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कर्ण नगरी के मतदाताओं का घटा उत्साह, पिछली बार की अपेक्षा घटा मतदान, प्रत्याशी हुए परेशान
Updated Mon, 17 Dec 2018 12:41 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कर्ण नगरी के मतदाताओं ने पिछली बार के निगम चुनावों की अपेक्षा कम उत्साह दिखाया। बता दें कि पिछली बार हुए चुनावों में कुल 73.5 प्रतिशत मतदान हुआ था और लोगों ने खुलकर वोट डाले थे, लेकिन इस बार लोग कम संख्या में घरों से बाहर निकले। केवल 61.8 प्रतिशत ही मतदान हो सका। खास बात ये है कि करनाल विधानसभा से मुख्यमंत्री होने के कारण भी यह सीट काफी अहम मानी जाती है। ऐसे में मतदान के प्रति कम हुए रुझान को राजनीतिक लोग ठीक नहीं मान रहे हैं। कम मतदान होने को लेकर प्रत्याशियों के भी पसीने छूटे हुए हैं। मतदान प्रतिशत कम होने से प्रत्याशियों को हार का डर सताने लगा है। हालांकि, इसके पीछे अलग-अलग राजनीतिक दल अलग-अलग कारण बता रहे हैं।
सभी के अपने-अपने समीकरण, अपनी-अपनी जीत
शहर की सरकार के लिए मतदान हो चुका है और सभी की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है। इसके बावजूद प्रत्याशी जीत के दावे कर रहे हैं। मतदान के बाद रात को ही सभी प्रत्याशियों ने अपने बूथ एजेंटों के साथ बैठक की और मतदान की फीडबैक ली। फीडबैक के बाद से प्रत्याशी हौसले में हैं और जीत के दावे ठोक रहे हैं। जब उनसे जीत का कारण पूछा जाता है तो सभी अपने अपने हिसाब से समीकरण और आंकड़े बताते हैं। इन आंकड़ों को घूमाकर वे दूसरे को हराते हैं और खुद को विनिंग कैंडिडेट घोषित करते हैं। बात चाहे मेयर पद के दावेदार की हो या फिर पार्षद पद के दावेदार की। जातिगत आंकड़ों के हिसाब सब अपनी जीत निश्चित मान कर चल रहे हैं। एक दावेकार एक जाति को खुद के साथ आने की बात करता है तो वहीं दूसरा संबंधित जाति के आधे से ज्यादा वोट मिलने के दावे करता है।
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करनाल। कर्ण नगरी के मतदाताओं ने पिछली बार के निगम चुनावों की अपेक्षा कम उत्साह दिखाया। बता दें कि पिछली बार हुए चुनावों में कुल 73.5 प्रतिशत मतदान हुआ था और लोगों ने खुलकर वोट डाले थे, लेकिन इस बार लोग कम संख्या में घरों से बाहर निकले। केवल 61.8 प्रतिशत ही मतदान हो सका। खास बात ये है कि करनाल विधानसभा से मुख्यमंत्री होने के कारण भी यह सीट काफी अहम मानी जाती है। ऐसे में मतदान के प्रति कम हुए रुझान को राजनीतिक लोग ठीक नहीं मान रहे हैं। कम मतदान होने को लेकर प्रत्याशियों के भी पसीने छूटे हुए हैं। मतदान प्रतिशत कम होने से प्रत्याशियों को हार का डर सताने लगा है। हालांकि, इसके पीछे अलग-अलग राजनीतिक दल अलग-अलग कारण बता रहे हैं।
सभी के अपने-अपने समीकरण, अपनी-अपनी जीत
शहर की सरकार के लिए मतदान हो चुका है और सभी की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है। इसके बावजूद प्रत्याशी जीत के दावे कर रहे हैं। मतदान के बाद रात को ही सभी प्रत्याशियों ने अपने बूथ एजेंटों के साथ बैठक की और मतदान की फीडबैक ली। फीडबैक के बाद से प्रत्याशी हौसले में हैं और जीत के दावे ठोक रहे हैं। जब उनसे जीत का कारण पूछा जाता है तो सभी अपने अपने हिसाब से समीकरण और आंकड़े बताते हैं। इन आंकड़ों को घूमाकर वे दूसरे को हराते हैं और खुद को विनिंग कैंडिडेट घोषित करते हैं। बात चाहे मेयर पद के दावेदार की हो या फिर पार्षद पद के दावेदार की। जातिगत आंकड़ों के हिसाब सब अपनी जीत निश्चित मान कर चल रहे हैं। एक दावेकार एक जाति को खुद के साथ आने की बात करता है तो वहीं दूसरा संबंधित जाति के आधे से ज्यादा वोट मिलने के दावे करता है।
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