पोर्टल से नहीं जोड़ा गया है। वहां के मंडी सचिव भी संबंधित डाटा ऑपरेटर के माध्यम से ऐसी ही रिपोर्ट तैयार करेंगे और इसकी रिपोर्ट भेजेंगे। इसमें तीन सक्षम युवा डाटा ऑपरेटर की मदद करेंगे। सभी मंडी सचिवों को निर्देशित किया गया है कि वे कर्मचारियों के नाम, पद और मोबाइल नंबर और ड्यूटी रोस्टर कंट्रोल रूम को भेजेंगे।
इन सब्जी-फल मंडियों को जोड़ा गया
करनाल, अंबाला सिटी, अंबाला कैंट, बबैन, बहादुर गढ़, भिवानी, चरखी दादरी, डबवाली, ऐलनाबाद, फरीदाबाद, गोहाना, गुरुग्राम, हांसी, हिसार, जगधारी, झज्जर, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, पलवल, पंचकूला, पानीपत, पटौदी, पीपली, रेवाड़ी, रोहतक, शाहबाद, सिरसा, सोहाना, सोनीपत, थानेसर, बल्लभगढ़, फतेहाबाद व यमुनानगर।
सक्षम युवाओं की होगी नियुक्ति
फल एवं सब्जी मंडियों को ई-नेम पोर्टल पर लाने के लिए किए गए बदलाव के तहत अब सक्षम युवाओं की नियुक्तियां की जाएंगी। दो-दो सक्षम युवा सभी फल एवं सब्जी मंडियों के थोक मूल्य को एकत्रित करेंगे। हर मंडी में दैनिक मूल्य को डाटा प्रारूप पर भरकर पंचकूला स्थित कंट्रोल रूम को व्हाट्सएप या ई-मेल के जरिए हर रोज भेजा जाएगा। इन सक्षम युवाओं की नियुक्ति के लिए मार्केटिंग बोर्ड ने पहले ही जिला रोजगार अधिकारियों के माध्यम से मार्केट कमेटी के सचिवों को मांग भेजने के निर्देश दिए हैं। इन सभी 34 मंडियों में नियुक्त सक्षम युवाओं की उपस्थिति को सब्जी मंडियों के साथ-साथ नियंत्रण कक्ष को दैनिक रिपोर्ट पेश करने के आधार पर नियंत्रण कक्ष के प्रभारी द्वारा सत्यापित किया जाएगा।
ई-नेम पोर्टल पर फल एवं सब्जी मंडियों को जोड़ने से प्रदेश भर की सब्जी मंडियों में आढ़तियों को दिक्कत आ रही है। ये सरकार की तानाशाही है। इसमें पहले से एसोसिएशन के आढ़तियों से बात की जानी चाहिए थी। सब्जियां व फल कई श्रेणी के होते हैं, मंडी कर्मी सारे माल को एक ही ग्रेड में अंकित कर देते हैं। गेट पर पर्ची किसी और के नाम की होती है, माल कहीं और उतरता है, क्योंकि कभी-कभी माल देखने के बाद वो आढ़ती माल नहीं खरीदता है तो दूसरे को बेचना पड़ता है। इसमें काफी परेशानी हो रही है।
तेजिंद्र सिंह डिंपी, प्रधान फल एवं सब्जी आढ़ती एसोसिएशन करनाल